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भारतीय क्रिकेट के पितामह के बारे में वो बातें, जो आप नहीं जानते होंगे!

Sat, 10 Sep 2016 11:32 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 10 Sep 2016 11:32 AM IST
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Facts About Father Of Indian Cricket Ranjit Singh Ji
रणजीतसिंह जी
महाराजा रणजीतसिंह जी भारत के पहले क्रिकेटर कहे जा सकते हैं। भले ही वो भारत की टीम से न खेले हों, मगर फिर भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले वो पहले भारतीय हैं। क्रिकेट को भारत में मशहूर करने वालों में रणजीतसिंह जी का नाम सबसे पहले लिया जा सकता है। 10 सिंतबर 1872 को जन्में रणजीतसिंह को उपनाम ‘रणजी’ है। आइए जानते हैं उनके बारे में 10 बातें:


 

भारतीय क्रिकेट के पितामह के बारे में वो बातें, जो आप नहीं जानते होंगे!

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रणजीतसिंह जी
क्रिकेट से ज्यादा टेनिस था पसंद
10 साल की उम्र में क्रिकेट से नाता जोड़ने वाले रणजी के बारे में कहा जाता है कि उन्हें ‘जेन्टलमेंस’ के खेल से ज्यादा टेनिस में रुचि थी। उनकी तकनीक भी क्रिकेट के बजाय टेनिस के लिए बेहतर थी।

भारतीय क्रिकेट के पितामह के बारे में वो बातें, जो आप नहीं जानते होंगे!

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रणजीतसिंह जी
‘ब्लू’ जीतने की चाहत थी
‘ब्लू’ एक अवॉर्ड होता है जो स्कूल और युनिवर्सिटी चैंपियनशिप के दौरान दिया जाता है। सिर्फ ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज युनिवर्सिटी में ही ‘ब्लू’ दिया जाता था। रणजी ने 1891 में एडमिशन लिया और 2 साल में ही ‘ब्लू’ जीत लिया।

 
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रणजीतसिंह जी
बैकफुट पर महारथ हासिल करने वाले पहले खिलाड़ियों में शुमार
रणजी के लगता था कि उनके साथी खिलाड़ी फ्रंटफुट पर निर्भर करते हैं और शॉर्ट पिच गेंदों पर फेल हो जाते हैं। रणजी ने बैकुफट पर महारथ हासिल करने के लिए अपना एक पैर जमीन के साथ बांध कर प्रैक्टिस की। यहीं से ‘लेग ग्लांस’ का इजात हुआ।

 
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रणजीतसिंह जी
भेदभाव का हुए शिकार
प्रैक्टिस में शानदार खेल दिखाने वाले रणजी को भी भेदभाव का शिकार होना पड़ा। उन्हें 2 साल टीम में शामिल किया गया। उनके कप्तान को रणजी के ‘भारतीय’ होने से दिक्कत थी। फिर किसी खिलाड़ी के चोटिल होने के कारण उन्हें शामिल किया और उन्होंने 44 की शानदार औसत से रन बनाकर अपना लोहा मनवाया।
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