भारतीय क्रिकेट में संन्यास एक पहेली की तरह है। यहां कोई खिलाड़ी तय ही नहीं कर पाता है कि अपने क्रिकेटिंग करियर पर कब विराम लगाना है। टीम इंडिया में जहां कुछ खिलाड़ियों ने अपने करियर के उफान पर रहते ही सही समय भांपकर संन्यास का फैसला लिया, जबकि कुछ खिलाड़ी इस बारे में फैसला लेने के लिए जूझते दिखे।
आखिर क्यों नहीं ले रहे हैं धोनी संन्यास, क्या होगा इन खिलाड़ियों जैसा हाल?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीसीसीआई के एक सूत्र के अनुसार धोनी बांग्लादेश के दौरे के लिए भी उपलब्ध नहीं होंगे। सूत्र के हवाले से बताया गया कि बीसीसीआई में हम सीनियर और ए टीम के क्रिकेटरों के लिए 45 दिन पहले मैचों (अंतररराष्ट्रीय और घरेलू) की तैयारी कर लेते हैं। जिसमें प्रशिक्षण, डोपिंग रोधी कार्यक्रम से जुड़ी चीजे शामिल हैं। यह पता चला है कि मंगलवार से शुरू हो रही विजय हजारे ट्रॉफी में भी धोनी झारखंड के लिए नहीं खेलेंगे। दिग्गज सुनील गावस्कर ने हाल ही में एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा था कि, ‘मुझे लगता है वह खुद ही यह फैसला कर लेंगे। हमें धोनी से आगे के बारे में सोचना चाहिए। कम से कम वह मेरी टीम का हिस्सा नहीं होंगे।
गावसकर ने सही समय पर लिया था फैसला
गावस्कर को एक क्रिकेटर के तौर पर सीधे स्पष्ट तौर पर बोलने के लिए जाना जाता है। बात जब संन्यास की आती है, तो गावसकर ने यह फैसला बेहतरीन तरीके से किया था। गावस्कर ने चिन्नास्वामी स्टेडियम की टर्न लेती पिच पर अपने अंतिम टेस्ट में पाकिस्तान के खिलाफ 96 रन बनाए थे। गावस्कर 1987 में 37 साल के थे, लेकिन अपनी शानदार तकनीक के दम पर 1989 के पाकिस्तान दौरे तक खेल सकते थे। वह इस खेल को अलविदा कहने की कला को अच्छी तरह से जानते थे। उन्हें पता था कि अच्छे प्रदर्शन के बाद भी वह इस खेल का लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं।
कपिल देव संघर्ष करते दिखे थे
दिवंगत विजय मर्चेंट ने एक बार कहा था कि खिलाड़ी को संन्यास के फैसले के बारे में सतर्क रहना चाहिए। उसे वैसे समय संन्यास लेना चाहिए जब लोग पूछे ‘अभी क्यों’, ना कि तब जबकि लोग यह पूछने लगे कि ‘कब’। हर महान क्रिकेटर हालांकि गावस्कर की तरह इस कला में माहिर नहीं रहा। भारत के महान क्रिकेटरों में शुमार कपिल देव पर 1991 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर उम्र का असर साफ दिख रहा था। कपिल विश्व रिकॉर्ड के करीब थे, लेकिन उनकी गति में कमी आ गई थी और वह लय में भी नहीं थे।
कपिल की वजह से श्रीनाथ को करना पड़ा तीन वर्ष इंतजार
तत्कालीन कप्तान अजहरूद्दीन उनसे कुछ ओवर कराने के बाद स्पिनरों को गेंद थमा देते थे। उस समय भारतीय क्रिकेट में सबसे तेज गति से गेंदबाजी करने वालों में से एक जवागल श्रीनाथ को कपिल के टीम में होने के कारण तीन साल तक राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला था। क्रिकेट को अलविदा कहने की तैयारी कर रहे एक खिलाड़ी ने कहा कि आप 10 साल की उम्र में खेलना शुरू करते हैं, 20 साल की उम्र में पदार्पण करते हैं और 35 साल की उम्र तक खेलते हैं। आप अपनी जिंदगी के 25 साल सिर्फ एक चीज को दे देते हैं। आप पैसे कमाते हैं, आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती है और अचानक से आपको ऐसा फैसला करना होता है, जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है।

कमेंट
कमेंट X