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Padma Shri Awards 2026: जिन्होंने ढूंढे राम मंदिर के साक्ष्य, भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री के लिए चुना

ऋषभ कौशल, अमर उजाला, नोएडा Published by: विजय पुंडीर Updated Mon, 26 Jan 2026 10:15 AM IST
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सार

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. बुद्धरश्मि मणि ने अपने करियर में देश के 20 से अधिक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर उत्खनन का निर्देशन किया। दिल्ली के लाल कोट और सलीमगढ़, हरियाणा के कुणाल, उत्तर प्रदेश के संकिसा और सिसवनिया तथा जम्मू-कश्मीर के अंबारन जैसे स्थलों पर किए गए उत्खनन उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं।

Senior archaeologist Dr. Buddharashmi Mani will receive Padmashree award
अमर उजाला से बातचीत में राम मंदिर के साक्ष्य ढूंढने के दौरान आई चुनौतियों के बारे में बताते डॉ. मणि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अयोध्या के बहुचर्चित राम मंदिर मामले में ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत कर न्यायिक प्रक्रिया को निर्णायक दिशा देने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक व वरिष्ठ पुरातत्वविद् डॉ. बुद्धरश्मि मणि को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान के लिए चयनित किया है। यह सम्मान उन्हें पुरातत्व, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में दशकों से किए गए उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जा रहा है। वर्तमान में डॉ. मणि सेक्टर-62 स्थित भारतीय विरासत संस्थान (आईआईएच), नोएडा में पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे इसी संस्थान के कुलपति भी रह चुके हैं।

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अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान डॉ. बुद्धरश्मि मणि ने बताया कि उनका जन्म वर्ष 1955 में हुआ। वे देश के प्रतिष्ठित पुरातत्वविद्, मुद्राशास्त्री और कला समीक्षक माने जाते हैं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में अपर महानिदेशक के रूप में अप्रैल 2015 तक सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली के महानिदेशक और भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा के कुलपति के रूप में भी महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उनके नेतृत्व में भारतीय विरासत संस्थान की स्थापना को देश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रशिक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता है। उनका शैक्षणिक जीवन भी अत्यंत उत्कृष्ट रहा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर तक की शिक्षा उन्होंने प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान के साथ प्राप्त की। वर्ष 1976 में उन्हें अल्टेकर स्वर्ण पदक और बीएचयू स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। वर्ष 1980 में उन्होंने “कुषाण युग में जीवन” विषय पर पीएचडी उपाधि प्राप्त की।

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सिर्फ अयोध्या नहीं, कश्मीर में भी ढूंढे प्राचीन साक्ष्य 
डॉ. मणि ने अपने करियर में देश के 20 से अधिक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों पर उत्खनन का निर्देशन किया। दिल्ली के लाल कोट और सलीमगढ़, हरियाणा के कुणाल, उत्तर प्रदेश के संकिसा और सिसवनिया तथा जम्मू-कश्मीर के अंबारन जैसे स्थलों पर किए गए उत्खनन उनके प्रमुख कार्यों में शामिल हैं। वर्ष 2003 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश पर उनके निर्देशन में अयोध्या के विवादित स्थल पर उत्खनन कराया गया। इस उत्खनन में प्राप्त उत्तर भारतीय नागर शैली के अवशेष, स्तंभों के अधिष्ठान और अभिलेख न्यायिक प्रक्रिया में निर्णायक साबित हुए, जिनके आधार पर आज भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हो सका।

अब तक मिले सम्मान 

  • लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड कनफेडरेशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (2017) 
  • शारदा शताही समान ( 2023) 
  • जय श्री सत्य बालाजी संकट मोचन अभिनन्दन, गोरखपुर, ( 2023) 
  • मंजू शुरू सम्मान, भारतीय बौद्ध अध्ययन समाज द्वारा दिया गया ( 2023)
 

पद्मश्री की घोषणा के बाद अमर उजाला से क्या बोले डॉ. मणि
'मुझे इस बात की बेहद खुशी है कि सरकार ने मेरे कार्यों को पहचान दी और मुझे इस काबिल समझा। मै सरकार का आभारी हूं। भारतीय इतिहास बहुत प्राचीन, एक अथाह सागर जैसा है, अभी बहुत कुछ खोजना और जानना बाकी है।'

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