कभी बालाजी टेलीफिल्म्स की क्रिएटिव हेड रहीं अभिनेत्री, लेखक और फिल्म निर्माता रश्मि सोमवंशी की नई फिल्म ‘तमसो’ का चयन अमेरिका के प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल फैंटास्टिक फेस्ट के लिए हो गया है। फिल्म का निर्देशन स्टीफन एलेक्जेंडर ने किया है। भारतीय लोक परंपराओं और दंतकथाओं के धागों में बुनी ये एक रोमांचक फिल्म है जिसके बारे में फिल्म फेस्टिवल के फीचर प्रोग्रामर ऑस्टिन किंग ने कहा है कि ये काफ्का की फिल्म ‘द मेटामॉरफोसिस’ के भारतीय संस्करण जैसी फिल्म है। लेकिन, अगले महीने के अंत में होने जा रहे इस फिल्म समारोह में शायद ही रश्मि सोमवंशी शामिल हो पाएं क्योंकि अमेरिका का वीजा पाने के लिए इन दिनों बहुत लंबी कतार है।
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Fantastic Fest 2023: ‘तमसो’ को फैंटास्टिक फिल्म फेस्ट से न्योता, प्रतापगढ़ की बेटी का अमेरिका में होगा धमाका
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तमसो और रश्मि सोमवंशी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
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रश्मि सोमवंशी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
प्रतापगढ़ की बेटी का डंका
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जन्मी रश्मि सोमवंशी हिंदी फिल्म जगत का प्रतिष्ठित नाम हैं। दिल्ली में पत्रकारिता की पढ़ाई और पढ़ाई के दौरान ही वहां काम की शुरुआत कर देने के बाद रश्मि ने कोई 13 साल पहले मुंबई का रुख किया। एक खास मुलाकात में रश्मि बताती हैं, ‘मैंने अपनी मिट्टी की कहानियों से नाता बहुत पहले ही जोड़ लिया था। तमाम काम करने के दौरान भी मेरा इन कहानियों को बुनने का काम जारी रहा। दृश्यम फिल्म्स की पिछली फिल्म ‘सिया’ की शूटिंग मेरे गांव में ही हुई और इस फिल्म के निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बाद मुझे लगा कि अब मुझे अपनी खुद की कंपनी बना लेनी चाहिए।’
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में जन्मी रश्मि सोमवंशी हिंदी फिल्म जगत का प्रतिष्ठित नाम हैं। दिल्ली में पत्रकारिता की पढ़ाई और पढ़ाई के दौरान ही वहां काम की शुरुआत कर देने के बाद रश्मि ने कोई 13 साल पहले मुंबई का रुख किया। एक खास मुलाकात में रश्मि बताती हैं, ‘मैंने अपनी मिट्टी की कहानियों से नाता बहुत पहले ही जोड़ लिया था। तमाम काम करने के दौरान भी मेरा इन कहानियों को बुनने का काम जारी रहा। दृश्यम फिल्म्स की पिछली फिल्म ‘सिया’ की शूटिंग मेरे गांव में ही हुई और इस फिल्म के निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी संभालने के बाद मुझे लगा कि अब मुझे अपनी खुद की कंपनी बना लेनी चाहिए।’
तमसो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
कोशिश स्वतंत्र हुनरमंदों का मंच बनाने की
गैर पारंपरिक थ्रिलर फिल्म ‘तमसो’ रश्मि सोमवंशी की बतौर स्वतंत्र निर्माता पहली फिल्म है जिसे दृश्यम फिल्म्स प्रस्तुत कर रही है। निर्माता, निर्देशक सतीश कौशिक की फिल्म ‘छोरियां छोरों से कम नहीं होती’ में बतौर अभिनेत्री खूब वाहवाही लूटने वाली रश्मि कहती हैं, ‘अभिनय मेरे व्यक्तित्व का एक ऐसा पहलू है जिस पर मैं बहुत गंभीरता से काम करती रहती हूं। हाल ही मैंने नवरस का प्रशिक्षण लिया है और कैमरे के सामने लगातार काम करते रहने के लिए अभिनय की चुनौतियां भी तलाशती रहती हूं लेकिन मेरा सपना एक ऐसा मंच विकसित करने का है जहां भारतीय संवेदनाओं की कहानियां कहने वाले निर्देशक, लेखक और कलाकार एक साथ एक टीम बनाकर काम कर सकें। ‘तमसो’ इसी की शुरुआत है।’
