स्कूल-कॉलेजों में अपना असाइनमेंट या प्रोजेक्ट खुद से न बनाने का काम नया नहीं है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में स्टूडेंट्स के बीच यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। आजकल तो शुरुआती कक्षाओं से ही बच्चे अपना असाइनमेंट या होमवर्क दूसरों से बनवाने लगे हैं। यह ट्रेंड इसलिए भी बढ़ रहा है, क्योंकि अक्सर शिक्षक ये चोरी पकड़ नहीं पाते। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब अगर किसी ने अपना असाइनमेंट दूसरे से बनवाया, तो उसकी ये चोरी पकड़ी जाएगी।
अब स्कूल-कॉलेज में दूसरे से असाइनमेंट बनवाया, तो पकड़ी जाएगी चोरी
दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम विकसित की है, जो इस बात का पता लगा सकता है कि असाइनमेंस स्टूडेंट ने खुद लिखा है या किसी और से लिखवाया है। डेनमार्क में कोपनहेगन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने असाइनमेंट्स में चोरी रोकने के लिए यह टूल विकसित किया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, वे कुछ वर्षों से इसपर काम कर रहे थे। 1.30 लाख डैनिश असाइनमेंट्स पर स्टडी की गई। अभी तक विकसित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल से 90 फीसदी तक एक्यूरेसी मिल सकती है।
कैसे चोरी पकड़ता है यह टूल
कोपनहेगन यूनिवर्सिटी के पीएचडी स्टूडेंट स्टीफन लॉरेंजे ने कहा, हमने जो टूल बनाया है वह लेखन शैली की परख करता है। एक स्टूडेंट ने अभी जो असाइनमेंट जमा किया है और पहले जो उसने खुद लिखा है, इन दोनों में अंतर की जांच करता है।
इसके अलावा उस स्टूडेंट के दोनों असाइनमेंट्स में शब्दों और वाक्यों की लंबाई, प्रारूप, शब्दों का इस्तेमाल कैसे किया गया है, इन सभी बातों की जांच करता है। पहले के हर असाइनमेंट को यह टूल लेखन शैली की समानता के आधार पर एक स्कोर देता है। फाइनल स्कोर में यह प्रतिशत दर्शाया जाता है कि नया असाइनमेंट स्टूडेंट की लेखन शैली से कितना मेल खाता है।