सिम्बायोसिस सेंटर फॉर मैनेजमेंट एंड ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट (एससीएमएचआरडी) के वार्षिक कॉर्पोरेट और सांस्कृतिक उत्सव नींव 2021 का आगाज शुक्रवार, 07 जनवरी, 2022 से हो गया है। देश के तीसरे सबसे बड़े बिजनेस-स्कूल फेस्टिवल में देश भर के 40 से अधिक कॉलेजों से 15,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। नींव 2021 की शुरुआत अटलांटिस डायरी कीनोट सेशन से हुई।
NEEV 2021 Keynote: नींव 2021 का शानदार आगाज, नामचीन हस्तियों ने किया युवाओं का मार्गदर्शन, साझा किए अनुभव
NEEV 2021 Atlantis Diaries : कीनोट सेशन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रसिद्ध हस्तियों में ओलंपिक खिलाड़ी सत्यव्रत कादियान, अभिनेता रोहित रॉय, कॉर्पोरेट लीडर सेवानिवृत्त मेजर वंदना शर्मा और मशहूर शेफ रणवीर बराड़ जैसे वक्ता शामिल हुए।
पहलवान कादियान बोले- सकारात्मक सोच से मिलती है ताकत
नींव 2021 के कीनोट सेशन अटलांटिस डायरीज में सबसे पहला वक्तव्य हरियाणा के रोहतक जिले से अर्जुन अवॉर्डी पहलवान सत्यव्रत कादियान का हुआ। कादियान ने कहा कि मोटिवेशन के बिना कुछ नहीं किया जा सकता है। सकारात्मक सोच ही आपको ताकत देती है। हम दंगल के पहले से ही सबकुछ भूलकर अपनी प्रैक्टिस पर ध्यान देते हैं। लक्ष्य को पाने के लिए पूरा फोकस अपने आत्मविश्वास और ताकत पर रखना चाहिए।
अर्जुन अवॉर्डी कादियान ने पहली बार 2010 के युवा ओलंपिक के उद्घाटन में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, जहां उन्होंने लड़कों की फ्री स्टाइल कुश्ती 100 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 97 किलोग्राम भार वर्ग कुश्ती में रजत पदक जीता था। कीनोट सेशन के दौरान, उन्होंने अपनी प्रैक्टिस के दिनों को भी याद किया। ओलंपियन कादियान ने सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त के साथ प्रैक्टिस की है। कादियान अपने पिता पहलवान सत्यवान कादियान, पहलवान सुशील कुमार और पहलवान योगेश्वर दत्त को अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।
रोहित रॉय बोले- जीवन में उतार-चढ़ाव चलते रहते हैं
नींव 2021 के अटलांटिस डायरी कीनोट सेशन में अभिनेता रोहित बॉस रॉय ने नींव 2021 के अटलांटिस डायरी कीनोट सेशन में अपने वक्तव्य की शुरुआत अपनी पढ़ाई और कॉलेज के दिनों की जानकारी साझा करते हुए की। उन्होंने टीवी इंडस्ट्री में मुकाम बनाने तक की बातें बताईं। इसके बाद जब उन्होंने शशि कूपर के बेटे एड मेकर कुणाल कपूर से मुलाकात का संस्मरण भी साझा किया, जिसके बाद से जिंदगी बदल गई।
स्वाभिमान से हुई टीवी की शुरुआत
रॉय के मुताबिक, कुणाल ने उन्हें जॉब ऑफर की थी। लेकिन उन्होंने टीवी की राह पकड़ी। स्वाभिमान उनका पहला टीवी शो था और इस सफर में उन्हें देस में निकला होगा चांद टीवी शो में करण ठाकुर के किरदार से सफलता मिली। बकौल रॉय, जब काम सराहा गया तो बड़े प्रोजेक्ट भी मिले। 2017 में फिल्म काबिल में ऋतिक रोशन के अपोजिट विलेन का रोल मिला। इसके बाद 2021 में फिल्म मुंबई सागा में भी बड़ी भूमिका निभाने का मौका मिला।
विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहिए
यह कड़ी मेहनत का फल है। जीवन में उतार-चढ़ाव चलते रहते हैं। अपने पर विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहिए। बकौल रोहित, एक समय में ऐसा था जब कुछ हो चुका था, मिशिगन यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए टिकट भी हो चुके थे, लेकिन स्टूडेंट वीजा खारिज हो गया और उस वक्त देश के बड़े संस्थानों में दाखिले के लिए बहुत सोचा। लेकिन कुणाल कपूर से मिलने के बाद सब-कुछ बदलता चला गया। अब मुझे अपने फैसले पर पछतावा नहीं है।
मेजर वंदना शर्मा ने हर क्षेत्र में पुरुषों के दबदबे को चुनौती दी
