ग्रेटर नोएडा में वसूली के रुपयों को लेकर हुए विवाद के बाद डीजीपी तक पहुंची सूची सही है या साजिश। इससे पर्दा पुलिस की जांच के बाद उठेगा, लेकिन इसमें कोई संशय नहीं है कि अगर किसी थाना या चौकी क्षेत्र में अवैध कारोबार व गोरखधंधा चल रहा है तो ये पुलिस की लापरवाही या फिर वसूलीबाज पुलिसकर्मियों की शह का नतीजा है।
UP: काली कमाई से भरती है पुलिसवालों की जेब, अधिकतर थानों में ऐसे चलता है कोई न कोई अवैध कारोबार
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देहात क्षेत्र के अधिकांश थाना क्षेत्र किसी न किसी गोरखधंधे को लेकर अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। जिले में ईमानदार छवि वाले कुछ अफसरों की तैनाती के बावजूद इन गोरखधंधों पर पूरी तरह लगाम न लग पाना कहीं न कहीं पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता है। गौतमबुद्ध नगर ठगी व गोरखधंधों का गढ़ रहा है। यहां सरिया, अवैध खनन, हरियाणा की शराब तस्करी लंबे समय से अवैध कारोबार होते रहे हैं।
हाल के कुछ वर्षो में जिले के हाइटेक होने के साथ यहां अवैध कामों की संख्या व तरीकों में भी बढ़ोतरी हुई है। नौकरी, लोन, प्लाट व फ्लैट दिलाने के नाम पर ठगी की दुकानों की यहां भरमार हैं। यहां स्पा की आड़ में देह व्यापार करने की भी जानकारी मिलने लगी हैं। बड़ी संख्या में जिले में कॉल सेंटर और स्पा आदि खुल चुके हैं। इनमें कितने नियमों का पालन कर रहे हैं और कितने अनैतिक हैं, इसकी जानकारी न तो पुलिस के पास मिलेगी और न ही प्रशासन के पास। एजुकेशन हब होने के कारण यहां नशे का गोरखधंधा भी खूब फल-फूल रहा है।
शिक्षण संस्थानों के आसपास नशे के सौदागर गांजा आदि की बिक्री करते हैं। देहात क्षेत्र की बात करें तो वहां मिलावटखोरी और तस्करी की शराब बिक्री का धंधा पुलिस-प्रशासन के तमाम दावे और कार्रवाई के बावजूद बंद होने का नाम नहीं लेता।
पहले भी सामने आई है थाने के ठेकेदारों की लड़ाई करीब डेढ़ साल पिछली सरकार के कार्यकाल में पहले भी एक पुलिसकर्मी का वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वह खुलकर थानों पर तैनात पुलिसकर्मियों के वसूली करने की जानकारी दे रहा था। वह यह भी बता रहा था कि कितने रुपये कहां से आते हैं और कहां जाते हैं और किस पर ठेकेदारी का जिम्मा है। सत्ता परिवर्तन के बाद अधिकांश ऐसे संदिग्ध पुलिसकर्मियों के तबादले किए गए थे, लेकिन यह काम पूरी तरह नहीं हो पाया और कुछ नए पुलिसकर्मी भी इसमें शामिल हो गए।