ये उन दिनों की बात है जब हिंदी सिनेमा में ‘साउंड’ को लेकर नए जमाने के निर्देशक बहुत सजग हो चुके थे। मैं एक नई फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ देखने गया। फिल्म शुरू हुई तो परदे पर चल रहे दृश्यों की आवाजें अलग अलग दिशाओं से आती हुई सुनाई दीं। ध्यान से सुनने पर पता चला कि ये फोर ट्रैक स्टीरियोफोनिक साउंड से आगे की तकनीक थी। जी हां, 15 अप्रैल 1994 को रिलीज हुई निर्माता निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ देश की पहली डॉल्बी एसआर साउंड के साथ रिलीज फिल्म है। 1975 में रिलीज हुई ‘शोले’ देश की पहली फोर ट्रैक स्टीरियोफोनिक साउंड वाली फिल्म थी। आज के बाइस्कोप में बात फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ की हो रही है जिसे रिलीज हुए 27 साल पूरे हो गए। भारत छोड़ो आंदोलन की पृष्ठभूमि में रची गई ये एक काल्पनिक कहानी है।
Bioscope S2: शाहरुख के लिए सोचा गया था ‘1942 ए लव स्टोरी’ में ये वाला रोल, ऐसे हुई मनीषा की एंट्री
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जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, मनीषा कोइराला और अनुपम खेर स्टारर ये फिल्म हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्मों में मानी जाती है और इसे ये दर्जा दिलाने में इसके अद्भुत दृश्य संयोजन, अभिनय, संगीत, सिनेमैटोग्राफी, साउंड, कला निर्देशन, संपादन और गानों की अनोखी कोरियोग्राफी का भी हाथ रहा। संगीत के चार और अभिनय का एक फिल्मफेयर पुरस्कार जीतने के अलावा फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ ने नितिन देसाई को सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन, रेनू सलूजा को सर्वश्रेष्ठ संपादन, जीतेंद्र चौधरी व नमिता नायक को सर्वश्रेष्ठ ध्वनि (साउंड) और बिनोद प्रधान को सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफर के फिल्मफेयर पुरस्कार भी दिलाए। अब खुद एक नामचीन निर्देशक बन चुके संजय लीला भंसाली तब फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ के निर्देशक विधु विनोद चोपड़ा के सहायक हुआ करते थे। फिल्म के गानों का निर्देशन भंसाली ने ही किया था। इस फिल्म के अलावा संजय लीला भंसाली ने विधु की दो और फिल्मों ‘परिंदा’ व ‘करीब’ के गाने भी निर्देशित किए थे। संजय लीला भंसाली ने ये फिल्म विधु और कामना चंद्रा के साथ मिलकर लिखी भी है। फिल्म के 27 साल पूरे होने पर इसके मुख्य कलाकारों में से एक अनिल कपूर ने गुरुवार को इस फिल्म से जुड़ी अपनी यादें ताजा कीं।
वैसे तो फिल्म में अनिल कपूर के होने पर एक वक्त इस लिहाज से भी सवाल उठने लगे थे कि उनकी यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘लम्हे’ फ्लॉप हो गई थी। कहते हैं तब अनिल के भाई संजय कपूर को इस फिल्म में लेने की बात चली थी। लेकिन, कम लोग ही ये जानते होंगे कि अगर सब कुछ विधु के मनमाफिक हुआ होता तो ये आमिर खान और शाहरुख खान की परदे पर एक साथ पहली अपीयरेंस होती। अनिल कपूर के नरेन वाले रोल के लिए पहले आमिर खान से ही बात चली थी और शाहरुख खान को विधु उस रोल में लेना चाहते थे जिसे बाद में रघुबीर यादव ने किया। अपने किरदारों के लिए