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जीएमएसएच-16 डाइट घोटाला: सीबीआई-विजिलेंस ने की पांच घंटे पूछताछ, 2.05 करोड़ के भुगतान पर घिरा प्रबंधन

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Thu, 30 Apr 2026 11:57 AM IST
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सार

जीएमएसएच-16 की मेस मरीजों को निर्धारित डाइट के अनुसार भोजन उपलब्ध कराने के लिए संचालित की जाती है। पहले यह व्यवस्था अस्पताल खुद संभालता था लेकिन 15 नवंबर 2022 को इसे दिल्ली की एक निजी कंपनी को दो साल के लिए सौंप दिया गया। यहीं से अनियमितताओं का सिलसिला शुरू हुआ।

GMSH-16 Diet Scam CBI Vigilance Conducts Interrogation Management Under Scrutiny Over ₹2.05 Crore Payment
चंडीगढ़ जीएमएसएच 16 अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

चंडीगढ़ जीएमएसएच-16 में सामने आए डाइट घोटाले में सीबीआई और विजिलेंस की संयुक्त टीम ने अस्पताल पहुंचकर करीब पांच घंटे तक पूछताछ की। 
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सुबह 11 बजे से शुरू हुई कार्रवाई शाम चार बजे तक चली। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों, दो अकाउंट ऑफिसरों और डाइट विभाग से जुड़े कई कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। पूछताछ की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।

सूत्रों के मुताबिक, जांच यहीं नहीं रुकी। देर शाम कुछ अधिकारियों को उनके घरों से दोबारा अस्पताल बुलाकर पूछताछ की गई। इस कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर किस स्तर पर मिलीभगत हुई और कैसे टेंडर में तय राशि से कई गुना अधिक भुगतान कर दिया गया। 
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ऑडिट रिपोर्ट ने खोली पोल

जून 2024 में हुई ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मेस संचालन का वास्तविक बिल करीब 68 लाख रुपये था जबकि अधिकारियों की मंजूरी से ठेकेदार को 2.05 करोड़ रुपये तक का भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, संबंधित कंपनी ने न तो बिजली-पानी के बिल जमा किए और न ही अस्पताल को तय किराया अदा किया, इसके बावजूद भुगतान जारी रहा। ऑडिट में यह भी सामने आया कि आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू के डाइट चार्ट में गंभीर गड़बड़ियां थीं।

कई मामलों में बिना भोजन उपलब्ध कराए ही फर्जी बिल पास किए गए। मामला उजागर होने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने मई 2023 से कंपनी के बिल रोकने का दावा किया और करीब 1.38 करोड़ रुपये की राशि अटका दी। जनरल फाइनेंशियल रूल्स के तहत अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी अनियमितताओं के बावजूद कंपनी का ठेका बेहतर कार्य का हवाला देकर बढ़ा दिया गया। सीबीआई और विजिलेंस की कार्रवाई से साफ है कि आने वाले दिनों में बड़े खुलासे हो सकते हैं।
 
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