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Uttarakhand Election 2022: उत्तराखंड के रण में पहाड़ी टोपी के बाद अब पिछौड़े की एंट्री, तस्वीरें...

दीपक सिंह नेगी, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Feb 2022 10:30 PM IST
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Uttarakhand Election 2022: After the pahadi cap now entry of pahadi pichora in election, photos
- फोटो : एएनआई

इस बार का चुनाव अपने आप में खास है। उत्तराखंड के चुनावी रण में दो-दो बार सत्ता का स्वाद चख चुकी भाजपा और कांग्रेस 3-2 की लीड लेने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है। इस कारण मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जहां कांग्रेस ने उत्तराखंडियत की बात कही तो भाजपा आने वाले दशक को उत्तराखंड का दशक कह रही है।



चुनावी समर में ऐपण, पहाड़ी टोपी, गागरी के बाद पिछौड़े तक की एंट्री हो गई है। लोगों से जुड़ने के लिए अपनाए गए ये हथकंडे कितने कारगर हुए इसका पता तो 10 मार्च को ही लग पाएगा, लेकिन इन सबने यहां की संस्कृति को राष्ट्रीय पटल पर प्रसिद्धि तो दिला ही दी है।

चुनावी समर के शुरूआती दौर में किसी को ये आभास भी नहीं था कि पहाड़ी टोपी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाएगी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ब्रह्मकमल लगी उत्तराखंडी टोपी पहने नजर आए थे। उसके बाद से ही यह टोपी ट्रेंड बन गई। उत्तराखंड में भाजपा का जो भी नेता आया उसके शीश पर पहाड़ी टोपी नजर आई। फिर वह स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, सीएम धामी हों, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा हों या फिर राजनाथ सिंह हर नेता और कार्यकर्ता ने लोगों से खुद को जोड़ने के लिए पहाड़ी टोपी का सहारा लिया।

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Uttarakhand Election 2022: After the pahadi cap now entry of pahadi pichora in election, photos
- फोटो : एएनआई

प्रदेश के कुमाऊं संभाग का रंगवाली पिछौड़े का खास महत्व है। विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में महिलाओं द्वारा इसे ओढ़ा जाता है। पिछौड़ा शगुन के साथ-साथ पहाड़ की विशिष्ट परंपराओं की द्योतक भी है। उत्तराखंड के चुनावी समर में शनिवार को प्रियंका गांधी भी लोक संस्कृति के रंग में रंगने के लिए पिछौड़ा ओढ़े नजर आईं। लड़की हूं, लड़ सकती हूं का नारा देने वाली प्रियंका खटीमा में पिछौड़ा ओढ़कर महिलाओं को साधने का प्रयास किया। इससे पहले 10 फरवरी को डीडीहाट में हुई जनसभा में भाजपा सांसद स्मृति ईरानी भी पिछौड़ा ओढ़े नजर आईं थीं।

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Uttarakhand Election 2022: After the pahadi cap now entry of pahadi pichora in election, photos
- फोटो : अमर उजाला
अल्मोड़ा के तांबे के कलश (गागर) अपनी विशिष्ट बनावट के लिए प्रसिद्ध हैं। 10 फरवरी अल्मोड़ा की जागेश्वर विधानसभा में आयोजित कांग्रेस नेता राहुल गांधी की रैली के दौरान कांग्रेसियों ने उन्हें तांबे का कलश भेंट किया था। खुद को जड़ों से जुड़ा दिखाने के लिए पार्टियों ने ऐपण कला को भी माध्यम बनाया। भाजपा ने अपने दृष्टि पत्र में ऐपण को स्थान दिया है। इसके अलावा चुनावी सभी में कुमाऊंनी और गढ़वाली बोली के जरिये लोगों से सीधा संवाद करने का भी प्रयास किया जा रहा है।
 
Uttarakhand Election 2022: After the pahadi cap now entry of pahadi pichora in election, photos
अल्मोड़ा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

लोगों में पैठ बनाने के लिए लोक संस्कृति से जुड़ी चीजों का प्रयोग हो रहा है। इस पर अन्य समय भी ध्यान देना चाहिए। हालांकि बड़े चेहरे जब ऐसी पहल करते हैं तो इससे कहीं न कहीं संस्कृति का प्रचार होता है। जिस भी पार्टी की सरकार बने उसे संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। 
- मीनाक्षी खाती, ऐपण गर्ल

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- फोटो : अमर उजाला

हम तीन पीढ़ियों से रंगवाली पिछौड़ी बना रहे हैं। मेरी पत्नी प्रभा के साथ कई महिलाएं जुड़ी हुई हैं। चुनाव में लोक संस्कृति से जुड़ाव दिखाने से कुछ नहीं होता है। सरकार को इसके विकास के लिए भी सोचना चाहिए। संस्कृति से जुड़ीं चीजों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक पहल करने की आवश्यकता है। 
- सूरज साह, पिछौड़ा निर्माता (अल्मोड़ा)

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