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UP: 'मैं डांटती तो छिप जाता, फिर आकर गले लग जाता', हरीश राणा की बचपन की यादें साझा करते हुए छलका मां का दर्द

अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद Published by: Sharukh Khan Updated Sun, 15 Mar 2026 04:11 PM IST
सार

हरीश राणा की बचपन की यादें साझा करते हुए मां निर्मला देवी का दर्द छलक उठा। निर्मला देवी ने कहा कि पिछले 13 साल से बेटे की पीड़ा देख रही हूं। अब सहा नहीं जाता है। इस दौरान कई बार उनकी आवाज भर्रा गई और आंखों से आंसू छलक पड़े।

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Harish Rana Mother Shares Emotional Childhood Memories He Would Hide When I Scolded Him
Harish Rana Mother - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
''हरीश बचपन में बहुत शरारती था। मैं उसे डांटती तो किसी कोने में जाकर छिप जाता। थोड़ी देर बाद फिर आकर चुपचाप मेरे गले लग जाता। मेरे चेहरे को सहलाने लगता। पहला बच्चा था, इसलिए घर में सबसे ज्यादा लाड़-प्यार उसी को मिला।'' यह कहना है उनकी मां निर्मला देवी का।


हरीश राणा को दिल्ली एम्स शिफ्ट किए जाने के बाद परिवार भी उनके साथ चला गया है। इससे पहले अमर उजाला से बातचीत में निर्मला देवी ने बेटे की बचपन की यादें साझा कीं। इस दौरान कई बार उनकी आवाज भर्रा गई और आंखों से आंसू छलक पड़े।
 
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Harish Rana Mother Shares Emotional Childhood Memories He Would Hide When I Scolded Him
बेटे हरीश के साथ माता-पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
निर्मला देवी के अनुसार, हरीश का जन्म 12 सितंबर 1993 को दिल्ली में हुआ था। उस दिन पूरा परिवार खुशी से झूम उठा था। घर में गीत गाए गए थे। उनके अनुसार हरीश कभी किसी चीज के लिए जिद नहीं करता था। जो भी समझाया जाता, उसे प्यार से मान लेता था।
 
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Harish Rana Mother Shares Emotional Childhood Memories He Would Hide When I Scolded Him
हरीश के पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पढ़ाई में शुरू से था होनहार
निर्मला देवी ने बताया कि हरीश की 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली में हुई। इसके बाद वह बीटेक करने के लिए चंडीगढ़ चला गया। उन्होंने कहा कि मेरा बेटा पढ़ाई में शुरू से बहुत होनहार था। पंजाब यूनिवर्सिटी में भी टॉपर रहा।
 
Harish Rana Mother Shares Emotional Childhood Memories He Would Hide When I Scolded Him
बेटे हरीश के साथ मां - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
21 अगस्त 2013 को हमारी दुनिया उजड़ गई
बेटे की बीमारी का जिक्र आते ही उनकी आंखें भर आईं। रुंधे स्वर में कहने लगीं कि 21 अगस्त 2013 को हमारी दुनिया उजड़ गई। उस दिन उसके गिरने की खबर मिली। कुछ दिन बाद डॉक्टरों ने बताया कि इस बीमारी में ठीक होने की संभावना बहुत कम है। इसके बावजूद परिवार ने उम्मीद नहीं छोड़ी। 13 साल तक हरसंभव इलाज कराया। कोई व्रत या पूजा-पाठ नहीं छोड़ा। कई बार भगवान से भी विश्वास डगमगा गया। शायद नियति को यही मंजूर था।
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Harish Rana Mother Shares Emotional Childhood Memories He Would Hide When I Scolded Him
बेटे हरीश के साथ पिता - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिविल इंजीनियर बनना चाहता था
बेटे की इच्छाओं को याद करते हुए निर्मला देवी ने कहा कि हरीश बहुत हंसमुख स्वभाव का था। हमेशा खुद भी हंसता था और दूसरों को भी हंसाता रहता था। वह सिविल इंजीनियर बनना चाहता था। उन्होंने बताया कि हादसे के अगले महीने ही उसका जन्मदिन था। वह घर आने वाला था, लेकिन ऐसी हालत में लौटा कि फिर कभी जा नहीं सका।
 
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