अपना रंग रूप और कद काठी बदलने की शुरूआत भले आमिर खान से मानी जाती हो लेकिन सच बात तो ये है कि 90 के दशक में इसकी शुरूआत अनिल कपूर ने की। फिल्म ‘लम्हे’ के लिए उन्होंने अपनी मूंछे साफ करा दी थीं और फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ के लिए भी उन्होंने अपने बाल छोटे कराए और मूंछे बहुत बारीक करा दी थीं। अनिल कपूर का ये ताजगी भरा लुक लोगों को खूब पसंद आया। परदे पर उनकी और मनीषा कोइराला की जोड़ी तो उस दौर की सबसे रोमांटिक जोड़ी बन गई थी।
मनीषा कोइराला का फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ में आना भी संयोग से कम नहीं है। फिल्म में गीतकार जावेद अख्तर ने सबसे चर्चित गाना ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा..’ दरअसल माधुरी दीक्षित को ध्यान में रखकर ही लिखा था। राजेश्वरी पाठक उर्फ रज्जो का ये किरदार विधु ने भी माधुरी के हिसाब से ही गढ़ा था। फिल्म में उनकी एक छोटी बहन का भी किरदार था जिसके लिए मनीषा कोइराला ने ऑडिशन दिया था। फिर शूटिंग करीब आई तो माधुरी दीक्षित के पास तारीखों का टोटा हो गया और इतनी जल्दी कोई दूसरी हीरोइन की तारीखें मिलना भी मुश्किल था। विधु ने तुरंत मनीषा का टेप फिर से निकलवाया। उनका दोबारा रज्जो के लिए ऑडीशन कराया और उनका नाम इस किरदार के लिए फाइनल कर दिया। विधु ने बाद में छोटी बहन का रोल ही कहानी से हटा दिया। फिल्म में प्राण, डैनी, आशीष विद्यार्थी, रघुबीर यादव, सुषमा सेठ, मनोहर सिंह और ब्रायन ग्लोवर भी अहम भूमिकाओं में दिखे।
जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर की जोडी को लोगों ने फिल्मों ‘अंदर बाहर’ और ‘युद्ध’ में काफी पसंद किया। तब जैकी ही इस जोड़ी के सीनियर सितारे थे और फिल्म की बड़ी हीरोइन की जोड़ी भी उनके साथ ही बनती थी। लेकिन ‘1942: ए लव स्टोरी’ में जैकी ने अनिल के सामने सेकंड लीड रोल किया और फिल्म में उनकी कोई हीरोइन भी नहीं थी। खास बात ये है कि पूरी फिल्म में जैकी के किरदार शुभांकर और अनिल के किरदार नरेन के बीच कोई संवाद नही हैं। बाद में फिल्म ‘कर्मा’ में जैकी ने फिर अपनी वरिष्ठता हासिल की और फिल्म की मुख्य हीरोइन श्रीदेवी की जोड़ी उनके साथ ही बनी, जबकि अनिल कपूर की हीरोइन थी पूनम ढिल्लों। जैकी श्रॉफ उन दिनों व्यस्त कलाकार थे और उन्होंने एकबारगी फिल्म से अपना नाम वापस लेने की गुजारिश भी की थी। तब उन्होंने ही अपने इस किरदार के लिए मिथुन चक्रवर्ती का नाम सुझाया था, लेकिन ये खबर फैली तो फिल्म के वितरण से जुड़ चुके लोगों ने विधु को ऐसा करने से मना कर दिया। जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर की जोड़ी उन दिनों बॉक्स ऑफिस पर हिट की गारंटी हो चुकी थी। जैकी श्रॉफ को इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था। नेशनल अवार्ड विनर निर्देशक अश्वनी चौधरी बताते हैं कि ये फिल्म देखते समय उनकी पत्नी गर्भवती थीं और फिल्म देखने के बाद उन्होंने तय किया कि अगर बेटा हुआ तो दोनों उसका नाम शुभांकर ही रखेंगे जो कि फिल्म में जैकी श्रॉफ के किरदार का नाम है। शुभांकर चौधरी अब 26 साल के हो चुके हैं और फिल्म इंडस्ट्री में निर्देशक बेजॉय नांबियार के सहायक हैं।