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51 बरस की मां प्रेग्नेंट हो जाए...कैसे दिमाग में आया 'बधाई हो' का आइडिया, निर्देशक ने खोले राज
रवि बुले
Updated Thu, 18 Oct 2018 12:40 PM IST
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दिल्ली के अमित शर्मा मध्यमवर्गीय परिवार से हैं। क्रिकेटर बनाना चाहते थे। क्रिकेट की पॉलीटिक्स के कारण वह नौंवी के बाद थियेटर से जुड़े और हीरो बनने का सपना देखा। बतौर मॉडल निर्देशक प्रदीप सरकार के साथ शुरुआत की और विज्ञापन वर्ल्ड में सक्रिय हुए। बोनी कपूर ने उन्हें साल 2015 में फिल्म में निर्देशक बनाया। अब वह दूसरी फिल्म 'बधाई हो' के साथ आ रहे हैं। अमित शर्मा से रवि बुले की विशेष बातचीत...
आप दिल्ली से हैं और मुंबई में करिअर बनाया। यह सफर कैसा रहा ?
स्कूलिंग के बाद फर्स्ट ईयर से मैं निर्देशक प्रदीप सरकार का सहायक-लेखक बन गया। करीब छह-सात साल साथ रहा और बतौर एक्टर 17 ऐड फिल्में की। लिखते हुए लगा कि निर्देशन कर सकता हूं। तब दो दोस्तों के साथ अपनी कंपनी खोल ली। विज्ञापन फिल्में बनानी शुरू कीं, परंतु हम लोग कॉलेज से निकले हुए बच्चे दिखते थे तो मैंने दाढ़ी बढ़ा ली ताकि बड़ा दिख सकूं। तो यह सफर शुरू हुआ। इसके बाद मैंने करीब दो हजार ऐड फिल्में डायरेक्ट की। फिल्म बनाने का मन था तो संयोग से तेवर मिली। उसके बाद लगा कि मुझे मेरे मन की फिल्म बनानी चाहिए, तो डेढ़-दो साल लगाकर अपने दो राइटरों के साथ मिलकर 'बधाई हो' लिखी।
स्कूलिंग के बाद फर्स्ट ईयर से मैं निर्देशक प्रदीप सरकार का सहायक-लेखक बन गया। करीब छह-सात साल साथ रहा और बतौर एक्टर 17 ऐड फिल्में की। लिखते हुए लगा कि निर्देशन कर सकता हूं। तब दो दोस्तों के साथ अपनी कंपनी खोल ली। विज्ञापन फिल्में बनानी शुरू कीं, परंतु हम लोग कॉलेज से निकले हुए बच्चे दिखते थे तो मैंने दाढ़ी बढ़ा ली ताकि बड़ा दिख सकूं। तो यह सफर शुरू हुआ। इसके बाद मैंने करीब दो हजार ऐड फिल्में डायरेक्ट की। फिल्म बनाने का मन था तो संयोग से तेवर मिली। उसके बाद लगा कि मुझे मेरे मन की फिल्म बनानी चाहिए, तो डेढ़-दो साल लगाकर अपने दो राइटरों के साथ मिलकर 'बधाई हो' लिखी।
बधाई हो का आइडिया आप तक कैसे आया ?
मेरे राइटर दोस्त ने जब कहा कि आइडिया है सुन लो, 51 बरस की मां प्रेग्नेंट हो जाए तो क्या-क्या होगा! मैं उछल पड़ा और उन्हें गले लगा लिया। मैंने कहा कि बहुत ही कमाल आइडिया है लेकिन ट्रीटमेंट बहुत अच्छा चाहिए। मैं राइटिंग में पहले दिन से इससे जुड़ा। कुछ वह लिख कर लाते थे कुछ आइडिया मैं देता था। इस तरह से राइटिंग चली।
बधाई हो पेचीदा आइडिया है कि एक युवा लड़के के माता-पिता नई संतान को जन्म देने वाले हैं। क्या चुनौती थी लिखने में ?
किसी आइडिया के कॉमेडी और अश्लील होने में बड़ी बारीक रेखा होती है। इसका ही हमने ध्यान रखा। लिखने में समय गया लेकिन मजा भी आया।
मेरे राइटर दोस्त ने जब कहा कि आइडिया है सुन लो, 51 बरस की मां प्रेग्नेंट हो जाए तो क्या-क्या होगा! मैं उछल पड़ा और उन्हें गले लगा लिया। मैंने कहा कि बहुत ही कमाल आइडिया है लेकिन ट्रीटमेंट बहुत अच्छा चाहिए। मैं राइटिंग में पहले दिन से इससे जुड़ा। कुछ वह लिख कर लाते थे कुछ आइडिया मैं देता था। इस तरह से राइटिंग चली।
बधाई हो पेचीदा आइडिया है कि एक युवा लड़के के माता-पिता नई संतान को जन्म देने वाले हैं। क्या चुनौती थी लिखने में ?
