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चमोली आपदाः वैज्ञानिकों ने कहा- इस बार हुई केदारनाथ आपदा की पुनरावृत्ति, महज 15 से 20 मिनट में मच गई थी तबाही

Tue, 16 Feb 2021 02:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
विनय बहुगुणा, अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 16 Feb 2021 02:34 PM IST
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uttarakhand chamoli news : chamoli disaster was Recurrence of Kedarnath disaster 2013
चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

बीते सात फरवरी को चमोली जनपद में नंदादेवी बायोस्फीयर क्षेत्र में ऋषिगंगा में आई जलप्रलय जून 2013 में केदारनाथ में आई भयंकर आपदा जैसी ही थी। चोराबाड़ी ताल के टूटने के बाद जो हालात उस समय हुए थे, इस बार उसकी पुनरावृत्ति हुई है। भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि 15 से 20 मिनट में ही उमड़े सैलाब से ही जानमाल का नुकसान हुआ है।

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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय क्षेत्र में हैंगिंग ग्लेशियर की भरमार है। जिनका समय-समय पर अध्ययन किया जाना जरूरी है। रौंठी पर्वत से हुए भूस्खलन व हैंगिंग ग्लेशियर के टूटने से त्रषिगंगा में एक साथ टनों पत्थर, मिट्टी व बर्फ के मिलने से सैलाब उमड़ा, जिसने रैंणी समेत आसपास के क्षेत्र में भारी तबाही मचाई।
 

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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

केदारनाथ आपदा के बाद चोराबाड़ी ग्लेशियर का गहन अध्ययन करने वाले व वाडिया संस्थान से सेवानिवृत्त वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डा. डीपी डोभाल का कहना है कि केदारनाथ आपदा व ऋषिगंगा में आई जलप्रलय एक जैसी हैं। अंतर सिर्फ इतना है कि केदारनाथ आपदा में तबाही बहुत बड़े स्तर पर हुई, क्योंकि लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी समेत अन्य नदियों का वेग पहले से तेज था।
 

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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

ऐसे में मंदाकिनी में भारी मलबा आने से उस वेग को कई गुना अधिक रफ्तार दे दी, जो तबाही का कारण बना। जबकि ऋषिगंगा में भी बहुत अधिक ऊंचाई से चट्टान व हैंगिंग ग्लेशियर टूटकर गिरे, जिसने उसके वेग को रफ्तार दी। मलबे के साथ पानी कई फीट ऊंचाई तक उठा।

 

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चमोली आपदा - फोटो : अमर उजाला

धौलीगंगा को भी मलबे से लील लिया और तेजी से आगे बढ़ता रहा। लेकिन जैसे-जैसे नदी का स्पान बढ़ता रहा, मलबे का वेग कम होने लगा और अलकनंदा में समाते ही मलबे की रफ्तार एक दूरी के बाद सामान्य हो गई। डा. डोभाल के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में हैंगिंग ग्लेशियर की भरमार है। साथ ही यहां कई झील व छोटे-छोटे तालाब सक्रिय है, जिनकी नियमित मॉनीटरिंग की जरूरत है।

 

 

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