वार्तुल मित्तल... यह नाम शायद आप पहली बार पढ़ रहे होंगे, लेकिन 32 साल के इस युवा को सुनने के लिए दुनिया की बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियों के सीईओ बेताब हैं। देहरादून में पले-बढ़े वार्तुल रोबोटिक्स प्रॉसेस ऑटोमेशन (आरपीए) के मास्टर हैं।
ऐसा क्या है कि इनके विचारों से मिनटों में लाखों कमा लेती हैं कंपनियां
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जानकारों के अनुसार यह तकनीक जल्द ही बीपीओ सेक्टर की तस्वीर पूरी तरह बदल देगी। सॉफ्टवेयर रोबोटिक्स के स्पेशलिस्ट के रूप में वार्तुल मुख्य वक्ता के तौर पूरी दुनिया में एक जाना-माना चेहरा बन चुके हैं। यही कारण है कि दुनिया भर की आईटी कंपनियां उनके 15 से 20 मिनट के लेक्चर के लिए ढाई लाख रुपये तक दे रही हैं।
यह वार्तुल की काबिलियत का ही परिणाम कि वह महज 32 साल की उम्र में मल्टीनेशनल कंपनी जेएलएल में ग्लोबल डायरेक्टर का पद संभाल रहे हैं। वार्तुल के पिता सर्वेश मित्तल और माता नीना मित्तल दून में जीएमएस रोड पर रहते हैं। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई मार्शल स्कूल से पूरी की।
इसके बाद कोर इंजीनियरिंग कॉलेज रुड़की से मेकैनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक और फिर एक साल कोका कोला कंपनी में नौकरी की। सिंबायोसिस सेंटर ऑफ मैनेजमेंट एंड ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट पुणे से एमबीए करने बाद कोटक महिंद्रा बैंक में जॉब की। इसके बाद आईबीएम गुड़गांव ज्वाइन किया।
यहीं से सॉफ्टवेयर रोबोटिक्स के क्षेत्र में उनका सफर शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वार्तुल ने दुनिया के 28 से ज्यादा शहरों में काम किया है।