सोचो, अगर किसी के दोनों हाथ ही न हों तो उसके लिए जीवन जीना कितना मुश्किल है, लेकिन इन मुश्किलों से ऊपर उठकर पुष्पा ने दोनों पैरों से अपनी किस्मत लिखी है।
तस्वीरों में देखिए, दोनों हाथ न होने पर भी कैसे इस बेटी ने पैरों से लिखी किस्मत
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पुष्पा ओएनजीसी में असिस्टेंट पद पर हैं और अपने रोजमर्रा के सभी कामों के अलावा लैपटॉप में पैरों से ही टाइपिंग और फाइलिंग का काम निपटाती हैं।
मूलरूप से टिहरी निवासी स्व. जीएस रावत के पांच बच्चों में सबसे बड़ी बेटी पुष्पा का जन्म हुआ तो उसके दोनों हाथ नहीं थे। बेटी के ऐसे हालात पर माता-पिता को रोना आया, लेकिन उन्होंने पुष्पा को पढ़ाने का फैसला लिया। इस बीच गांव के महात्मा स्व. गैंदा सिंह ने पुष्पा को पैर से लिखने की कला सिखाई।
पुष्पा को उन्होंने मिट्टी में बैठाकर पैर की अंगुली से लिखना सिखाया तो वह एक हफ्ते में ही लिखना सीख गई। कक्षा तीन तक टिहरी में पढ़ाई करने के बाद पिता रायवाला आ गए। यहां स्कूल में पहले तो टीचर ने हाथ न होने की वजह से एडमिशन देने से मना कर दिया, लेकिन जब पुष्पा ने पैरों से लिखकर दिखाया तो उसे दाखिला मिल गया।
इसके बाद पुष्पा ने 10वीं, 12वीं के बाद ग्रेजुएशन और ऋषिकेश पीजी कॉलेज से एमए किया। पुष्पा की मां चैता देवी ने हमेशा उसका साथ दिया। पूर्व राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल ने ओएनजीसी को पुष्पा को नौकरी देने का प्रस्ताव भेजा। ओएनजीसी ने प्रस्ताव मांग लिया।