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रणजीत सिंह: जिन्हें बीमारी में भी खिलाते थे अंग्रेज, निराली बल्लेबाजी के लिए थे मशहूर

Thu, 10 Sep 2020 10:55 AM IST
Anshul Talmale अंशुल तलमले
Updated Thu, 10 Sep 2020 10:55 AM IST
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Maharaja Ranjit Singh: God Father of Indian cricket, the princely game changer
महाराजा रणजीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

भारतीय क्रिकेट के पितामह कहे जाने वाले जामनगर के महाराजा कुमार रणजीत सिंह का आज जन्मदिन है। 10 सितंबर 1872 को गुजराज के काठियावाड़ के सरोदर गांव में जन्में रणजीत सिंह अगर आज जिंदा होते तो अपना 148वां जन्मदिन मना रहे होते। 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए रणजीत सिंह ने भारत में ही क्रिकेट का ककहरा सीखा था। भारत में उन्हीं के नाम से राष्ट्रीय क्रिकेट चैंपियनशिप आयोजित की गई जो आज भी रणजी ट्रॉफी के नाम से चल रही है।

Maharaja Ranjit Singh: God Father of Indian cricket, the princely game changer
रणजीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

रणजीत सिंह को रणजी और स्मिथ के नाम से भी पुकारा जाता था। निराली बल्लेबाजी के लिए मशहूर इस खिलाड़ी ने अपनी कलाईयों की जादूगरी से लेग ग्लांस जैसे नए स्ट्रोक जोड़े थे। रणजी अपने जमाने के ऐसे बल्लेबाज थे जिनके पास कई तरह के स्ट्रोक की भरमार थी। पहले विरोधी टीम का कप्तान कभी लेग साइड में क्षेत्ररक्षक नहीं लगाता था। वह अपेक्षा करता था बल्लेबाज भद्रजन की तरह ऑफ साइड पर ही स्ट्रोक खेलेंगे। रणजी ने हालांकि इस धारणा को बदलकर रख दिया था और अपनी कलाईयों के इस्तेमाल से ऑन साइड पर काफी रन बटोरे थे।

Maharaja Ranjit Singh: God Father of Indian cricket, the princely game changer
विदेशी क्रिकेट क्लब में पहले भारतीय कप्तान रणजीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

रणजी के इसी कौशल के कारण इंग्लैंड के चयनकर्ताओं को उन्हें अपनी टीम में शामिल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वह इंग्लैंड की टीम में शामिल होने वाले एशियाई मूल के पहले क्रिकेटर थे। उस वक्त भारत में अंग्रेजों का शासन था और रणजीत का इंग्लैंड टीम में चयन हुआ था। रणजीत टेस्ट क्रिकेट के पहले खिलाड़ी थे, जो अपने करियर के पहले टेस्ट मैच में शतक ठोकते हुए नॉट आउट रहे।

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Maharaja Ranjit Singh: God Father of Indian cricket, the princely game changer
रणजीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

1897 में जब इंग्लिश टीम ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई तो रणजी ने सिडनी में पहले टेस्ट मैच में 7वें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरकर 175 रन की बेहतरीन पारी खेली थी जिससे इंग्लैंड जीत दर्ज करने में सफल रहा था। रणजी इस मैच से पहले बीमार थे और वह कमजोरी महसूस कर रहे थे, लेकिन इंग्लैंड की टीम उन्हें बाहर नहीं रखना चाहती थी। विजडन ने उनकी इस पारी के बारे में लिखा था कि उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए यह बल्लेबाजी का बेहतरीन नमूना था क्योंकि वह पहले दिन 39 रन बनाने के बाद बहुत कमज़ोरी महसूस कर रहे थे। दूसरे दिन सुबह का खेल शुरू होने से पहले तक डॉक्टर उनका इलाज कर रहा था।

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Maharaja Ranjit Singh: God Father of Indian cricket, the princely game changer
रणजीत सिंह - फोटो : सोशल मीडिया

रणजी ने अपने करियर में 15 टेस्ट मैच की 26 पारियों में 44.95 की औसत से 989 रन बनाए। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उन्होंने 307 मैच खेले जिनमें 56.37 की औसत से 24,092 रन बनाए। इसमें 72 शतक और 109 अर्धशतक भी शामिल हैं। इस महान क्रिकेटर का 60 वर्ष की उम्र में 2 अप्रैल 1933 को जामनगर में निधन हुआ। उनके भतीजे दिलीप सिंह भी इंग्लैंड की तरफ से टेस्ट मैच खेले थे।

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