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Bhojpuri EXCLUSIVE: इस चलन ने बर्बाद कर दी भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री, ‘अमर उजाला’ से बोले दिग्गज निर्माता

Sun, 01 Jan 2023 01:57 PM IST
मेघा चौधरी अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई Published by: मेघा चौधरी Updated Sun, 01 Jan 2023 01:57 PM IST
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Bhojpuri EXCLUSIVE Pramod Shastri Chunmun Pandit Arvind Chaubey talk about trend ruined industry to Amar Ujala
महेश पांडे, अरविंद चौबे, प्रदीप शर्मा - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अपनी सहज, सामाजिक और लोकरस में पगी फिल्मों के लिए भले अब दक्षिण भारतीय सिनेमा की तरफ लोग आस तकते हों, लेकिन मौजूदा पीढ़ी के कम लोगों को ही पता है कि आंचलिक रंग ढंग के साथ सिनेमा बनाने की देश में पहली शुरुआत भोजपुरी सिनेमा से हुई है। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद से लेकर मौजूदा सुपर सितारों में सबसे बड़े यानी अमिताभ बच्चन तक को पसंद भोजपुरी भाषा के सिनेमा का इन दिनों को पुरसा हाल नहीं है। हालात यहां तक आ पहुंचे हैं कि अब सिनेमाघरों के लिए फिल्में ही नहीं बन रही हैं। अश्लील गानों, यूट्यूब हिट्स के लिए इस्तेमाल किए जा रहे टोटकों और चंद लोगों की परिक्रमा में सिमटी भोजपुरी के इस चलन की पड़ताल के लिए हमने भोजपुरी सिनेमा के कुछ चर्चित फिल्मकारों से बात की, आइए देखते हैं ये क्या कहते हैं..:

Bhojpuri EXCLUSIVE Pramod Shastri Chunmun Pandit Arvind Chaubey talk about trend ruined industry to Amar Ujala
प्रमोद शास्त्री - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

नए स्टार की राह देखता भोजपुरी सिनेमा
अभिनेता अरविंद अकेला कल्लू के साथ 'आन बान शान' जैसी कई भोजपुरी फिल्मों का निर्देशन कर चुके प्रमोद शास्त्री कहते है, 'भोजपुरी फिल्म के निर्माता थोड़ी छोटी सोच के हैं। उनको लगता है कि अगर रिकवरी होगी तभी पैसा फिल्म में लगाएंगे। काफी लंबे समय से भोजपुरी में गायक ही अभिनेता बनता है, निर्माता उनपर ही पैसा लगाते हैं। रवि किशन इतने बड़े स्टार बने, वह कभी गायक नहीं थे। प्रदीप पांडे चिंटू भी भोजपुरी सिनेमा के बहुत बड़े स्टार हैं। लेकिन ये सिनेमा चलन का मारा है। भोजपुरी में एक बीफोरयू चैनल है जिसका बजट इतना कम है कि उसमें ठीक से फिल्म तो क्या एक वेब सीरीज का एपिसोड नहीं बन सकता। मार्केटिंग का बजट नहीं है। अब नई पीढ़ी में जो गायक आ रहे हैं वे कलाकार अच्छे नहीं हैं और नॉन सिंगर को कोई प्रमोट नहीं कर रहा है। यही वजह है कि पिछले तीन चार साल में भोजपुरी में कोई नया स्टार नहीं आया है।' 

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पवन सिंह के साथ अरविंद चौबे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सिनेमाघर ही नहीं पहुंच पा रहा भोजपुरी सिनेमा
पवन सिंह और अरविंद अकेला कल्लू को लेकर कई हिट भोजपुरी फिल्में बना चुके अरविंद चौबे कहते हैं, 'भोजपुरी सिनेमा में वही हीरो छाए रहे हैं जिनके गाने हिट हुए है। काफी समय से किसी नए गायक का कोई हिट गाना नहीं आया इसीलिए कोई हीरो भी लांच नहीं हुआ है। बिना गायकी वाले कलाकार आते हैं तो वे चल नहीं पाते। दिक्कत अब ये है कि भोजपुरी सिनेमा तथाकथित सुपरसितारों के साथ भी सिनेमाघरों तक नहीं पहुंच पा रहा है। पहले थिएटर में फिल्में रिलीज होती थी तब लोगों को पता चलता था कि मार्केट में कौन नया हीरो आया है? अब तो नए हीरो की फिल्में यूट्यूब पर ही रिलीज होकर रह जाती है। सैटेलाइट पर भी अच्छी डील मिलती नहीं है। थिएटर में जब बड़े स्टार्स की फिल्में नहीं चल रही है,तो नए कलाकारों को लेकर बनाई जाने वाली फिल्में कैसे चलेगी, इसलिए कोई निर्माता नए लोगों पर पैसे लगाने को राजी नहीं।'

