दुनियाभर के पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करने वाले देश के तटीय राज्य गोवा के लिए दो तारीखों का विशेष महत्व है। ये तारीखें हैं पहली 19 दिसंबर और दूसरी 30 मई। ये दोनों ही कोई सामान्य तारीखें नहीं हैं। ये तारीखें गोवा की मुक्ति से लेकर उसकी उन्नति और प्रगति की द्योतक हैं। 19 दिसंबर, 2021 को गोवा की मुक्ति को 60 साल पूरे हो रहे हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोवा मुक्ति दिवस के कार्यक्रमों में शिरकत कर रहे हैं।
इतिहास के पन्नों से : 19 दिसंबर को आजाद हो गया था गोवा, फिर भी 30 मई बना स्थापना दिवस, जानिए राज
Goa Liberation Day: 19 दिसंबर, 1961 की तारीख हिंदुस्तान की आजादी के समय तक पुर्तगालियों के कब्जे में रहे गोवा की आजादी का दास्तां को बयां करती है। जबकि, दूसरी तारीख 30 मई, 1987 गोवा के भारतीय संघ का एक पूर्ण राज्य बनने की गवाह है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोवा की आजादी समारोह को संबोधित करेंगे।
क्षेत्रफल के हिसाब से गोवा भारत का सबसे छोटा और जनसंख्या के हिसाब से चौथा सबसे छोटा राज्य है। पूरी दुनिया में गोवा अपने सुंदर समुद्री तट और मशहूर स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। 1961 के पहले तक गोवा पुर्तगाल का एक उपनिवेश था। लगभग 450 सालों तक पुर्तगालियों ने गोवा पर राज किया। भारत की आजादी के बाद जब पुर्तगालियों को गोवा को भारत को सौंपने को कहा गया था, तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया था। लेकिन भारत ने ऑपरेशन विजय के माध्यम से 19 दिसंबर, 1961 को गोवा को मुक्त करा लिया गया और इसे दमन तथा दीव के साथ मिलाकर केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
भौगोलिक स्थिति एवं पौराणिक इतिहास
गोवा भारतीय प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसके उत्तर में तेरेखोल नदी बहती है, जो गोवा को महाराष्ट्र से अलग करती है। इसके दक्षिण में कर्नाटक का उत्तर कन्नड़ जिला और पूर्व में पश्चिमी घाट तथा पश्चिम में अरब सागर है। पणजी, मडगांव, वास्को, मापुसा, तथा पोंडा राज्य के प्रमुख शहर हैं। राज्य में 1,424 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में घने वन हैं। गोवा का उल्लेख भारतीय संस्कृति के कई पौराणिक ग्रंथों में मिलता है। महाभारत के समय दक्षिण कोंकण क्षेत्र में गोवा को गोपराष्ट्र अर्थात गाय चराने वालों के देश के रूप में वर्णित है। कई अन्य संस्कृत श्लोक और धार्मिक ग्रंथों में इसे गोमांचल, गोपकपट्टम, गोपकेपुरी, गोवापुरी, गोवाराष्ट्र और गोमांतक आदि कई नामों से उल्लेखित किया गया है।
गोवा का राजनीतिक इतिहास
गोवा के प्रारंभिक राजनीतिक इतिहास को देखा जाए तो यह सातवाहन साम्राज्य का अंग रहा है। उसके बाद कदंब, मलखेड़ के राष्ट्रकूटों, चालुक्य तथा सिलाहार राजवंशों का राज रहा। 14वीं शताब्दी के अंत में यादवों का साम्राज्य समाप्त हुआ और दिल्ली के खिलजी वंश ने यहां शासन किया। नो इंडिया डॉट ओआरजी के मुताबिक, भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज करते हुए 1498 में वास्कोडिगामा और उसके बाद कई पुर्तगाली यात्री भारत पहुंचे थे। 1510 में अल्फांसो द अलबुकर्क ने विजयनगर के सम्राट की मदद से गोवा पर आक्रमण करके इसे कब्जा लिया।
गोवा की मुक्ति और स्थापना दिवस
15 अगस्त, 1948 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद भी गोवा पुर्तगालियों के कब्जे में रहा। किंतु, पुर्तगाली शासक गोवा वासियों की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पा रहे थे। भारत सरकार के कई बार आग्रह के बावजूद जब पुर्तगाली नहीं माने तो फिर ऑपरेशन विजय की शुरुआत की गई। अंतत: 19 दिसंबर, 1961 को गोवा को मुक्त करा लिया गया और इसे दमण तथा दीव के साथ मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। हालांकि, बाद में 30 मई, 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया और दमण तथा दीव को अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया। तब से ही 30 मई का दिन गोवा का मुक्ति दिवस यानी स्थापना दिवस के तौर पर मनाया जाता है। स्थापना के बाद पणजी को गोवा की राजधानी तथा कोंकणी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया गया।