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Kanwar yatra: भोले के जयकारों संग पैरों में घुंघरू और हाथ में डमरू लेकर चले कांवड़िये, खास है वजह

संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 18 Jul 2022 08:30 PM IST
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Kanwar Yatra 2022: kanwariya wear Ghungroo and Damru Unique Reason
कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला

कंधे पर कांवड़ रखकर पैरों में घुंघरू बांधे और हाथ में डमरू बजाकर कांवड़िये भोले के जयकारे लगा रहे हैं। इसकी भी खास वजह है। कहा जाता है कि घुंघरू और डमरू  कांवड़ मार्ग पर कांवड़ियों को सांप व बिच्छू से सुरक्षित रखता है। 



कांवड़ यात्रा में हरियाणा, पंजाब, पानीपत, सोनीपत, रोहतक और यूपी से सर्वाधिक कांवड़िए हरिद्वार पहुंच रहे हैं। इनमें कांवड़ियों के परिवार की महिलाएं भी पैदल संग चल रही हैं। दिल्ली की सोनम शर्मा ने बताया कि उन्होंने भोलेनाथ से मन्नत मांगी थी कि बेटे को नौकरी लग जाएगी तो वह परिवार समेत कांवड़ जल लेकर अभिषेक करेंगेे। बेटे की नौकरी लग गई और परिवार के साथ जल लेनी आई हैं। 

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हरियाणा से कांवड़ लेने हरिद्वार आई पूजा राठी, संतोषी देवी ने बताया कि कोरोना से पहले दो साल तक लगातार कांवड़ यात्रा की। दो साल बाद अब फिर से परिवार की खुशहाली और बच्चों के अच्छे भविष्य की भगवान भोले से कामना कर कांवड़ यात्रा शुरू की है।

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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला

अधिकतर कांवड़िए पैरों में घुंघरू बांधकर चल रहे हैं। जबकि काफी संख्या में कांवड़िए डमरू बजाते हुए जा रहे हैं। कई कांवड़िए गले में सीटी लटाकर चल रहे हैं। मानसून सीजन में कांवड़ मार्ग पर सांप और बिच्छू समेत अन्य कीड़ों का डर बना रहता है। 

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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला

हरिद्वार में अधिकतर कांवड़ मार्ग नहर पटरी किनारे बना है, जिसमें घास है। हर कदम पर घुंघरू की आवाज कांवड़ियों की सुरक्षा करती है। डमरू की आवाज भी सांप-बिच्छुओं से उनको सुरक्षित रखती है। बता दें कि 14 जुलाई से शुरू हुई कांवड़ यात्रा में पांच दिन में 23 लाख से अधिक कांवड़िए धर्मनगरी पहुंच चुके हैं। 

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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला

20 जुलाई को पंचक खत्म होते ही शिवभक्तों का भारी सैलाब उमड़ेगा। पंचक में बांस से बनी वस्तुओं को खरीदना निषेध माना जाता है। साथ ही दक्षिण दिशा में यात्रा करने से शिवभक्त परहेज करते हैं। पहले से ही खरीदी गई कांवड़ व सामग्री वाले शिवभक्त ही यात्रा कर रहे हैं।

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कांवड़ यात्रा - फोटो : अमर उजाला

वहीं, कांवड़ यात्रा में कलाकारों को अपनी कला दिखाने के साथ भगवान की भक्ति में भी लीन होने का अवसर मिल रहा है। डीजे के साथ चलने वाली कांवड़ में भगवान का वेश धारण कर नृत्य करने वाले कलाकारों को दो साल बाद रोजगार मिला है।

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