देश की पहली रामायण वाटिका बनकर तैयार हो गई है। देश-विदेश में पाई जाने वाली वनस्पतियों को अनूठे ढंग से संरक्षित करने वाले हल्द्वानी वन अनुसंधान केंद्र ने अब एक और अभिनव प्रयोग करते हुए यह रामायण वाटिका तैयार की है। वाटिका में वाल्मीकि रामायण में वर्णित उत्तराखंड की संजीवनी बूटी से लेकर श्रीलंका में पाई जाने वाली नागकेशर सहित 149 वनस्पतियों को संरक्षित किया गया है। वाल्मीकि रचित रामायण के अरण्य कांड नामक खंड में श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास का विवरण है।
यहां तैयार हुई देश की पहली रामायण वाटिका, तस्वीरों में देखिए क्या है इसकी खासियत...
अयोध्या से श्रीलंका तक की यात्रा में श्रीराम भारतीय उपमहाद्वीप के छह वनों से होकर गुजरे। इसमें चित्रकूट, दंडकारण्य, पंचवटी, किष्किंधा, अशोक वाटिका और द्रोणागिरी वन शामिल हैं। इन वनों को उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन, शुष्क पर्णपाती वन, शुष्क एवं नम पर्णपाती वन, सदाबहार वन और एल्पाईन वन भी कहा जाता है। इन वनों के भी चार गुण हैं जिन्हें शांत, मधुर, रौद्र और वीभत्स वनों की संज्ञा दी गई है। इसी के आधार पर इन वनों में वनस्पतियां भी पाई जाती हैं। वन अनुसंधान केंद्र के अनुसार रामायण काल के इन वनों में वर्तमान में भी अधिक परिवर्तन नहीं हुआ है और यहां हर तरह की बहुउपयोगी और दुर्लभ वनस्पतियां भी हैं। शोध के बाद इन वनस्पतियों को संरक्षित कर रामायण वाटिका तैयार की गई है।
रामायण वाटिका में इस कालखंड की वनस्पतियों के साथ ही रामायण की भी विस्तृत जानकारी मिलेगी। इसके लिए पूरी वाटिका में बोर्ड लगाए हैं, जिनमें चित्र के साथ वनस्पतियों और श्रीराम की यात्रा का वर्णन भी किया गया है। किस वन में श्रीराम किस समय रहे और कौन सी वनस्पतियां उक्त वन में पाई जाती हैं।
वाटिका में चित्रकूट की कंटकारी, असन, श्योनक, ब्राह्मी, दंडकारण्य की अर्जुन, टीक, पाडल, गौब, बाकली, पंचवटी की सेमल, सफेद तिल, तुलसी, किष्किंधा की चंदन रक्त, चंदन ढाक, नक्तमलका, मंदारा, मालती, मल्लिका, कमल, अशोक वाटिका की नागकेशर, चंपा, सप्तर्णी, कोविदारा, द्रोणागिरी की संजीवनी, विश्ल्यकरणी, संधानी, सुवर्णकर्णी, रुद्रवंती और जीवंती समेत अन्य कई प्रकार की वनस्पतियों को मिलाकर कुल 149 वनस्पतियों को संरक्षित किया गया है।
किस स्थान पर हैं रामायण काल के वन
- चित्रकूट का अर्थ है अनेक आश्चर्यों वाली पहाड़ी। यह यूपी के चित्रकूट से मध्य प्रदेश तक स्थित है। वनवास के बाद भगवान राम ने पहला निवास यहीं किया था।
- दंडकारण्य वन, यहां दंडकारण्य नामक दानव निवास करता था जिसका श्रीराम ने संहार किया था। यह छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से तेलंगाना तक फैला है।
- पंचवटी महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोदावरी नदी के किनारे है। यहां से लंका नरेश रावण ने सीता माता का हरण किया था।
- किष्किंधा, यहां श्रीराम की भेंट हनुमान और सुग्रीव से हुई थी। यह कर्नाटक राज्य के बेल्लारी जिले में स्थित है।
- अशोक वाटिका, यह श्रीलंका के नुवारा एलिया शहर स्थित हकगला वनस्पति उद्यान में है। यहां रावण ने सीता माता को बंदी बनाकर रखा था।