साल 2012 तक एपेक्स और सियान टावर महज 13 मंजिल तक बन पाए थे, लेकिन जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो बिल्डर ने परियोजना के काम को ऐसी रफ्तार दी कि डेढ़ साल में ही 19 मंजिल का अतिरिक्त निर्माण कर डाला। 2014 में हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद काम बंद हो गया। बिल्डर की चालाकी काम नहीं आई। टावरों की ऊंचाई इसलिए बढ़ाई, ताकि कोर्ट ऐसा कोई फैसला न ले सके। इससे किसी तरह का नुकसान हो, लेकिन हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि नागरिकों और पर्यावरण की सुरक्षा को नजरंदाज नहीं किया जा सकता। वहीं, अगर ये टावर दूसरे संशोधित प्लान के अनुसार 24 मंजिल तक ही बनाए जाते तो शायद आज इनके तोड़ने की नौबत न आती। यहां आगे जानिए कब-कैसे और क्या-क्या हुआ...
Noida Twin Towers Demolition: ट्विन टावर में डेढ़ साल में 19 मंजिल बढ़ीं, यहां जानें कब-कैसे और क्या-क्या हुआ
टावरों को तोड़ने की तारीख 22 मई 2022 तय की गई थी, लेकिन तैयारी पूरी न होने का हवाला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को मोहलत दी। इसके बाद 22 से 28 अगस्त के बीच टावरों को तोड़ने का समय दिया गया। हालांकि इस
बदलनी पड़ी टावर तोड़ने की तारीख
टावरों को तोड़ने की तारीख 22 मई 2022 तय की गई थी, लेकिन तैयारी पूरी न होने का हवाला दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित एजेंसियों को मोहलत दी। इसके बाद 22 से 28 अगस्त के बीच टावरों को तोड़ने का समय दिया गया। हालांकि, इस बार भी टावरों को तोड़े जाने पर संशय था, लेकिन संबंधित एजेंसी ने प्राधिकरण को पत्र जारी कर ट्विन टावर के कमजोर होने से खतरे की आशंका जाहिर करते हुए इसे 28 तारीख तक तोड़े जाने का सुझाव दिया।
प्राधिकरण से मायूसी मिलने के बाद 2012 में एमराल्ड परियोजना की आरडब्ल्यूए ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस जांच के आदेश दिए और जांच में निवासियों की दलीलें सही ठहराई गईं। 2014 में हाईकोर्ट ने ट्विन टावर को तोड़ने का आदेश दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुपरटेक सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को आदेश जारी कर ट्विन टावर को तीन महीने के अंदर गिराने के आदेश दिए।
12 एकड़ में जितना निर्माण, उतना 1.6 एकड़ में करने की थी तैयारी
एमराल्ड कोर्ट परियोजना के लिए सुपरटेक को 13.5 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। परियोजना का 90 फीसदी यानी करीब 12 एकड़ हिस्से पर 2009 में ही निर्माण पूरा कर लिया गया था। घर खरीदार जब प्रोजेक्ट में शिफ्ट होने लगे तो 10 फीसदी हिस्से को ग्रीन जोन दिखाया गया। 2011 आते-आते दो नए टावरों के बनने की खबरें आने लगीं। लोगों को अंदेशा नहीं था कि नए टावर दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ऊंचे होंगे। 12 एकड़ में जितना निर्माण किया गया, उतना एफएआर का खेल खेलकर दो गगनचुंबी इमारों के जरिये 1.6 एकड़ में ही करने का काम तेजी से जारी था। अंदाजा लगाया जा सकता है कि 12 एकड़ में 900 परिवार रह रहे हैं, इतने ही परिवार 1.6 एकड़ में बसाने की तैयारी थी। कोर्ट ने आरडब्ल्यूए की इन दलीलों को समझा और टावरों को ध्वस्त करने का फैसला बरकरार रखा।
कब क्या हुआ
- 23 नवंबर 2004 : प्राधिकरण ने सेक्टर-93ए स्थित ग्रुप हाउसिंग के लिए प्लॉट नंबर-4 सुपरटेक को आवंटित किया।
- 29 दिसंबर 2006 : प्राधिकरण ने बिल्डिंग प्लान में संशोधन करते हुए दो मंजिल अतिरिक्त बनाने की अनुमति दी।
- 26 नवंबर 2009 : प्राधिकरण ने फिर से परियोजना में बदलाव करते हुए 15 की जगह 17 टावर बनाने का नक्शा पास कर दिया।
- 2 मार्च 2012 : प्राधिकरण ने टावर नंबर 16 और 17 के लिए एफएआर और बढ़ा दिया। इससे दोनों टावर को 40 मंजिल तक करने की मंजूरी मिली।
- 24 अप्रैल 2012 : एमराल्ड कोर्ट आरडब्ल्यूए ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की पहली सुनवाई हुई।
- अप्रैल 2014 : हाईकोर्ट ने ट्विन टावरों को अवैध करार देते हुए ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए।
- 05 मई 2014 : सुप्रीम कोर्ट में ट्विन टावर मामले की पहली सुनवाई हुई।
- 31 अगस्त 2021 : सुप्रीम कोर्ट ने ट्विन टावरों को ध्वस्त करने के हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रख फैसला सुनाया।