चाइनामैन कुलदीप यादव ने गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे वन-डे में हैट्रिक लेकर इतिहास रच दिया। वो वन-डे में हैट्रिक लेने वाले भारत के तीसरे गेंदबाज हैं। इसके अलावा कुलदीप हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय स्पिनर भी बने। कोलकाता के ईडन गार्डन्स पर कुलदीप ने अपने कोटे के आठवें और ऑस्ट्रेलियाई पारी के 33वें ओवर में दूसरी, तीसरी व चौथी गेंद पर क्रमशः मैथ्यू वेड (2), एशटन आगर और पैट कमिंस का शिकार किया।
एक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर की प्रेरणा से हैट्रिक लेने में कामयाब हुए कुलदीप यादव
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अपने प्रदर्शन से बेहद खुश कुलदीप ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि टीम इंडिया के साथ उनका सफर उम्मीद के मुताबिक देरी से शुरू हुआ, लेकिन वो आज जहां है उससे बेहद खुश हैं। 22 वर्षीय ने कहा, 'मैंने जिस तरह के प्रदर्शन किए, उससे लगा था कि जल्द ही देश के लिए खेलने का मौका मिलेगा। मुझे 2014 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के लिए कॉल आया, तब महसूस हुआ कि सबकुछ हासिल कर लिया है। दुर्भाग्यवश, मुझे पहले तीन वन-डे में खेलने का मौका नहीं मिला और फिर सीरीज रद्द हो गई।'
उन्होंने आगे कहा, 'फिर मुझे वापसी का मौका मिला। मैंने घरेलू क्रिकेट में काफी मेहनत की। तीन साल के बाद मुझे टीम में वापसी का मौका मिला। मुझे लगा कुछ साल पीछे छूट गए हैं। उम्मीद थी कि मैं जल्दी खेलने जाऊं। मगर समय से पहले और किस्मत से ज्यादा कुछ नहीं मिलता।'
कुलदीप ऑस्ट्रेलिया के महान लेग स्पिनर शेन वॉर्न को अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने कहा, 'जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया तब शेन वॉर्न स्पिन गेंदबाजी में सबसे बड़ा नाम थे। मेरे कोच मुझे उनके वीडियो दिखाते थे और कहते थे कि उनके जैसी गेंदबाजी करने का प्रयास करूं। वो चाहते थे कि मैं बिलकुल वॉर्न के जैसे गेंद डालूं, अच्छे से गेंद को ड्रिफ्ट कराऊँ और बिलकुल वैसे ही गेंद को टर्न कराऊँ, जैसे वो कराते थे। मेरा मकसद अभी भी यही है कि 20-30 प्रतिशत भी वॉर्न की तरह बन गया तो समझो मेरी जिंदगी सफल हो गई।'
अपनी रहस्यमयी गेंदबाजी के बारे में बात करते हुए कुलदीप ने कहा, 'मेरा रहस्य में विश्वास नहीं है। क्वालिटी गेंदबाजी रहस्यमयी नहीं होती। मिस्ट्री तो ये होती है कि अजीब-ओ-गरीब एक्शन से बॉल फेंक दी। मेरा एक्शन अच्छा है, गेंद अच्छे से निकलती है। मुझे ये मिस्ट्री स्पिनर का टैग नहीं अच्छा लगता।'