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गणेश चतुर्थी 2018: इस पावन जगह पर जन्मे भगवान श्रीगणेश, यहां आकर मिलता है असीम पुण्य

Fri, 14 Sep 2018 12:42 PM IST
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार Updated Fri, 14 Sep 2018 12:42 PM IST
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Ganesh Chaturthi 2018 lord ganesha birth place photos
bilkeshwar temple

गणपति को पाना है तो मन का अंधकार मिटना पड़ता है। प्रथम पूज्य भगवान गणेश इस सकल ब्रह्मांड की ऊर्जा हैं। यह चराचर उन्हीं की ऊर्जा से संचालित हो रहा है। 


 

Ganesh Chaturthi 2018 lord ganesha birth place photos
bilkeshwar temple

श्रीगणेश उत्तराखंड की इसी पावन भूमि पर जन्मे। वास्तव में इस ब्रह्मांड की स्थापना विष्णु के निर्देश पर ब्रह्मा ने की। पौराणिक आख्यानों के अनुसार ब्रह्मांड को ऊर्जा श्रीगणेश से मिली। उन्हीं की ऊर्जा से यह जगत शक्ति सूत्र में बंधा हुआ है। अज्ञान का आवरण मिटते ही गणपति का दर्शन हो जाता है।
 

Ganesh Chaturthi 2018 lord ganesha birth place photos
bilkeshwar temple

शिव को पाने के लिए कनखल के राजा दक्ष की पुत्री सती ने दूसरा जन्म हिमालय पुत्री पार्वती के रूप में लिया था। उन्होंने हरिद्वार के बिल्वकेश्वर के समीप गौरीकुंड में शिव को पाने के लिए तपस्या की। आज तृतीया के दिन मां गौरी का उत्सव पूरे देश में मनाया गया। इसे गौरा तीज कहा जाता है। शिव और पार्वती के विवाह के बाद श्रीगणेश का जन्म उत्तराखंड की इसी पावन भूमि पर पार्वती के मैल से हुआ था।

 

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Ganesh Chaturthi 2018 lord ganesha birth place photos
bilkeshwar temple

श्रीगणेश वास्तव में शिव और पार्वती के मिलन से उत्पन हुए गर्भ पुत्र नहीं हैं। शिव पुराण में पार्वती के जिस मैल का वर्णन है, वह वास्तव में स्त्री के कर्म शक्ति का प्रतीक है। शिवोत्सव के बाद महोत्सव की धूल पार्वती के शरीर पर चढ़ गई थी। उसी धूल ने गणेश का आकार ग्रहण किया। भगवान शिव ने अनजाने में अपने पुत्र गणेश का सिर युद्ध के बाद धड़ से अलग कर दिया था। पार्वती से यह पता चलने पर कि गणेश तो शिव के ही पुत्र हैं, शिव ने हाथी का सिर गणेश के धड़ पर लगाकर उन्हें पुर्नजन्म दिया।  
 

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गणेश जी - फोटो : amar ujala

देवताओं के बीच जब यह संघर्ष चला देवों में प्रथम पूज्य कौन है, तब ब्रह्मा ने निर्णय दिया कि जो भी पहले इस ब्रह्मांड की परिक्रमा कर लेगा, वही प्रथम पूज्य माना जाएगा। सभी देव अपने-अपने वाहनों पर परिक्रमा के लिए निकले। ज्ञान के धनी श्रीगणेश का वाहन मूशक था। वे जानते थे कि इस छोटे से वाहन पर वे ब्रह्मांड की परिक्रमा नहीं कर सकते।
 

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