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शुरू हुआ पुरुषोत्तम मास, अगर करेंगे ये काम तो भगवान विष्णु करेंगे भाग्योदय और मिलेगा वरदान

Thu, 24 May 2018 04:30 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Thu, 24 May 2018 04:30 PM IST
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Malmas 2018 do this for fortune and good luck, dehradun news
lord vishnu - फोटो : google

मलमास(अधिक मास या फिर पुरुषोत्तम मास ) शुरू हो गया है। ऐसे में इस एक महीने ये आप ये काम करेंगे तो भगवान विष्णु की आपपर विशेष कृपा रहेगी।


 

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भगवान विष्णु

हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिकमास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। बुधवार से शुरू होकर 13 जून तक रहेंगे। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से दसगुना अधिक फल प्राप्त होता है।
 

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puja aarti

ऐसा माना जाता है कि यह मास हर व्यक्ति विशेष के लिए तन-मन से पवित्र होने का समय होता है। इस दौरान श्रद्धालुजन व्रत, उपवास, ध्यान, योग और भजन- कीर्तन में संलग्न रहते हैं और अपने आपको भगवान के प्रति समर्पित कर देते हैं। इस तरह यह समय सामान्य पुरुष से उत्तम बनने का होता है, मन के मैल धोने का होता है। यही वजह है कि इसे पुरुषोत्तम मास का नाम दिया गया है। अधिकमास में क्या करना उचित और संपूर्ण फलदायी है।

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आरती - फोटो : SELF

आमतौर पर अधिकमास में हिंदू श्रद्धालु व्रत- उपवास, पूजा- पाठ को अपनी जीवनचर्या बनाते हैं। पौराणिक सिद्धांतों के अनुसार इस मास के दौरान यज्ञ- हवन के अलावा श्रीमद् देवी भागवत, श्रीभागवत पुराण, श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण आदि का श्रवण, पठन, मनन विशेष रूप से फलदायी होता है। अधिकमास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे समय में विष्णु मंत्रों का जाप विशेष लाभकारी होता है। ऐसा माना जाता है कि अधिक मास में विष्णु मंत्र का जाप करने वाले साधकों को भगवान विष्णु स्वयं आशीर्वाद देते हैं, उनके पापों का शमन कर मनवांछित फल की प्राप्ति कराते हैं।

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planet

वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय ज्योतिष में सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। ज्योतिषाचार्य पंडित जयकृष्ण सेमवाल के अनुसार अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है।

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