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आंख में खुजली हो या कोई और दिक्कत, तो डॉक्टर से सलाह के बिना न डालें दवाईं, वरना गंवा देंगे रोशनी

Wed, 13 Mar 2019 12:53 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Wed, 13 Mar 2019 12:53 PM IST
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Take Case of Eyes, Glaucoma may affect eye sight
सांकेतिक तस्वीर
आंखों में खुजली हो या कोई और दिक्कत तो लोग घर पर रखी दवा डाल लेते हैं या फिर डॉक्टर से बिना पूछे कोई आई ड्रॉप ले आते हैं, लेकिन ऐसा करना खतरनाक होता है। एक बार ये बीमारी हो गई, तो गई रोशनी दोबारा वापस नहीं आएगी।
Take Case of Eyes, Glaucoma may affect eye sight
सांकेतिक तस्वीर
आपके लिए जानना बेहद जरूरी है कि कई आई ड्रॉप में स्टेरॉयड मिला होता है, जिसकी जानकारी न तो मरीज को होती है और न ही बेचने वाले को। लंबे समय तक स्टेरॉयड लेने से ग्लूकोमा होने की आशंका रहती है। वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक पर पीजीआई के एडवांस आई सेंटर के प्रोफेसर एसएस पांडव ने बताया कि जब भी आंख में कोई तकलीफ हो तो डॉक्टर से बिना पूछे आंख में दवा न डालें। क्योंकि कई आई ड्रॉप में स्टेरॉयड होता है, जो आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे ग्लूकोमा होने का खतरा बना रहता है।
Take Case of Eyes, Glaucoma may affect eye sight
सांकेतिक तस्वीर
भारत में करीब एक करोड़ दस लाख लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं, जिसमें एक करोड़ से ज्यादा लोग अंधेपन से जूझ रहे हैं। ग्लूकोमा के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके चलते नजर का जो नुकसान हो गया, उसका कोई इलाज नहीं है। अगर पता न चले तो यह मर्ज धीरे-धीरे बढ़ता रहता है और ज्यादा बढ़ जाने पर अंधेपन की नौबत आ सकती है। हां, अगर इसका पता वक्त रहते चल जाए तो आगे और नुकसान से बचने के लिए इलाज व देखभाल की जा सकती है।
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Take Case of Eyes, Glaucoma may affect eye sight
सांकेतिक तस्वीर
90 फीसदी मरीजों को नहीं पता कि उन्हें ग्लूकोमा है
प्रो. पांडव ने बताया कि ग्लूकोमा का कोई लक्षण ऐसा नहीं है, जिससे लोगों को पता चल सके कि वे इस बीमारी की चपेट में हैं। 80 फीसदी नजर खराब होने के बाद ही अस्पताल पहुंचते हैं। इसमें मरीज की सिर्फ बीच की नजर बचती है। वह अपनी आंख से इधर-उधर नहीं देख पाता। यह मर्ज 40 साल की उम्र के बाद होता है। इसलिए अपनी आंखों का रेगुलर चेकअप कराएं। आंखों का प्रेशर भी जरूर चेक करवाएं।  ग्लूकोमा होने पर शीर्षासन न करें। सुबह के वक्त ज्यादा पानी न पीएं। इससे प्रेशर बढ़ता है।
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सांकेतिक तस्वीर
क्या होता है ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद)
ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया भी कहा जाता है। आंख के अंदर अंगों के पोषण के लिए एक तरल पदार्थ उत्पन्न होता है। पोषण के बाद यह तरल पदार्थ आंख के महीन छिद्र से बाहर निकलता है। उम्र के साथ छिद्र तंग होने शुरू होते हैं। इससे तरल पदार्थ के निकलने की प्रक्रिया भी बाधित होने लगती है। इससे आंख का प्रेशर बढ़ने लगता है। आंख का बढ़ा प्रेशर ऑप्टिक नर्व (आंखों से दिमाग को सिग्नल भेजने वाली नर्व) को डैमेज करता है। आमतौर पर ऐसा आंखों पर ज्यादा जोर पड़ने से होता है। दरअसल, ऑप्टिक नर्व काफी नाजुक होती है, इसलिए जरा भी ज्यादा प्रेशर पड़ने पर यह ब्लॉक हो जाती है। इससे दिखना बंद हो जाता है। हालांकि आंख के बढ़े प्रेशर का मतलब यह कतई नहीं है कि उस शख्स को ग्लूकोमा हो गया है, लेकिन इससे खतरा बढ़ जाता है।
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