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Noida News: जेवर के प्रवीण की ऊंची छलांग, मिला पदमश्री सम्मान

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jan 2026 02:33 AM IST
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Praveen of Jewar made a big jump and received the Padma Shri award.
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पैरालिंपिक में दो पदक जीतने वाले हाईजंपर के गांव गोविंदगढ़ में जश्न का माहौल
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पीयूष गौतम
यमुना सिटी/जेवर। कड़ी मेहनत और जुनून के दम पर पैरालिंपिक में दो पदक जीतने वाले जेवर के गोविंदगढ़ निवासी पैरा हाईजंपर प्रवीण कुमार को पदमश्री से सम्मानित किया जाएगा। यह खबर गांव पहुंचते ही पिता अमरपाल सिंह, मां निर्दोष, भाई सचिन समेत पूरे परिवार ने जश्न मनाया। परिजन और ग्रामीण एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। प्रवीण के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था।
पिता अमरपाल सिंह ने बताया कि बचपन में प्रवीण गांव की वॉलिबॉल टीम में थे। वह ऊंची छलांग लगाकर तेज शॉट लगाते थे। प्रवीण की मां निर्दोष देवी ने बताया कि सातवीं कक्षा के बाद प्रवीण उछलकर घर की छत को भी छू लेता था। बचपन में ज्यादा कूद फांद करने पर वह खूब डांटती थीं। आज ऊंची कूद ने ही प्रवीण को पहचान दिलाई है। प्रवीण ने बताया कि गांव में न तो खेल की सुविधा थी और न मैदान। कक्षा 9 के बाद स्कूल की ओर से ऊंची कूद और लंबी कूद स्पर्धा में हिस्सा लेने लगा था। तब वह यमुना किनारे रेत में अभ्यास करते थे। ऐसे में कई बार चोट भी लग जाती थी। गाजियाबाद के एक खेल आयोजन में प्रवीण की मुलाकात कोच डॉ सत्यपाल से हुई थी। उनके कहने पर प्रवीण ने करीब 1.8 मीटर छलांग लगाई थी। इसे देखकर डॉ. सत्यपाल ने उसे प्रशिक्षण देने का फैसला कर लिया था।
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दो वर्षों से कर रहे थे पदम पुरस्कार का इंतजार

प्रवीण को पदमश्री मिलने की सूचना दिल्ली में मिली। वह दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में वर्ष 2018 से ही अभ्यास करते हैं। वह शनिवार को ही गांव आए थे और रविवार सुबह दिल्ली के लिए निकलें। प्रवीण दो वर्ष से इस पदम सम्मान का इंतजार कर रहे थे, आज इसकी सूचना मिलते ही उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।


दिव्यांग होने पर मिले ताने लेकिन अपनी प्रतिभा के बल छू लिया आसमान
प्रवीण को कई स्थानों पर दिव्यांग होने के ताने मिले लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर ऐसा जवाब दिया कि हर कोई दंग रह गया। प्रवीण कुमार बताते हैं कि जब वर्ष 2018 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लेने पहुंचे तो उन्हें टी-42 वर्ग के बजाए उन्हें टी-44 वर्ग में डाल दिया गया। यह सबसे कठिनतम कैटिगरी होती है। शुरुआत में उनको इसका धक्का लगा लेकिन उन्हाेंने हार नहीं मानी और अपनी महनत से इस प्रतियोगिता में भी जीत हासिल की। इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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उपलब्धि
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1. पेरिस 2024 पैरालंपिक खेलों में एशियन रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। 21 वर्ष की आयु में दो पैरालंपिक पदक (1 स्वर्ण और 1 रजत) जीतने वाला सबसे कम उम्र का भारतीय पैरा-एथलीट बने।

2 टोक्यो 2020 पैरालंपिक खेलों में एशियन रिकॉर्ड के साथ रजत पदक जीता तथा 18 वर्ष की आयु में पैरालंपिक में पदक जीतने वाला सबसे कम उम्र का भारतीय पैरा-एथलीट बना।

3. 22 से 28 अक्टूबर 2023 के दौरान हांगझोउ, चीन में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2022 में एशियन पैरा गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता।

4. विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, पेरिस 2023 में कांस्य पदक प्राप्त किया।

5. विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप, नई दिल्ली 2025 में कांस्य पदक प्राप्त किया।

6. एबल-बॉडीड नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले पैरा-एथलीट बने।
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