इस बार का चुनाव अपने आप में खास है। उत्तराखंड के चुनावी रण में दो-दो बार सत्ता का स्वाद चख चुकी भाजपा और कांग्रेस 3-2 की लीड लेने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है। इस कारण मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जहां कांग्रेस ने उत्तराखंडियत की बात कही तो भाजपा आने वाले दशक को उत्तराखंड का दशक कह रही है।
Uttarakhand Election 2022: उत्तराखंड के रण में पहाड़ी टोपी के बाद अब पिछौड़े की एंट्री, तस्वीरें...
प्रदेश के कुमाऊं संभाग का रंगवाली पिछौड़े का खास महत्व है। विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में महिलाओं द्वारा इसे ओढ़ा जाता है। पिछौड़ा शगुन के साथ-साथ पहाड़ की विशिष्ट परंपराओं की द्योतक भी है। उत्तराखंड के चुनावी समर में शनिवार को प्रियंका गांधी भी लोक संस्कृति के रंग में रंगने के लिए पिछौड़ा ओढ़े नजर आईं। लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा देने वाली प्रियंका खटीमा में पिछौड़ा ओढ़कर महिलाओं को साधने का प्रयास किया। इससे पहले 10 फरवरी को डीडीहाट में हुई जनसभा में भाजपा सांसद स्मृति ईरानी भी पिछौड़ा ओढ़े नजर आईं थीं।
लोगों में पैठ बनाने के लिए लोक संस्कृति से जुड़ी चीजों का प्रयोग हो रहा है। इस पर अन्य समय भी ध्यान देना चाहिए। हालांकि बड़े चेहरे जब ऐसी पहल करते हैं तो इससे कहीं न कहीं संस्कृति का प्रचार होता है। जिस भी पार्टी की सरकार बने उसे संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए।
- मीनाक्षी खाती, ऐपण गर्ल
हम तीन पीढ़ियों से रंगवाली पिछौड़ी बना रहे हैं। मेरी पत्नी प्रभा के साथ कई महिलाएं जुड़ी हुई हैं। चुनाव में लोक संस्कृति से जुड़ाव दिखाने से कुछ नहीं होता है। सरकार को इसके विकास के लिए भी सोचना चाहिए। संस्कृति से जुड़ीं चीजों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक पहल करने की आवश्यकता है।
- सूरज साह, पिछौड़ा निर्माता (अल्मोड़ा)
