हिंदी सिनेमा के सबसे मशहूर लेखकों में शुमार रहे सलीम-जावेद ने शुरू में तमाम ओरीजनल आइडियाज पर काम किया। खूब सारी कहानियां लिखीं जिनके तार किन्हीं दूसरी फिल्मों से नहीं टकराते थे। लेकिन, बाद में उन्हें लगा कि शायद हिंदी सिनेमा को ओरीजनल कहानी पच नहीं पाती है। तो उन्होंने ऐसी कहानियों पर फिल्में लिखनी शुरू कीं जिनके बीज तो पहले से ही सिनेमा में बोए जा चुके थे, लेकिन जिनके समीकरणों का नए जमाने को जमने वाला विस्तार कम लेखक ही सोच पाए। राजेश खन्ना से लेकर अमिताभ बच्चन से होते हुए सलीम-जावेद की जो कहानी अनिल कपूर तक आई, उसमें खासियत अनिल कपूर की ये रही कि उन्होंने अमिताभ बच्चन के लिए लिखे गए एक रोल को परदे पर यूं करके दिखा दिया कि कहीं से लगा ही नहीं कि ये रोल अनिल कपूर के लिए नहीं लिखा गया था।
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अमिताभ के लिए लिखी गई फिल्म
ये तो आपको पता ही होगा कि अमिताभ बच्चन को फिल्म ‘शोले’ दिलाने में सलीम खान का बड़ा हाथ रहा है। पूरे हॉल में अकेले बैठे रमेश सिप्पी के लिए फिल्म ‘ज़ंजीर’ का शो सलीम खान ने अपने पैसे से किया था। फिर, मनमोहन देसाई से अमिताभ बच्चन की पहली मुलाकात भी सलीम खान ने वैसे ही कराई जैसे चंद्रा बारोट ने उनकी मुलाकात मनोज कुमार से कराई थी। ये सारी शुरूआती मुलाकातें तुरंत किसी फैसले में भले न तब्दील हो सकी हों लेकिन ये सारी मुलाकातें आगे चलकर अमिताभ बच्चन के लिए तमाम हिट फिल्में लेकर आईं। हिंदी सिनेमा पैसों का खेल है। रिश्ते यहां हर रोज बदलते हैं। सलीम-जावेद को ये गुमान हो गया था कि वह बड़े लेखक हैं। सारे सितारे उनकी फिल्मों का हिस्सा बनने के लिए लालायित रहते हैं तो क्यों न खुद ही फिल्म प्रोड्यूसर बना जाए।
अमिताभ ने नहीं घटाई फीस
बतौर प्रोड्यूसर जो पहली फिल्म सलीम-जावेद बनाना चाहते थे, वह थी फिल्म ‘मि. इंडिया’। हीरो अमिताभ बच्चन। दोनों ये भी चाहते थे कि अमिताभ इसके लिए अपनी फीस भी कम कर दें। लेकिन, ये उन दिनों की बात है जब अमिताभ के बही खाते अजिताभ की निगरानी में थे। उन्होंने फीस कम करने से मना कर दिया और बताते हैं कि अमिताभ ने कह दिया, ‘लोग थिएटर में मेरी शक्ल देखने आते हैं और जिस फिल्म में मैं दिखूंगा ही नहीं, उसमें मेरे होने न होने से क्या फर्क पड़ता है।’
सलीम-जावेद में यहां से पड़ी दरार
बात सलीम खान को चुभ गई। जावेद अख्तर को अलग ले जाकर उन्होंने बात की। बताते हैं कि दोनों ने मिलकर ये तय किया कि अब कभी अमिताभ बच्चन के साथ काम नहीं करेंगे। लेकिन, बात तब बिगड़ी जब जावेद अख्तर अगली मर्तबा अमिताभ बच्चन के सामने पड़े और उन्होंने पूरी बात का ठीकरा सलीम खान के सिर फोड़ दिया। जावेद अख्तर का इससे पहले राजेश खन्ना से पंगा हो चुका था और अमिताभ बच्चन के ना कहने पर जावेद अख्तर ने फिल्म ‘मि. इंडिया’ के लिए राजेश खन्ना के साथ लंबी बैठकी भी की। उनसे अपनी पिछली बार की गलती की माफी भी मांगी पर राजेश खन्ना नहीं माने। फिल्म जगत में राजेश खन्ना और जावेद अख्तर की इस बैठक की खूब चर्चा रही और किशोर कुमार ने फिल्म के तमाम गाने तो इसी भ्रम में रिकॉर्ड कर दिए कि फिल्म के हीरो राजेश खन्ना ही हैं। खैर, अमिताभ बच्चन और राजेश खन्ना के इंकार के बाद फिल्म के हीरो अनिल कपूर बने। अनिल कपूर और श्रीदेवी को लेकर उन दिनों फिल्म निर्देशक बापू एक फिल्म शुरू करने जा रहे थे। बोनी की तब तक बापू से अच्छी ट्यूनिंग हो चुकी थी। बापू को भी बोनी में एक समझदार निर्माता समझ आने लगा था। बोनी की बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म ‘हम पांच’ के निर्देशक भी बापू ही थे। अनिल और श्रीदेवी की बापू की फिल्म की तारीखें खाली कराकर बोनी ने फिल्म ‘मि. इंडिया’ शुरू की।
बोनी कपूर ने चुना शेखर को
फिल्म ‘मि. इंडिया’ में अनिल कपूर और श्रीदेवी का आना भले इत्तेफाक रहा हो पर इसके निर्देशक शेखर कपूर को इस फिल्म में बोनी कपूर खुद लेकर आए। बोनी ने शेखर कपूर की पहली फिल्म ‘मासूम’ का नरेशन सुना था। और, वह इस नए निर्देशक से प्रभावित भी बहुत थे। बोनी एक बार शबाना आजमी के साथ शेखर कपूर से मिलने गए थे और वहीं बच्चों की एक फिल्म के लिए शेखर को 10 हजार रुपये का चेक देकर साइन कर आए थे। शेखर कपूर अतरंगी किस्म के फिल्मकार हैं। देव आनंद के वह भांजे हैं और तमाम फिल्मी दिग्गजों के साथ उनका उठना बैठना रहा।