किसी आइडिया के कॉमेडी और अश्लील होने में बड़ी बारीक रेखा होती है। इसका ही हमने ध्यान रखा। लिखने में समय गया लेकिन मजा भी आया।
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नीना गुप्ता लंबे समय से फिल्मों में नहीं थीं। मां के रोल के लिए उन्हें कैसे चुना ?
जब आप किसी को लंबे समय तक नहीं देखते हैं भूल जाते हैं। हमारे सामने कई नाम थे और चर्चाएं हो रही थी। तभी किसी ने मुझे नीना गुप्ता और जैकी श्रॉफ की शॉर्ट फिल्म खुजली दिखाई। वह देखकर हमारे कास्टिंग डायरेक्टर ने उनसे संपर्क किया। मैंने कहा कि आप नीना जी से कहिएगा बहुत सिंपल कपड़े पहन कर आएं। वह साधारण सलवार कुर्ती में आ गईं। उन्होंने बताया कि कुर्ती की मैचिंग की सलवार नहीं थी तो वह मैंने अपनी नौकरानी से मांगकर पहन ली। ऐक्टिंग में उनका इतना इंट्रेस्ट देख कर मैं फिदा हो गया। कहानी सुनते ही वह तैयार हो गईं। बोली: अब आप पर है कि मुझे लेते हैं या नहीं। मैंने कहा: आप ही हैं मेरी प्रियंवदा।
जब आप किसी को लंबे समय तक नहीं देखते हैं भूल जाते हैं। हमारे सामने कई नाम थे और चर्चाएं हो रही थी। तभी किसी ने मुझे नीना गुप्ता और जैकी श्रॉफ की शॉर्ट फिल्म खुजली दिखाई। वह देखकर हमारे कास्टिंग डायरेक्टर ने उनसे संपर्क किया। मैंने कहा कि आप नीना जी से कहिएगा बहुत सिंपल कपड़े पहन कर आएं। वह साधारण सलवार कुर्ती में आ गईं। उन्होंने बताया कि कुर्ती की मैचिंग की सलवार नहीं थी तो वह मैंने अपनी नौकरानी से मांगकर पहन ली। ऐक्टिंग में उनका इतना इंट्रेस्ट देख कर मैं फिदा हो गया। कहानी सुनते ही वह तैयार हो गईं। बोली: अब आप पर है कि मुझे लेते हैं या नहीं। मैंने कहा: आप ही हैं मेरी प्रियंवदा।
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हर फिल्म कुछ कहती है। बधाई हो क्या कहती है ?
यह हल्की-फुल्की कॉमेडी है लेकिन एक परिवार की इमोशनल कहानी भी है। हीरो शादी लायक है उसकी गर्लफ्रेंड है। ऐसे में जब उसके माता-पिता फिर एक और बच्चे के पेरेंट्स बनने वाले हैं तो थोड़ी अजीब स्थिति पैदा होती है और सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि लोग क्या कहेंगे मोहल्ला क्या बोलेगा गर्लफ्रेंड क्या कहेगी गर्लफ्रेंड की मां क्या सोचेगी असल में हम लोग यह नहीं सोचते कि हम बड़े हो गए हैं तो क्या मां-पिता का प्यार खत्म हो गया आप कह सकते हैं कि यह माता-पिता के प्यार की कहानी है। जो बहुत खूबसूरत है।
यह हल्की-फुल्की कॉमेडी है लेकिन एक परिवार की इमोशनल कहानी भी है। हीरो शादी लायक है उसकी गर्लफ्रेंड है। ऐसे में जब उसके माता-पिता फिर एक और बच्चे के पेरेंट्स बनने वाले हैं तो थोड़ी अजीब स्थिति पैदा होती है और सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि लोग क्या कहेंगे मोहल्ला क्या बोलेगा गर्लफ्रेंड क्या कहेगी गर्लफ्रेंड की मां क्या सोचेगी असल में हम लोग यह नहीं सोचते कि हम बड़े हो गए हैं तो क्या मां-पिता का प्यार खत्म हो गया आप कह सकते हैं कि यह माता-पिता के प्यार की कहानी है। जो बहुत खूबसूरत है।