तीन तलाक के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली विजय नगर नई बस्ती निवासी शायरा बानो ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
जानिए, तीन तलाक पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर क्या बोली एक मुस्लिम महिला
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महिलाओं को कोई अधिकार नहीं है, जबकि संविधान में महिलाओं और पुरुषों को बराबर के अधिकार दिए गए हैं।
1400 साल पहले बनाए गए इस्लामिक कानून में गलती करने वाले हर महिला और पुरुष को सजा दी जाती थी, लेकिन अब गलती करने वाले को कोई सजा नहीं दी जाती है।
पुरुषों को इस्लामिक कानून का डर नहीं है। इसलिए वह कानून की आड़ में मनमानी करते हैं। तीन तलाक बोलकर पुरुष एक झटके में हंसता खेलता परिवार तोड़ देता है। अधिकार विहीन होने की वजह से मुस्लिम महिलाएं कुछ नहीं कर पाती हैं।