26 साल बाद मसूरी में लौटा बड़ा पर्दा, देखिए कैसे थे यहां पहले के सिनेमा हाल
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अंग्रेजों के जमाने से आजादी के बाद अस्सी के दशक तक कभी छह सिनेमा हालों से गुलजार रहने वाली मसूरी में करीब तीन दशक से एक भी सिनेमा हाल नहीं था। देश-विदेश से आने वाले सैलानी, छात्रावासों में रहने वाले छात्र और स्थानीय लोगों को फिल्म देखने राजधानी देहरादून जाना पड़ रहा था।
मसूरी में अंग्रेजों के शासनकाल में मुंबई के बाद दूसरा इलेक्ट्रिक बाइस्कोप खुला था। उस समय मसूरी दुनिया के उन शहरों में शुमार था, जहां महज एक हजार से कम स्थायी आबादी पर छह सिनेमा हॉल थे।
वर्ष 1925 में मसूरी में पहला इलेक्ट्रिक सिनेमा हॉल पिक्चर पैलेस खुला। यहां शो चालू होने से पहले बैंड बजाया जाता था। सिनेमा हालों की फेहरिस्त में पिक्चर पैलेस, जुबली, मैजिक यानि ला अंजूमन, रियाल्टो, कैपिटल और वासु थियेटर शामिल थे। लेकिन एक-एक कर सभी सिनेमा हॉल बंद होते गए।
सब से आखिरी में 1990 के आसपास वासु थियेटर बंद हो गया था। अब वासु थियेटर में ही आधुनिक तकनीक से दो डिजिटल सिनेमा हॉल बनाए गए हैं। दोनों में 79-79 सीटें हैं।