मेजर वंदना शर्मा बहु-प्रतिभाशाली साहसी भारतीय महिलाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिन्होंने देश के रक्षा क्षेत्र से लेकर कॉर्पोरेट इंडस्ट्री तक हर क्षेत्र में पुरुषों के दबदबे को चुनौती दी है। वूमन आइकॉन एशिया पैसिफिक 2017 रहीं कॉर्पोरेट लीडर सेवानिवृत्त मेजर वंदना शर्मा ने शुक्रवार को नींव 2021 अटलांटिस डायरीज के कीनोट सेशन को संबोधित किया। इस दौरान, मेजर शर्मा ने अपने बचपन से लेकर सेना और फिर बिजनेस वर्ल्ड तक के सफर को साझा किया और छात्र-छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।
बचनप से थी सेना में जाने की ख्वाहिश
मेजर शर्मा ने बताया कि लड़की होने के बावजूद वे बचपन से ही सेना में जाने की ख्वाहिश रखती थीं। उनका बचपन पुणे एयरफोर्स स्टेशन एरिया में बीता था। सैन्य परिवार होने के कारण आर्मी से लगाव ज्यादा था। मिग पायलट उनके हीरो हुआ करते थे। शर्मा ने मिलिट्री एकेडमी ज्वॉइन करने के दिनों की यादें भी साझा की। उन्होंने अपने साहसी भरे सफर को बड़ी रोचकता से बताया। मेजर शर्मा बतातीं हैं कि लोग कहते थे, लड़की है नहीं कर पाएगी। चुनौतियां काफी थीं। लेकिन लीडरशिप का मौका भी मिला।
लद्दाख में तैनाती के अनुभवों को साझा किया
मेजर शर्मा मानतीं हैं कि सेना में दो साल बिताना सबके लिए अनिवार्य किया जाना चाहिए। इससे वे अनुशासन पूर्वक जिंदगी जीना सीखेंगे। उन्होंने लद्दाख में तैनाती के अपने अनुभवों को भी साझा किया। मेजर शर्मा ने 1999 के करगिल युद्ध में बैक एंड की भूमिका निभाई थी। वे वहां जाना चाहती थीं। इसके लिए कमांडिंग ऑफिसर से रिक्वेस्ट की थी। उस वक्त पाकिस्तान की ओर से लगातार फायरिंग और मोर्टार दागे जा रहे थे। युद्ध के हालात में चंद समय में बड़े फैसले लेने होते थे। फ्रंट मोर्चे के साथ-साथ बैक एंड की भूमिका भी बेहद अहम होती है। सेना के लिए इतनी ऊंचाई पर राशन सामग्री पहुंचाना भी कठिन चुनौती रहती है।
एक दशक की सैन्य सेवा के बाद कॉर्पोरेट सेक्टर में एंट्री
उन्होंने लगभग एक दशक के सैन्य करियर में कई जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और फिर कॉर्पोरेट सेक्टर में एंट्री की। वे विप्रो, जीएमआर ग्रुप, टीएनटी और मिंत्रा जैसी कंपनियों में कई अहम प्रोजेक्ट और जन भागीदारी वाली पहल में शामिल रही हैं। फिलहाल, अपने स्टार्टअप के साथ एंटरप्रैन्योर्स को सफलता पाने में मदद कर रही हैं।
शेफ रणवीर बराड़ बोले- जिंदगी में प्लान बी नहीं होता
देश के जाने-माने शेफ रणवीर बराड़ ने भी नींव 2021 के अटलांटिस डायरी कीनोट सेशन में शिरकत की। कीनोट सेशन को संबोधित करते हुए रणवीर ने कहा कि युवाओं को अपने करियर के प्रति, अपने पैशन के प्रति बेशर्म होना पड़ेगा। क्योंकि शर्म करेंगे और लोगों की प्रतिक्रियाओं के चक्कर में फंसे रहेंगे तो आगे नहीं बढ़ पाएंगे।
जुनून ने दुनिया के कोने-कोने में पहुंचाया
बराड़ कहते हैं कि खाने के जुनून ने मुझे दुनिया के कोने-कोने में पहुंचा दिया है। किसी फाइव स्टार होटल में सबसे कम उम्र के एक्जीक्यूटिव शेफ बनने से लेकर मेरे खुद के कुकिंग शो की मेजबानी करने तक, खाना पकाने के लिए मेरे प्यार से ही इतना आगे बढ़ पाया हूं। हम पहले टीवी पर प्रोग्राम करते थे। लॉकडाउन के बाद हमने भी बदलाव किए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आए। लाइव सेशन शुरू किए। आज वेबसाइट और एप दोनों लोकप्रिय हो चुकी हैं।
सफर ही उस लक्ष्य की आत्मा है
बकौल बराड़, किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए एक लंबा सफर करना पड़ता है। यह सफर ही उस लक्ष्य की आत्मा है। आत्मा जितनी पवित्र होगी, लक्ष्य उतना ही करीब और आसान होता जाएगा। प्रयास ही सफलता की कुंजी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शुरुआती दौर में सफल से ज्यादा विफल होंगे। लोग ट्रोल भी करेंगे। लेकिन, लोक्रप्रियता भी बढ़ेगी। आखिरकार जीत आपकी ही होगी। जिंदगी में प्लान बी नहीं होता, जो होता है वह प्लान ए से ही निकलता है।