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चुनमुन पंडित - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

वितरक के आगे मजबूर निर्माता
निर्देशक चुनमुन पंडित कहते है, 'भोजपुरी सिनेमा में नए चेहरे नए चेहरे आ रहे हैं और पुरजोर प्रयास भी कर रहे हैं, लेकिन उनको सफलता नहीं मिल पा रही है। इसलिए कोई  निर्माता उन पर पैसे लगाना नहीं चाहता है। जो 2-4 बड़े स्टार्स भोजपुरी के हैं लोग उन्हीं के साथ काम करना चाहते हैं। हमारे यहां बुरी प्रथा हो गई है कि भोजपुरी के सिंगर ही हीरो बनकर आ रहे हैं। हाल फिलहाल की बात करें तो रितेश पांडे के अलावा कोई स्टार नहीं आया है। जरूरी नहीं कि गायक ही अच्छे कलाकार हो सकते हैं। प्रतिभा तो हर किसी में हो सकती है। लेकिन गायक से नायक बनने की जो परंपरा मनोज तिवारी के बाद से चली आ रही है। उसी ढर्रे पर भोजपुरी इंडस्ट्री चली आ रही है। निर्माता और वितरक अगर इस पर विचार करे कि नॉन सिंगर्स को भी लेकर अच्छी फिल्में बनाई जा सकती है लेकिन निर्माता भी कहीं ना कहीं वितरक के आगे मजबूर हैं। अगर नए लोगों को लेकर एक बार फिल्म बना भी लेते हैं तो दोबारा हिम्मत नहीं कर पाते हैं। घुमा फिरा के कहा जाए तो अभी भी चंद लोगों की मुट्ठी में भोजपुरी इंडस्ट्री बंद पड़ी हुई है।’

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महेश पांडे - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

मुफ्त के मनोरंजन से भोजपुरी का बंटाधार
निर्माता, निर्देशक महेश पांडे कहते है, 'भोजपुरी सिनेमा में स्टार सिस्टम प्रश्नवाचक है। अभी भी भोजपुरी में दिनेश लाल यादव निरहुआ, पवन सिंह खेसारीलाल यादव, प्रदीप पांडे चिंटू जैसे सितारे भोजपुरी के स्टार है। इनके अलावा जो अगली खेप में रितेश पांडे, यश कुमार मिश्रा, अरविंद अकेला कल्लू  जैसे सितारे हैं ये भी बहुत ही टैलेंटेड है। लेकिन पिछले तीन साल में कोई भी फिल्म हिट हुई है क्या, यह सबसे बड़ा सवाल है। फिल्म थिएटर में अगर नहीं चल रही है तो इसमें स्टार की गलती नहीं है, समस्या यहां है कि हमने यूट्यूब पर फिल्में फिल्में फ्री में दिखानी शुरू कर दी है, दर्शक सोचते है कि एक महीने के बाद फिल्म यूट्यूब पर आ जायेगी तो थिएटर में पैसे खर्च करके क्यों देखने जाए? अभी फिल्मे टीवी और यूट्यूब के लिए बन रही है और भोजपुरी के जो भी स्टार्स इन दिनों काम कर रहे हैं उनको लेकर सीमित बजट में फिल्में बनाई जाए तभी उसकी रिकवरी होगी। नए स्टार्स की फिल्मों की रिकवरी नहीं है, इसलिए कोई स्टार पिछले तीन साल में लांच नहीं हुआ। भोजपुरी सिनेमा का नजरिया जब तक नहीं बदलेगा तक तक नए स्टार्स की फिल्में नहीं चलेंगी।'

 

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