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भारत में यहां नहीं मनाई जाती दिवाली, लेकिन ठीक एक माह बाद आयोजित होता है भव्य त्योहार

Sun, 09 Dec 2018 09:40 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, साहिया Updated Sun, 09 Dec 2018 09:40 AM IST
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here villager not celebrate diwali but celebrate budhi diwali after one month
budhi diwali - फोटो : अमर उजाला

जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में 7 अक्टूबर से बूढ़ी दिवाली का आगाज हो गया है। अनूठी लोक संस्कृति के लिए प्रसिद्ध क्षेत्र के लोगों ने पूजा-अर्चना के बाद भीमल और चीड़ की लकड़ियों से बनी मशाल (होला) लेकर एक निश्चित स्थान पर उसे जलाकर सुख और समृद्धि कामना के साथ पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाया। पूरे क्षेत्र में बूढ़ी दिवाली अगले पांच दिनों तक मनाई जाएगी। 

here villager not celebrate diwali but celebrate budhi diwali after one month
budhi diwali

देश में मनाई जाने वाली दिवाली के ठीक एक माह बाद जौनसार बावर के अधिकतर गांवों में आज भी परंपरागत रूप से बूढ़ी दिवाली मनाई जाती है। शुक्रवार को छोटी दिवाली के साथ ही इसकी शुरूआत हो गई। प्रत्येक गांव में इस पर्व को लेकर लोगों के बीच खूब उत्साह नजर आया। लोगों ने अपने ईष्ट देवी-देवताओं के मंदिरों में पूजा-अर्चना की। इसके बाद बूढ़े और बच्चे सभी ने भीमल की लकड़ियों से बने गुच्छे (होला) लेकर नाचते गाते हुए एक निश्चित स्थान पर जाकर उसे जलाकर दिवाली के इस पर्व को मनाया। 
 

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budhi diwali

इसके बाद इस स्थान से स्थानीय लोग नाचते गाते हुए पंचायती आंगन में पहुंचे। जहां पूरे दिन नाच गाने के साथ हारूल, तांदी, रासो, जेंता गीत आदि कई कार्यक्रमों की धूम रही। देर शाम से प्रत्येक गांव में पूरी रात सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिसमें महिलाओं और पुरुषों ने सामूहिक रूप से नृत्य किया। जौनसार बावर क्षेत्र में आज भिरुड़ी पर्व मनाया जाएगा। देव स्थान से गांव के स्याणा द्वारा अखरोट को प्रसाद के रूप में दिया जाएगा। एक ऊंचे स्थान पर चढ़कर इसे लोगों को दिया जाता है। प्रसाद को ग्रहण करने के लिए लोगों में जमकर उत्साह रहता है। जौनसार बावर में बूढ़ी दिवाली के चलते बाजारों में खूब रौनक रही। साहिया, कालसी, चकराता, त्यूनी आदि क्षेत्रों में लोगों ने जमकर खरीदारी की। दुकानदारों ने बाजारों को शानदार तरीके से सजाया हुआ है। दिवाली पर बाहर नौकरी के लिए गए युवा एवं स्थानीय लोगों के परिजन भी गांव में पहुंचने लगे हैं।   
 

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budhi diwali

नागथात में मुंशी गांव, लोहारी, लखस्यार, खाड़ी, लुहन, लोहारना, धिरोई, लखवाड़, सावडा, धनपऊ, जखनोग, भराया सिंगोट, चुन्हो गांव के साथ ही क्षेत्र के कई गांवों में होलियात और शाम को भिमल की लकड़ी की मशाल (स्थानीय भाषा में बिट कहते हैं) जलाकर बूढ़ी दिवाली पर्व मनाया। स्थानीय लोग लकड़ी की मशालों को लेकर पंचायती आंगन में एकत्र हुए और मशालों को एक स्थान पर जलाया। ढोल दमाऊ के साथ स्थानीय लोगों ने लोक नृत्य किया। हर घर में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए गए। लोगों ने एक दूसरे के घर जाकर उन्हें पर्व की बधाई दी।
 

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budhi diwali

जौनसार बावर में मनाई जा रही दिवाली में पहली बार पानुवा गांव में इस बार दिन में काठ के हाथी को नचाया जाएगा। गांव में नौ दिसंबर को भिरुड़ी फैंकी जाएगी और हाथी नचाया जाएगा। उसी दिन सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन भी होगा। बड़ी संख्या में लोगों के साथ कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी इस मौके पर मौजूद रहेंगे। क्षेत्र में भिरुड़ी के अगले दिन की रात को हाथी को नचाने की परंपरा रही है। जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र के 358 राजस्व गांवों एवं 400 से अधिक खेड़ों व मंजरों में पहली बार ऐसा होगा जब रात में हाथी को नचाया जाएगा। बूढ़ी दिवाली के अगले दिन बड़ी दिवाली को भिरूड़ी एवं तीसरे दिन की रात को हाथी नचाने की परंपरा रही है। जो वर्षों से चली आ रही है। दिवाली की इस तैयारी को लेकर पानुवा और आस पास के गांवों के लोगों में खूब उत्साह है।

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