29 अप्रैल 1919 को जन्में दिग्गज तबला वादक उस्ताद कुरैशी अल्ला रक्खा खान की आज डेथ एनिवर्सिरी होती है। आज ही के दिन साल 2000 में क्लासिकल म्यूजिक को नई ऊंचाई देने वाले अल्ला रक्खा दुनिया से रुख्सत कर गए थे। आज उनकी डेथ एनिवर्सिरी पर आइए आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें।
अल्ला रक्खा ने बीटल्स के साथ परफॉर्म किया था जो दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित बैंड माना जाता है। आज 2019 तक आते-आते भी भारत या दुनिया के म्यूजिक आर्टिस्ट जहां पहुंचने की हसरत रखते हैं। वहां से अल्ला पहुंचकर लौटे थे।
12 साल की उम्र से ही अल्ला रक्खा को तबला वादन में दिलचस्पी थी। उन्होंने पंजाब घराने के मियां कादिर बख्श से तबले की तालीम लेनी शुरू की और फिर पटियाला घराने के आशिक अली खान से राग विद्या सीखी। अल्ला रक्खा ने 1940 के दशक में पहली बार तबला परफॉर्मेंस दी।
तबला वादक उस्ताद कुरैशी अल्ला रक्खा खान को साल 1977 में पद्मश्री और 1982 में संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड से नवाजा गया। क्या आप जानते हैं अमेरिकन संगीतज्ञ मिकी हार्ट ने अल्ला रक्खा के बारे में कहा था कि अल्लाह रक्खा आइंस्टीन हैं, पिकासो हैं, वो इस ग्रह पर लय-ताल संबंधी संगीत के सबसे बड़े दिग्गज हैं।
एक समय में दूरदर्शन पर आपने चाय का वो एड देखा होगा जिसमें जाने माने तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन 'वाह ताज' बोलते नजर आते हैं। वे अल्ला रक्खा के बेटे हैं। वह खां साहब की उस रवायत को आगे बढ़ा रहे हैं जिसने क्लासिकल म्यूजिक को आधुनिक समय में एक नई ऊंचाई दी। 1988 में जब उन्हें पद्म श्री का पुरस्कार मिला था तब वह महज 37 वर्ष के थे और इस उम्र में यह पुरस्कार पाने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति भी थे।