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पैरों से लिखने वाली अनोखी टीचर, इसे देख करेंगे सैल्यूट
Wed, 06 Jul 2016 05:46 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 06 Jul 2016 05:46 PM IST
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दशकों पहले बिहार के एक परिवार में एक लड़की पैदा हुई थी जो शारीरिक रुप से अक्षम थी। परिवार वालों को लोगों ने सलाह दी कि ऐसी बेटी किस काम की, इसे मार डालो। लेकिन घर वालों के मन में पता नहीं क्या आया कि उन्होंने उसे मारा नहीं। बच्ची बड़ी हुई और टीचर बनी। आज वही बच्ची छोटे बच्चों को पढ़ाती है। उसने उन सब दकियानूसी सोच वालों के गाल पर करारा तमाचा जड़ा है जो लड़कियों को हर मामले में कमजोर मानते हैं।
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बसंती कुमारी नाम की इस लड़की के जन्म से ही दोनों हाथ नहीं थे इस वजह से उसके घर वालों ने उसे स्कूल भेजना भी मुनासिब नहीं समझा। उसने अपनी मां से पढ़ने के लिए बहुत मिन्नतें की, तब जाकर उनकी मां ने 6 साल की उम्र में उन्हें स्कूल भेजा। पहले तो बसंती को पढ़ाई में समस्या आती थी लेकिन कुछ ही दिनों में बसंती ने अपने पैरों से लिखना सीख लिया।
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1933 में उन्होंने दसवीं की परीक्षा पास की और पैसे कमाने के लिए ट्यूशन लेने लगीं। उन्हें रोड़ाबंद सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक की नौकरी मिल गई है और आज वो हजारों बच्चों को पढ़ाती हैं। जब उनके पिता रिटायर हुए थे तब परिवार के सदस्यों का पेट पालने और बड़ी बहन के शादी की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। एक बेटी होकर उन्होंने बेटे के भी सारे कर्तव्य पूरे किए।
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वो बताती हैं कि जब शिक्षक के रुप में उनका चयन हुआ था जब ब्लैकबोर्ड पर लिखना उनके लिए चैलेंज बन गया था। लेकिन प्रैक्टिस और संतुलन के दम पर उन्होंने वो भी सीख लिया। ब्लैकबोर्ड पर लिखने के अलावा बच्चों की कॉपियां भी वो पैरों से ही चेक करती हैं।
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