हिंदी सिनेमा में कभी अपनी शरारतों और शोखियों को अपने किरदारों के भोलेपन में तब्दील कर देने वाले अभिनेता सलमान खान की बतौर हीरो पहली फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ को रिलीज हुए 31 साल बीत चुके हैं। लेकिन अपनी पहली फिल्म ‘बीवी हो तो ऐसी’ के दिनों में सलमान खान ने एक फिल्म और साइन की थी, जिसके लिए फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के हिट होने के बाद उनके पास तारीखें ही नहीं बचीं। फिल्म में दिलीप कुमार की पत्नी सायरा बानो की भतीजी को बतौर हीरोइन लॉन्च होना था। नाम था उनका शाहीन। आज का बाइस्कोप है अभिनेत्री शाहीन की हिट फिल्म ‘आई मिलन की रात’ के बारे में।
Bioscope S2: इस फिल्म की कामयाबी ने खत्म कर दिया इसकी हीरोइन का करियर, सलमान खान से रहा करीबी रिश्ता
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सलमान खान की पहली ‘गर्लफ्रेंड’
फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ के हिट होने के बाद सलमान खान के करियर का ग्राफ पूरी तरह बदल गया। शाहीन भी सलमान की तरह फिल्म ‘महासंग्राम’ में एक छोटा सा रोल कर चुकी थीं, लेकिन बड़े परदे पर सलमान की हीरोइन बनना उनको नसीब न हुआ। कहा जाता है कि शाहीन और सलमान खान उन दिनों काफी करीबी दोस्त हुआ करते थे। सलमान ने अपनी खासमखास दोस्त की फिल्म छोड़ दी तो शाहीन की बतौर हीरोइन इस पहली फिल्म ‘आई मिलन की रात’ के हीरो इसके बाद बने अविनाश वधावन। फिल्म के गाने साल 1991 के चार्टबस्टर गानों में रहे और 26 अप्रैल 1991 को रिलीज हुई फिल्म ‘आई मिलन की रात’ भी हिट रही।
‘नगीना’ और ‘निगाहें’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के दौर में रिलीज हुई फिल्म ‘आई मिलन की रात’ की कहानी में भी तांत्रिक है। नाग है। नागिन है। ठाकुर परिवार की हीरोइन है। पिछड़ी जाति का हीरो है। अगड़े पिछड़े के इस संघर्ष में प्रेम में खाई कसमें हैं। शादी के मंडप में टूटती रस्में हैं और है कलाकारों का एक ऐसा मेला जिसने निर्देशक के पप्पू की इस मसाला फिल्म में अभिनय का हर रस घोलने की कोशिश की। फिल्म ‘आई मिलन की रात’ में अविनाश वधावन, शाहीन, कुलभूषण खरबंदा, आलोक नाथ, परेश रावल आदि कलाकारों ने अपने अपने रोल करीने से निभाए हैं। अविनाश वधवान के लिए फिल्म ‘आई मिलन की रात’ उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बनकर आई। इससे पहले ‘आवाज दे कहां है’ और ‘इंसाफ की पुकार’ में नजर आए अविनाश को पता था कि ये फिल्म सलमान खान ने छोड़ी है और सलमान खान वाला रोल मिलना उनके करियर के लिए कितना बड़ा फायदा पहुंचा सकता है। अविनाश ने अपनी तरफ से इसके लिए कोशिशें भी फिल्म में खूब कीं।
सिनेमा का चित्रहार
टी सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार ने उन दिनों म्यूजिकल फिल्मों का एक नया ट्रेंड शुरू करने की कोशिश की थी। चित्रहार की तरह इन फिल्मों में दर्जन भर गाने होते और गाने ऐसे कमाल होते कि रिलीज होते ही श्रोताओं की जुबान पर चढ़ जाते। गुलशन कुमार ने ये परंपरा साल 1989 में रिलीज फिल्म ‘लाल दुपट्टा मलमल का’ से शुरू की थी। इसकी सीक्वेल भी उन्होंने बनाई ‘फिर लहराया लाल दुपट्टा’। इसी क्रम में ही गुलशन कुमार ने ‘आई मिलन की रात’ भी बनाई थी। ये वो फिल्में थीं जिन्होंने सिर्फ अपने म्यूजिक की बिक्री से मुनाफा कमाया। फिल्म की टिकटें बिकने न बिकने की इसके मेकर्स ने कभी परवाह भी नहीं की।
समीर की कलम का कमाल
‘लाल दुपट्टा मलमल का’ के सभी गाने मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे, यहां फिल्म ‘आई मिलन की रात’ में ये जिम्मेदारी मिली गीतकार समीर को। अपने जोड़ीदार संगीतकारों आनंद मिलिंद के साथ समीर ने फिल्म के लिए 11 गाने लिखे। सारे गाने एक से बढ़कर एक हिट। गुलशन कुमार की संगीत की ये साधना अनुराधा पौडवाल को लता मंगेशकर से बड़ी पार्श्वगायिका बनाने के लिए भी चल रही थी। तब टी सीरीज के अधिकतर महिला स्वर वाले गाने अनुराधा ही गातीं थीं। फिल्म ‘आई मिलन की रात’ के सभी गानों में अनुराधा की ही आवाज है। उनके जोड़ीदार के तौर पर अधिकतर गानों में मोहम्मद अजीज रहे। सुरेश वाडेकर के अलावा एक गाना फिल्म का उदित नारायण के हिस्से भी आया और यही गाना फिल्म ‘आई मिलन की रात’ का सबसे लोकप्रिय गाना भी बना।