इस बार भी करवा चौथ में कई रंग देखने को मिले हैं। एक ऐसा ही रंग लक्ष्मी के रुप में देखने को मिला। सच में करवा चौथ की इतनी खूबसूरत तस्वीरें किसी ने नहीं देखी होंगी। लड़की के दोनों हाथ पैर नहीं, फिर भी चांद देखा और पूरी विधि से व्रत पूजन किया। देखिए कैसे...
अनोखा करवा चौथः दोनों हाथ पैर नहीं, फिर भी ऐसे किया चांद का दीदार, खूबसूरत तस्वीरें...
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बता दें कि लड़की का यह दूसरा करवा चौथ था। पिछले साल कारवा चौथ से पांच दिन पहले ही लव मैरिज की थी। लड़की का नाम लक्ष्मी है और उसके पति का नाम विनोद। विनोद ने लक्ष्मी की व्रत पूजन में पूरी मदद की, कैसे ये तस्वीरें देखकर अंदाजा लगा सकते हैं। वहीं जिसने भी इस अनोखे करवा चौथ को देखा, वो गद्गद हो गया। हर किसी के मुंह से निकला जोड़ी हो ती ऐसी और पति हो तो ऐसा।
चंडीगढ़ के फर्नीचर कॉलोनी में रहने वाली लक्ष्मी के दोनों हाथ पैर नहीं, विनोद का पैर खराब। मंदिर में मुलाकात हुई, फिर दोस्ती और प्यार। करीब डेढ़ साल की प्रेमी कहानी रही और एक दूजे को हमसफर बना दिया। शनिवार को नई साड़ी और साज श्रृंगार करके करवाचौथ पूजन के लिए लक्ष्मी तैयार होकर मंदिर गई। वहां पूजन करके पति की लंबी आयु के लिए दुआएं मांगी। लक्ष्मी को भगवान से कोई शिकायत नहीं है। लक्ष्मी का कहना है कि भगवान ने उन्हें विनोद जैसा पति दिया है जो उनका हमसफर है।
रात को चांद निकलने के बाद लक्ष्मी ने छलनी पकड़ी और विनोद पूजन की थाली लेकर उसके सामने बैठ गया। इस तरह लक्ष्मी ने अपना व्रत पूरा किया, उसके बाद विनोद ने भी छलनी लेकर उसमें से लक्ष्मी का चेहरा देखा। यह देखकर लक्ष्मी शरमा गई और वहां मौजूद सभी लोगों ने तालियां बजाकर प्रोत्साहित किया। माहौल इतना खूबसूरत था कि हर कोई निहारता रह गया।
बता दें कि विनोद और लक्ष्मी ने डेढ़ साल तक चली मुलाकातों के बाद एक दूसरे को जीवनसाथी चुन लिया और शादी कर ली। लक्ष्मी के बचपन से ही न दोनों हाथ हैं और न दोनों पांव हैं। मां ने उसकी शादी को लेकर आस छोड़ दी थी, लेकिन भगवान के मंदिर में लक्ष्मी को विनोद के रूप में अपना जीवनसाथी मिल गया। विनोद का एक पैर काम नहीं करता। वो बैसाखी के सहारे चलते हैं।
एक संस्था चलाने वाले अशोक कुमार ने इनकी फैमिली से बात की और शादी के लिए मनाया। वहीं एक दूसरे का हाथ थामकर लक्ष्मी और विनोद बेहद खुश हैं। दोनों अब एक दूसरे को पूरा महसूस कर रहे हैं। विनोद बताते हैं कि लक्ष्मी से उनकी मुलाकात मंदिर में हुई थी। मुलाकातों का दौर कब प्यार में बदल गया, पता नहीं चला। फाइनली हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।