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इस आदमी ने अकेले हिला दीं 88 साल पुराने बीसीसीआई की जड़ें...
Tue, 03 Jan 2017 03:24 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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Updated Tue, 03 Jan 2017 03:24 PM IST
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बीसीसीआई
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दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के रूप में जाने-जाने वाले बीसीसीआई की जड़े एक शख्स ने हिला कर रख दी। ये व्यक्त हैं बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व सचिव आदित्य वर्मा। इस पूरी लड़ाई का श्रेय आदित्य वर्मा को जाता है। यदि आदित्य वर्मा ने बीसीसीआई की जांच समिति के खिलाफ आवाज न उठाई होती तो आज देश को यह सुखद दिन देखने को नहींं मिलता।
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आदित्य वर्मा
आदित्य वर्मा ही वह व्यक्ति हैं जिनकी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाइकोर्ट ने साल 2013 इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग मामले की सुनवाई की और आज बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को कोर्ट ने निलंबित कर दिया।
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एन श्रीनिवासन
आदित्य वर्मा ने साल 2013 में आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में बॉम्बे हाइकोर्ट में एक जनहित याचिक दायर की थी। जिसमें उन्होंने राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स फ्रेंचाइजियों की सट्टेबाजी में लिप्तता का जांच के लिए बीसीसीआई द्वारा गठित दो रिटायर्ड जजों की कमेटी की जांच को अवैध ठहराने की मांग की थी। बीसीसीआई ने 2 जून 2013 को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। कर्नाटक और मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस टी जयराम चाउता, मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर बाला सुब्रहमण्यम और बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले उस आयोग के सदस्य थे।
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bombay high court
28 जून 2013 को बीसीसीआई की इस समिति ने राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स को क्लीन चिट दी। इसके बाद आदित्य वर्मा एक्शन में आए। 30 जुलाई 2013 को बीसीसीआई की इस समिति के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करने के बाद बीसीसीआई की समिति की अवैध ठहराया।
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Bombay High Court
- फोटो : Bombay High Court
जिस वक्त आदित्य वर्मा की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही थी उस दौरान 1 अगस्त 2013 को वर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें किसी अनजान व्यक्ति का फोन आया था। उसने उन्हें इस मामले में कोर्ट के बाहर पैसे लेकर समझौता करने का लालच दिया गया था लेकिन वर्मा अपनी जगह अड़े रहे। उन्होंने याचिका वापस नहीं ली।
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