रामनगर वन प्रभाग में जब वन विभाग की टीम आदमखोर बाघिन को पकड़ने पहुंची तो दूसरे बाघ ने डीएफओ पर हमला कर दिया। रविवार को हेलीकॉप्टर से तलाशी के दौरान पहली बार बाघिन गन्ने के खेत में दिखी। वन विभाग की टीम ने सात घंटे तक बाघिन की तलाशी अभियान चलाया।
बाघिन को पकड़ने आई वन विभाग की टीम तो बचाने के लिए झपटा बाघ
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खेत में बाघिन को देखने के बाद टीम ने जब ट्रैंकुलाइजर गन से दो फायर किए, लेकिन वह बच गई। यह खेत करीब 15 एकड़ में फैला हुआ है। वहीं, रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा पर बाघ ने हमला कर दिया, जिसमें वह बाल-बाल बच गई। हेलीकॉप्टर में बैठे सीएफ डॉ. पराग मधुकर धकाते ने देखा कि बाघिन हेलीकाप्टर की आवाज सुन छलांग लगाकर गन्ने के खेतों से होते हुए झाड़ियों में ओझल हो गई।
इसके बाद दो-तीन बार हेलीकॉप्टर को 15-20 मिनट के लिए हवा में एक निश्चित स्थान पर ही उड़ाकर बाघिन को बाहर निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में इसकी सूचना वायरलेस द्वारा कंट्रोल रूम को दी गई। लोकेशन के आधार पर टीम ने क्षेत्र को चारों ओर से घेर लिया। तीन हाथियों पर सवार शिकारियों ने झाड़ियों में 15 राउंड फायर किए, बावजूद इसके भी बाघिन बाहर नहीं आई। देर रात तक सर्च लाइट लगाकर बाघिन की तलाश की गई, पर सफलता नहीं मिली।
वहीं कैमरा ट्रैप व घटनास्थल का मौका मुआयना करने जा रही रामनगर वन प्रभाग की डीएफओ नेहा वर्मा पर बाघ ने हमला कर दिया। शोर मचाने और फायरिंग करने पर बाघ भाग निकला। इसमें वह बाल बाल बच गईं। रविवार को कोटाबाग निवासी दो युवकों पर बाघ के हमले की सूचना पर डीएफओ नेहा वर्मा घटनास्थल का मौका मुआयना करने और कैमरा ट्रैप लगाने के लिए दोपहर साढे़ तीन बजे स्टाफ के साथ गई थीं।
जैसे ही वह कोटाबाग पाटकोट खड़ंजा मार्ग सोनजाला दाबका बीट जंगल में जा रही थी कि तभी बाघ उन पर झपटा मारने के लिए कूदा। बाघ को देखकर वह नीचे गिर गई और साथ में चल रहे स्टाफ ने शोर मचाकर और हवाई फायर कर बाघ को भगा दिया। घटना के बाद खड़ंजा मार्ग को ग्रामीणों के लिए बंद करवाने के साथ गश्त बढ़ा दी गई है।