पहले पंजाब व गोवा और अब दिल्ली नगर निगम चुनाव में मिली करारी हार ने आम आदमी पार्टी को बुरी तरह तोड़ दिया है। पहले आम आदमी पार्टी अपनी इन हारों का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ रही थी। लेकिन शनिवार (29 अप्रैल) को सुबह ही दिल्ली के मुख्यमंत्री व आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर अपनी गलती मानी।
EVM पर आरोप लगाते केजरीवाल ने क्यों स्वीकारी गलती, जानिए 5 कारण
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1- MCD चुनाव की करारी हार- माना जा रहा है कि एमसीडी चुनाव में मिली करारी हार भी केजरीवाल के कबूलनामे की बड़ी वजह है। इस हार ने आम आदमी पार्टी को अपनी नीतियों पर दोबारा सोचने को मजबूर कर दिया है कि जिस जनता ने उन्हें दो साल पहले 70 में से 67 सीटें जितवाई थीं, उसी जनता ने एमसीडी चुनाव में पार्टी को क्यों बुरी तरह नकार दिया।
2- बड़े नेताओं का इस्तीफा और उनका पार्टी लाइन के खिलाफ जाना- आम आदमी पार्टी ने एमसीडी चुनाव के एक दिन पहले ही यह तय कर लिया था कि अगर वो जीते तो जनता को श्रेय देंगे और हारे तो ईवीएम को। लेकिन 26 अप्रैल (एमसीडी चुनाव परिणाम के दिन) को जैसे-जैसे नतीजे आते गए वैसे-वैसे पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी लाइन से अलग जाकर सिर्फ ईवीएम ही नहीं अपने काम को भी पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार बताया। कुमार विश्वास तो पहले ही पार्टी के काम व नीतियों पर सवाल उठा चुके थे, परिणाम वाले दिन पंजाब से आप सांसद भगवंत मान ने सबसे पहले पार्टी को आईना दिखाया। उसके बाद तो इस्तीफों की लड़ी लग गई। और ये अरविंद केजरीवाल के रवैये में आए बदलाव का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।
3- यूपी चुनाव के बाद पीएम मोदी का बढ़ा हुआ कद- मालूम हो कि आम आदमी पार्टी इन दिनों अपने विधायकों, पार्षदों और कार्यकर्ताओं के साथ जो बैठकें कर रही है उसे यह बात निकलकर सामने आई है कि यूपी चुनाव के बाद पीएम मोदी का कद काफी बढ़ गया है। पार्टी के ही एक नेता ने एक मीटिंग के बाद बताया था कि पीएम मोदी का कद इतना बढ़ गया है कि किसी के लिए भी उन्हें हराना काफी मुश्किल हो गया है। यहां तक कि केजरीवाल के लिए भी।
4- दो दिनों से चल रही विधायकों और कार्यकर्ताओं से केजरीवाल की बैठक- बता दें कि एमसीडी चुनाव परिणाम आने के अगले दिन से ही केजरीवाल पार्टी विधायकों और कार्यकर्ताओं से बैठकें कर रहे हैं। इसमें वो उनसे जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर जमीनी स्तर पर हालात क्या हैं। माना जा रहा है कि इन बैठकों से केजरीवाल ने सबक लिया है और उसी के चलते आज उन्होंने अपनी गलती स्वीकारी है। इन बैठकों में ये बात सामने आ रही है कि सस्ती बिजली और मुफ्त पानी भी उनको इसलिए नहीं जिता पाया है क्योंकि इन कामों पर पार्टी की नकारात्मक छवि भारी पड़ गई। वरना कोई कारण नहीं है कि जिस बीजेपी ने 10 साल में एमसीडी में कोई उपलब्धि नहीं हासिल की वह प्रचंड बहुमत से जीत जाए।