सफलता चाहिए तो आपके अंदर ट्रिपल पी यानी पैशन (लगन), पेशंस (धैर्य) और पर्सिसटेंस (अथक प्रयास) जैसे गुण होने चाहिए। बृहस्पतिवार को गवर्नर्स अवॉर्ड से मेधावियों को सम्मानित करते हुए राज्यपाल डा. कृष्णकांत पाल ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इंटरनेट से सूचनाएं और जानकारी मिल सकती हैं लेकिन ज्ञान चाहिए तो किताबें पढ़नी होंगी।
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गवर्नर्स अवॉर्ड के दौरान राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल ने दिए मेधावियों को सफलता के मंत्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 Jul 2018 09:29 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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उन्होंने कहा कि करियर निर्माण के लिए आईक्यू के साथ ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) भी आवश्यक है। उन्होंने स्कूली बच्चों से अच्छी किताबें पढ़ने को आदत बनाने का आह्वान किया। कहा कि उत्तीर्ण प्रतिशत बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी फोकस होना चाहिए। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने पर फोकस किया जा रहा है। आज शिक्षा की गुणवत्ता इतनी अच्छी नहीं है कि बहुत कुुछ कहा जा सके, लेकिन राजकीय शिक्षा को बचाने के लिए हमारा प्रयास जारी है। पुरस्कार पाने के बाद सभी मेधावी दोगुने उत्साह और ऊर्जा से बेहतर करने का प्रयास करें।
गवर्नर केके पॉल
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राज्यपाल डा. कृष्णकांत पाल ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को हर साल छात्र-छात्राओं के लिए सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि किताबी पढ़ाई के साथ-साथ इस तरह की प्रतियोगिताएं होने से उन्हें फायदा होगा। पिछले साल भी गवर्नर्स अवॉर्ड प्रदान करते हुए राज्यपाल डॉ. पाल ने ‘यूके जीनियस’ नाम से सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता आयोजित करने को कहा था जिसे शिक्षा विभाग ने तवज्जो ही नहीं दी। एक साल बीतने के बावजूद राज्यपाल के सुझाव पर कोई अमल नहीं हुआ है।
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शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कार्यक्रम में सास-बहू की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक परिवार में सास-बहू हमेशा लड़ते रहते थे। एक दिन दोनों लड़ रहे थे कि तभी तूफान आ गया। बेटा अपनी मां के पास गया तो वह बोली जाकर बहू को बचाओ! बहू के पास पहुंचा तो वह कहने लगी पहले मां को संभालो! तूफान थमा तो बेटे ने कहा कि आप हमेशा लड़ते रहते हो फिर एक-दूसरे को बचाने को क्यों कहा? इस पर दोनों ने जवाब दिया, जब जिंदा रहेंगे तभी तो लड़ेंगे! उन्होंने कहा कि इस कहानी से शिक्षकों को सबक लेना चाहिए कि जब विभाग बचा रहेगा तभी तो वह अपनी मांगों को लेकर झगड़ सकेंगे। जब स्कूलों में बच्चे नहीं रहेंगे तो कैसे शिक्षक और कैसा मंत्री!
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सचिव विद्यालयी शिक्षा डा. भूपिंदर कौर औलख ने बताया कि प्रदेश की मेरिट में शामिल रहे मेधावियों, उत्कृष्ट परिणाम देने वाले विद्यालयों के शिक्षकों को कर्नाटक की सैर कराई जाएगी। उन्होंने कर्नाटक की संस्कृति व पर्यटन स्थलों के संबंध में जानकारी दी जाएगी। वहीं, कर्नाटक के छात्र-छात्राएं उत्तराखंड का भ्रमण करेंगे। पिछले वर्ष गवर्नर्स अवॉर्ड के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इंटरमीडिएट के टॉपर्स को लैपटॉप देने की घोषणा की थी, लेकिन एक साल बाद भी इसको लेकर विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। पूछे जाने पर शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने कहा कि सीएम ने कहा है तो लैपटॉप दिए जाएंगे।