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ब्रिटिश काल के कानून: ये हैं दुनिया के वे देश, जहां आज भी चलते हैं अंग्रेजी राज के कायदे

एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला Published by: वर्तिका तोलानी Updated Sat, 03 Apr 2021 07:11 PM IST
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These british laws are still used in the various countries of the world
ब्रिटिशकालीन कानून - फोटो : अमर उजाला

भारतीय उपमहाद्वीप पर 1858 से 1947 तक ब्रिटिश द्वारा शासन किया गया था। इस दौरान भारत के किसी भी क्षेत्र का निर्णय लेने का अधिकार केवल ब्रिटेन के शाही परिवार के पास था। उन्हीं के द्वारा नियुक्त किए गए कमांडर और उच्च अधिकारी, भारत की कानून प्रणाली को नियंत्रित करते थे। एक अध्ययन के मुताबिक भारत पर 200 साल तक राज करने वाले ब्रिटेन ने 68 फीसदी देशों पर शासन किया था। लेकिन आजादी के इतने सालों बाद भी भारत सहित दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां आज भी अंग्रेजों द्वारा बनाई गई व्यवस्था लागू है। आज हम आपको ऐसे ही 4 ब्रिटिशकालीन कानूनों के बारे में बताने जा रहे हैं जो दुनिया के विभिन्न देशों में आज भी थोड़ें संशोधन के साथ अधिनियमित हैं। पढ़िए...  

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बाएं और दाएं हाथ की यातायात व्यवस्था - फोटो : सोशल मीडिया

आज भी 75 देशों में लागू है बाएं हाथ की यातायात व्यवस्था

अंग्रेजों द्वारा 1800 के दशक में यह व्यवस्था शुरू की गई थी। इसी व्यवस्था के तहत हम आज भी सड़क पर बाएं हाथ पर गाड़ियां चलाते और पैदल चलते हैं। दरअसल अंग्रेजों ने तब यह व्यवस्था इसलिए बनाई ताकि उन्हें बाएं हाथ से बाएं तरफ घोड़ा चलाते वक्त दाहिने हाथ से युद्ध या अन्य चीजें करने में सुविधा हो सके। यह व्यवस्था ऑस्ट्रेलिया, भारत और साउथ अफ्रीका समेत 75 देशों में है। वहीं 165 देशों में दाएं हाथ की यातायात व्यवस्था मौजूद है। 

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दंड संहिता 1860 - फोटो : अमर उजाला

ब्रिटिश साम्राज्य के अलावा दो अन्य देशों में भी लागू है दंड संहिता

दंड संहिता (पेनल कोड), ब्रिटिश काल में सन् 1860 में भारत में लागू की गई थी। इसके अंतर्गत किसी भी भारतीय द्वारा किए गए अपराधों को परिभाषित किया गया है। साथ ही दंड का प्रावधान भी किया गया है। विभाजन के पश्चात पाकिस्तान और बांग्लादेश ने भी भारतीय दंड संहिता को लागू किया है। इसके अलावा बर्मा, श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर, ब्रुनेई आदि ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा भी यह विधान लागू किया गया था। किंतु इसमें बहुत से संशोधन किए जा चुके हैं।  

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साक्ष्य अधिनियम 1872 - फोटो : अमर उजाला

पाकिस्तान में कानून-ए-शहादत ऑर्डर के नाम अधिनियमित है साक्ष्य अधिनियम

वर्ष 1872 में यह अधिनियम ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था। यह अधिनियम इसी बात की जानकारी प्रदान करता है कि न्यायालय में कौन-कौन सी चीजें साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती हैं। 144 वर्ष बाद भी छोटे-मोटे संशोधनों के साथ यह अधिनियम अदालत की सभी न्यायिक कार्यवाहियों पर लागू है। भारत के अलावा बांग्लादेश और पाकिस्तान ने भी साक्ष्य अधिनियम 1872 को लागू किया है। पाकिस्तान में इसे कानून-ए-शहादत ऑर्डर 1984 के नाम से जाना जाता है, जो लॉ ऑफ एविडेंस का उर्दू अनुवाद है। 

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विदेशी अधिनियम 1946 - फोटो : अमर उजाला

बांग्लादेश में भी है विदेशी अधिनियम (फॉरेनर्स एक्ट) 1946

अंग्रेजी हुकूमत द्वारा भारत की आजादी से एक वर्ष पूर्व यह एक्ट अधिनियमित किया गया था। इसके अनुसार, वह व्यक्ति जो भारत का नागरिक या निवासी नहीं है वो विदेशी कहलाया जाएगा। वहीं कोई व्यक्ति विदेशी है या नहीं इस बात को सिद्ध करने की जिम्मेदारी भी उसी व्यक्ति की है। यह अधिनियम भारत के अलावा बांग्लादेश और पाकिस्तान में भी लागू हैं। 

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