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अमिताभ को इस फिल्म ने दिलाया ‘एंग्री यंग मैन’ का खिताब, इस घटना में पहुंचे थे मरने के कगार पर
Sun, 26 May 2019 03:28 PM IST
विजय जैन
प्रदीप चंद्र और विकास चंद्र सिन्हा
प्रदीप चंद्र और विकास चंद्र सिन्हा
Published by: विजय जैन
Updated Sun, 26 May 2019 03:28 PM IST
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Amitabh Bachchan
- फोटो : file photo
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बॉलीवुड के बादशाह अमिताभ बच्चन वरिष्ठ साहित्यकार हरिवंश राय बच्चन के सुपुत्र थे, इलाहबाद में पैदा हुए। नैनीताल और दिल्ली में पढ़ाई की, फिर 60 के दशक में करियर की शुरुआत करने के लिए कोलकाता (उस दौर का कलकत्ता) पहुंचे। सिनेमा की चमक उन्हें मुंबई खींच लाई और ‘सात हिंदुस्तानी’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद काफी दिनों तक संघर्ष का दौर चला, इस दौर में प्रकाश मेहरा को लीक से हटकर ‘जंजीर’ के लिए कोई बड़ा सितारा नहीं मिला तो आखिर में यह फिल्म अमिताभ बच्चन के हिस्से में आई और 1973 में भारतीय सिनेमा को ‘एंग्री यंग मैन’ मिला।
amitabh bachchan
- फोटो : social media
इस फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1980 में एक पत्रिका ने एक रिपोर्ट में लिखा, 'दिन के किसी भी वक्त लाखों लोग सिनेमा के पर्दे पर एक लंबे, पतले और शर्मीले से नौजवान को गाते, नाचते और खासतौर पर लड़ते हुए देख रहे होते हैं।' इसके बाद अमिताभ की जिंदगी में बड़ी दर्दनाक घटना हुई। 1982 में ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान एक घातक दुर्घटना में उन्हें गंभीर चोटें लगीं। उनके बचने की उम्मीद न के बराबर थी, लेकिन चमत्कारिक रूप से वह बच गए और अपनी अदाकारी के सफर को थोड़ा विराम दिया।
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- फोटो : social media
1984 में अपने दोस्त और उस समय देश के प्रधानमंत्री के इशारे पर अमिताभ ने राजनीति में कदम रखे, लेकिन 80 के दशक के खत्म होते-होते उनका राजनीति से मोहभंग हो गया और फिर से अदाकारी की दुनिया में आ गए। इसके बाद 1990 में उन्होंने अदाकारी से कुछ समय का अवकाश लेकर नए दौर के मनोरंजन में पैठ बनाने के लिए अमिताभ बच्चन कॉरर्पोरेशन लिमिटेड यानी एबीसीएल बनाई। इसकी शुरुआत तो ठीक ही हुई, लेकिन 90 के दशक के आखिर तक आते-आते अमिताभ बच्चन के वित्तीय हालात खराब हो गए और मजबूरी में टीवी का रुख करना पड़ा और सहायक किरदार निभाने पड़े।
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amitabh bachchan
- फोटो : file photo
एक देश जिसकी दो-तिहाई आबादी 35 से कम उम्र की है, वहां अमिताभ के फिल्मी करियर की शुरुआत युगों पहले हुई लगती है, जिसे मौजूदा दौर के युवाओं के लिए पहचान पाना भी मुश्किल है। जब बच्चन ने पहली फिल्म की थी, उस समय बांग्लादेश को पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था।
बीट्लस की जोड़ी एक साथ सुर बिखेरा करती थी, एक इंसान ने चांद पर कदम रखे ही थे। लेकिन स्मार्ट साइडबर्न, बेलबॉटम और सुनील गावस्कर के उस दौर से अब स्मार्टफोन, मेट्रोसेक्सुअल पहनावे और विराट कोहली के दौर में अमिताभ बच्चन एक ऐसे सितारे के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्हें भारतीयों ने लगातार चमक बिखेरते देखा है।
बीट्लस की जोड़ी एक साथ सुर बिखेरा करती थी, एक इंसान ने चांद पर कदम रखे ही थे। लेकिन स्मार्ट साइडबर्न, बेलबॉटम और सुनील गावस्कर के उस दौर से अब स्मार्टफोन, मेट्रोसेक्सुअल पहनावे और विराट कोहली के दौर में अमिताभ बच्चन एक ऐसे सितारे के तौर पर जाने जाते हैं, जिन्हें भारतीयों ने लगातार चमक बिखेरते देखा है।
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बॉलीवुड
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भारतीय सिनेमा प्रेमियों के दिल में उनके लिए जगह न आपातकाल की राजनीतिक उथल-पुथल में कम हुई, न उदारीकरण से ढही। उनके जीवन और करियर के तमाम उलटफेर और उठापटक के बाद भी भारतीय सिनेमा प्रेमियों के दिलों में अमिताभ बच्चन के लिए बेशुमार प्रेम है।
एक पत्रिका ने अमिताभ बच्चन को तमाम उतार-चढ़ावों के बाद भी भारतीयों के दिल में जगह बनाए रखने में कामयाब होने के करिश्मे को ‘फेट्ज हूडिनी’ के तौर पर परिभाषित किया। भारत में अमिताभ बच्चन के कभी गुमनाम होने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। लेकिन मेगास्टार की हैसियत हासिल करने के लिए बच्चन को बाकायदा संघर्ष करना पड़ा।
एक पत्रिका ने अमिताभ बच्चन को तमाम उतार-चढ़ावों के बाद भी भारतीयों के दिल में जगह बनाए रखने में कामयाब होने के करिश्मे को ‘फेट्ज हूडिनी’ के तौर पर परिभाषित किया। भारत में अमिताभ बच्चन के कभी गुमनाम होने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। लेकिन मेगास्टार की हैसियत हासिल करने के लिए बच्चन को बाकायदा संघर्ष करना पड़ा।