उत्तराखंड को अब मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट अवॉर्ड मिलने के बाद प्रदेश में फिल्म शूटिंग की संभावनाएं और भी बढ़ जाएंगी। पीएम नरेंद्र मोदी की बायोपिक से लेकर बाटला हाउस जैसी बड़े बजट की कई फिल्मों की शूटिंग यहां हुई है। लेकिन ये कुछ वजह हैं जो उत्तराखंड को बॉलीवुड का पसंदीदा बना रही हैं। आगे की स्लाइड में जानिए...
उत्तराखंड में जल्द ही फिल्मों को प्रोत्साहन देने के लिए क्षेत्रीय फिल्म प्रमाणीकरण परिषद का गठन किया जाएगा। इसमें उत्तराखंड में निर्मित फिल्मों, खास तौर पर क्षेत्रीय भाषाओं में निर्मित फिल्मों के प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। प्रमाणीकरण के बाद क्षेत्रीय फिल्मों को सीजीएसटी लागू होने की तिथि से जमा किए गए सीजीएसटी का 30 फीसदी प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाएगा। प्रमाणीकरण परिषद का गठन राज्य फिल्म विकास परिषद के स्तर पर किया जाएगा।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
फिल्म निर्माण से संबंधित कैमरा, क्रेन, जनरेटर, रिफलेक्टर आदि एसजीएसटी लागू होने की तिथि से पांच वर्ष तक जमा किए गए एसजीएसटी की प्रतिपूर्ति संबंधित निर्माता कंपनी को की जाएगी। जिन फिल्मों की 75 फीसदी शूटिंग या कुल आउटडोर शूटिंग दिवसों में आधे से अधिक शूटिंग उत्तराखंड में हुई हो, तो उन्हें गुण दोष के आधार पर एसजीएसटी लागू होने की तिथि से जमा किए गए एसजीएसटी के 30 फीसदी की प्रतिपूर्ति की जाएगी।
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फिल्म विकास निधि का उपयोग क्षेत्रीय फिल्मों, हिंदी भाषा और अन्य प्रदेशों की भाषा की फिल्मों को अनुदान उपलब्ध कराने में किया जाएगा। इसके अलावा, इस निधि से फिल्म पुरस्कार, फिल्मों के लिए अवस्थापना सुविधाओं का विकास, फिल्मोत्सव, वजीफा आदि पर भी खर्च किया जाएगा। प्रदेश के 600 मीटर से ऊपर के पर्वतीय क्षेत्रों में बंद पडे़ सिनेमाघरों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार जीएसटी लागू होने की तिथि एक जुलाई 2017 से जमा किए गए एसजीएसटी की 30 फीसदी प्रतिपूर्ति करेगी।
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उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक अनुमति की औपचारिकताओं को सिंगल विंडो सिस्टम पर लाया जाएगा। इसमें ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था भी की जाएगी। राज्य सरकार के विभागों के स्तर पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। वन विभाग के स्तर पर तय शूटिंग शुल्क समाप्त होगा। इन स्थितियों के बीच, यदि शूटिंग स्थल पर पहले से कोई पार्किंग व्यवस्था है, तो उसका शुल्क निर्माता को देना होगा। जहां शूटिंग हो रही हो, वहां पर पांच पुलिसकर्मियों को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ज्यादा संख्या होने पर शुल्क देना होगा।