कोरोना वायरस के प्रकोप के लंबे समय बंद पड़े स्कूल विभिन्न राज्यों में खुलने ही लगे थे कि फिर से वायरस का नया स्ट्रेन ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है। वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 का यह नया वैरिएंट भारत में भी प्रवेश कर चुका है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी इसके दो मामलों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। ऐसे में विभिन्न राज्यों में स्कूल खुले होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है।
Omicron in India: ओमिक्रॉन की भारत में दस्तक, एक्सपर्ट बोले- स्कूलों को बंद करने से पहले सोच-समझकर योजना बनाए सरकार
New Covid Variant Omicron Virus in India: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रॉन के दो मामलों की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। ऐसे में विभिन्न राज्यों में स्कूल खुले होने से अभिभावकों की चिंता बढ़ने लगी है। अधिकतर अभिभावक यह सोचकर चिंतित हैं कि क्या फिर से लॉकडाउन होगा, क्या स्कूल बंद हो जाएंगे।
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा विभाग की प्रोफेसर प्रज्ञा शर्मा ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका की रिपोर्ट, जिसने सबसे पहले कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन संस्करण की सूचना दी थी, यह सुझाव देती है कि यह एक हल्के संक्रमण का कारण बनता है और दिल्ली में 97 प्रतिशत की उच्च सीरो-पॉजिटिविटी है। बच्चों में भी नवीनतम सीरो-सर्वेक्षण के दौरान 80 प्रतिशत से अधिक की सीरो सकारात्मकता की जानकारी मिली थी। इसलिए, इससे दिल्ली में बड़ी लहर नहीं आनी चाहिए। शर्मा ने कहा, हमें शारीरिक तौर पर कक्षाएं फिर से शुरू करनी चाहिए, लेकिन बहुत सावधानी के साथ और स्कूलों में कोविड-उपयुक्त व्यवहार का सख्ती से पालन करना चाहिए।स्कूलों में कोविड-19 बचाव निर्देशों का सख्ती से हो पालन : प्रोफेसर प्रज्ञा
बच्चों को घर पर ही रखना भी सुरक्षा की गारंटी नहीं : प्रो अरुण
यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के प्रोफेसर अरुण शर्मा के अनुसार, अभी ओमिक्रॉन की संक्रामकता, ट्रांसमिसिबिलिटी और मौजूदा प्रतिरक्षा स्थिति के साथ इसका संबंध के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। उन्होंने कहा, इसलिए, अब हम जो कुछ भी कहेंगे वह अनुमान होगा, लेकिन सरकार जीनोमिक सीक्वेंसिंग के लिए अधिक नमूने एकत्र करने, हवाईअड्डे पर जांच लागू करने आदि के लिए सभी कदम उठा रही है।
स्कूलों को फिर से खोलना या बंद करना यह एक कठिन निर्णय है। लेकिन, बच्चों को घर पर ही रखना भी इस बात की गारंटी नहीं है कि वे संक्रमित नहीं होंगे।
एम्स के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ करण मदान का कहना है कि स्कूलों में शारीरिक कक्षाएं सावधानीपूर्वक निगरानी के तहत फिर से शुरू की जा सकती हैं। फिलहाल दिल्ली में कोरोना वायरस के नए मामलों की संख्या ज्यादा नहीं है। यदि रोगसूचक मामले बढ़ने लगते हैं, तो हमें उसके अनुसार कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कहा कि अभी के लिए सावधानीपूर्वक निगरानी और निगरानी में चीजों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
कक्षाएं सावधानीपूर्वक शुरू की जा सकती हैं : डॉ मदान
पैसिफिक वर्ल्ड स्कूल की प्रिंसिपल सीमा कौर ने कहा कि जैसे ही स्कूलों को खोलना शुरू किया था, नए वायरस से आने वाले खतरे ने अनिश्चितता और चिंता पैदा कर दी है। शिक्षा क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिसमें बच्चों के शैक्षणिक, सामाजिक और मानसिक कौशल प्रभावित हुए हैं। कोरोना की वास्तविक चुनौती स्थिति को समझना और सभी की सुरक्षा के लिए सावधानी जरूरी है। भारत में, मामलों की वृद्धि दर की तुलना में रिकवरी दर बहुत अधिक है। इसलिए, उपयुक्त निर्णय लिया जाना चाहिए। कौर ने कहा, जैसे-जैसे मामले बढ़ते हैं, शिक्षा के ऑनलाइन मोड पर स्विच करना सही है; लेकिन जब संख्या नियंत्रण में होती है, तो हमें इसका अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए और जो ऑनलाइन मोड के कारण पिछड़ गए हैं, उन्हें स्कूल बुलाना शुरू कर देना चाहिए। शिक्षा क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित : सीमा कौर