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बड़े पर्दे पर दिखेगी उस वीर सपूत की वीरगाथा, जिसने 300 चीनी सैनिकों को उतारा था मौत के घाट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 06 Jan 2018 10:29 AM IST
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भारत माता के उस वीर सपूत की कहानी अब बड़े पर्दे पर दिखेगी जिसने 1962 के युद्ध में 72 घंटे तक चीनी सैनिकों से लोहा लिया था। साथ ही 300 चीनी सैनिकों को मौत की नींद सुलाया था।
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जी हां, हम बात कर रहे हैं गढ़वाल राइफल के वीर जवान रहे शहीद जसवंत सिंह रावत की। 1962 के भारत-चीन युद्ध में जसवंत सिंह की भूमिका और उनके योगदान को लोगों के दिलों में जिंदा रखने के लिए निर्देशक अविलाष ध्यानी फिल्म बना रहे हैं।
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देहरादून के एफआरआई समेत कई स्थानों पर इसकी शूटिंग की जा रही है। बता दें कि इसमें फिल्म में उनके पति का किरदार बॉलीवुड के जानदार एक्टर वीरेंद्र सक्सेना और माता का किरदान अलका आमिन निभा रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि वीर जसवंत सिंह की आत्मा पोस्ट पर तैनात झपकी ले रहे सैनिकों को थप्पड़ मारकर जगाती है। इतना ही नहीं जसवंत सिंह को लेकर कई तरह की कहानियां कहीं जाती हैं। कहा जाता है कि जिस कमरे में जसवंत रहते थे वहां आज भी उनके जूतों को पॉलिश करके रखा जाता है। उनके कपड़ों को धोकर और प्रेस करके रखा जाता है, बिस्तर भी लगाया जाता है। लोगों का कहना है कि अगली सुबह बिस्तर, जूते और कपड़े ऐसे मिलते हैं जैसे किसी ने उनका उपयोग किया हो।
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बताया जाता है कि 17 नवंबर 1962 को जब चीनी सेना ने यहां हमला किया तो गढ़वाल राइफल्स की चौथी बटालियन के ज्यादातर जवान मारे गए, लेकिन जसवंत सिंह अकेले ही 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित अपनी पोस्ट पर डटे रहे। उन्होंने दो स्थानीय मोनपा लड़कियों सेला और नूरा की मदद से अलग-अलग जगहों पर हथियार रखे और चीनी सेना पर हमला बोल दिया। जिस कारण चीनी सेना को लगा कि वे भारतीय सेना की टुकड़ी से लड़ रहे हैं न कि एक आदमी से।