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युवराज की मौत: 'पूछे एक जैसे सवाल..', बयानों का अंतर अफसरों पर पड़ सकता है भारी; कार्रवाई के दायरे में कौन-कौन
अमर उजाला नेटवर्क, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 26 Jan 2026 03:13 PM IST
सार
ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की मौत मामले में चश्मदीदों और जिम्मेदारों के बयानों का अंतर अफसरों पर भारी पड़ सकता है। एसआईटी की टीम ने दो दिन में 150 लोगों से पूछताछ की गई है। अधिकारी और कर्मचारी के बयान भी अलग हैं।
शासन की ओर से गठित एसआईटी की टीम ने दो दिन में तकरीबन 150 लोगों ने बयान दर्ज किए। इनमें घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीद, पुलिस, प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। इस दौरान अधिकारियों, कर्मचारियों और चश्मदीदों के बयान में काफी अंतर दिखा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम पर हुई कार्रवाई के बाद अब अफसरों और कर्मचारियों की बारी है।
सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में लगातार चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। युवराज की जान न बचा पाने से व्यवस्था की खूब फजीहत हुई थी। इसके बाद युवराज की छवि धूमिल करने की कोशिश ने रही सही कसर पूरी कर दी।
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युवराज को श्रद्धांजलि देते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद एसआईटी ने जब प्रशासन, पुलिस और प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए तो सब साफ हो गया। तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर विभागीय अफसरों की लापरवाही स्पष्ट हो गई।
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युवराज को श्रद्धांजलि देते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बयानों में अंतर होने से अब लापरवाह अफसर और कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में दिखने लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी दो से तीन दिनों में पूरी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इसके बाद कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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दिवंगत युवराज मेहता के परिजनों से मिलते दादरी विधायक
- फोटो : X @tejpalnagarMLA
दो बार हुए बयान, दोनों अलग
एसआईटी ने शुक्रवार को 125 लोगों के बयान दर्ज किए। इसमें जिला प्रशासन, प्राधिकरण और पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी के साथ चश्मदीद शामिल थे। सभी के बयान में काफी अंतर दिखने पर दोबारा बयान दर्ज कराए गए।
कौन-कौन कार्रवाई के दायरे में
पानी में डूबी कार की छत पर बैठे युवराज दो घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे। सामने मौजूद पुलिस बल, अग्निशमन दल, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवान तमाशबीन बने युवराज को पानी में डूबते हुए देखते रहे। शुरुआती चरण में जरूरी उपकरण पास न होने का हवाला भी दिया गया, तैराकी न जानने, रस्सी न होने जैसे तर्क भी सामने आए थे।
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