गैर पारंपरिक थ्रिलर फिल्म ‘तमसो’ रश्मि सोमवंशी की बतौर स्वतंत्र निर्माता पहली फिल्म है जिसे दृश्यम फिल्म्स प्रस्तुत कर रही है। निर्माता, निर्देशक सतीश कौशिक की फिल्म ‘छोरियां छोरों से कम नहीं होती’ में बतौर अभिनेत्री खूब वाहवाही लूटने वाली रश्मि कहती हैं, ‘अभिनय मेरे व्यक्तित्व का एक ऐसा पहलू है जिस पर मैं बहुत गंभीरता से काम करती रहती हूं। हाल ही मैंने नवरस का प्रशिक्षण लिया है और कैमरे के सामने लगातार काम करते रहने के लिए अभिनय की चुनौतियां भी तलाशती रहती हूं लेकिन मेरा सपना एक ऐसा मंच विकसित करने का है जहां भारतीय संवेदनाओं की कहानियां कहने वाले निर्देशक, लेखक और कलाकार एक साथ एक टीम बनाकर काम कर सकें। ‘तमसो’ इसी की शुरुआत है।’
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तमसो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
पहेली से कम नहीं ‘तमसो’ का पोस्टर
फिल्म ‘तमसो’ एक ऐसी युवती की कहानी है जो लंबे अरसे से अपने घर से दूर रह रही है और उसे एक वैवाहिक कार्यक्रम के लिए इसलिए वापस घर लौटना पड़ता है क्योंकि परिवार की एक बच्ची पर साया है। रश्मि कहती हैं, ‘हम सबके भीतर कहीं न कहीं कुछ न कुछ ऐसा होता है जिसे हम एक अच्छे इंसान के रूप में खुद को प्रस्तुत करने के लिए दबाते रहते हैं। लेकिन, अवचेतन में धीरे धीरे पनपती रहनी वाली ये अनुभूति अगर किसी कारण से खुद को प्रकट करने का अवसर पा जाए तो क्या होगा, यही इस फिल्म का सार है।’ फिल्म ‘तमसो’ का पोस्टर भी बहुत ही बुद्धि कौशल से बनाया गया है। पहली नजर में देखने में इसमें पोखर के पास बनी आकृतियों नजर आती हैं, लेकिन दरअसल यह एक योनि का चित्र है। रश्मि के मुताबिक, ये अमूर्त पोस्टर फिल्म की पूरी कहानी कहता है लेकिन ये समझ में तब आता है जब आप फिल्म देख चुके होते हैं। फिल्म के पोस्टर ने दर्शकों में काफी उत्सुकता जगाई है और यही इस पोस्टर की असली जीत है।
फिल्म ‘तमसो’ एक ऐसी युवती की कहानी है जो लंबे अरसे से अपने घर से दूर रह रही है और उसे एक वैवाहिक कार्यक्रम के लिए इसलिए वापस घर लौटना पड़ता है क्योंकि परिवार की एक बच्ची पर साया है। रश्मि कहती हैं, ‘हम सबके भीतर कहीं न कहीं कुछ न कुछ ऐसा होता है जिसे हम एक अच्छे इंसान के रूप में खुद को प्रस्तुत करने के लिए दबाते रहते हैं। लेकिन, अवचेतन में धीरे धीरे पनपती रहनी वाली ये अनुभूति अगर किसी कारण से खुद को प्रकट करने का अवसर पा जाए तो क्या होगा, यही इस फिल्म का सार है।’ फिल्म ‘तमसो’ का पोस्टर भी बहुत ही बुद्धि कौशल से बनाया गया है। पहली नजर में देखने में इसमें पोखर के पास बनी आकृतियों नजर आती हैं, लेकिन दरअसल यह एक योनि का चित्र है। रश्मि के मुताबिक, ये अमूर्त पोस्टर फिल्म की पूरी कहानी कहता है लेकिन ये समझ में तब आता है जब आप फिल्म देख चुके होते हैं। फिल्म के पोस्टर ने दर्शकों में काफी उत्सुकता जगाई है और यही इस पोस्टर की असली जीत है।
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अब अमेरिका का वीजा मिलने का इंतजार
रश्मि सोमवंशी अपनी फिल्म ‘तमसो’ के फनटास्टिक फिल्म फेस्ट 2023 में प्रदर्शन के दौरान खुद वहां मौजूद रहना चाहती हैं लेकिन अमेरिका के लिए वीजा पाने के इच्छुकों की लंबी कतार में उनके आवेदन का नंबर कब आएगा, उन्हें नहीं पता। वह कहती हैं, ‘किसी भी युवा फिल्मकार के लिए इतने प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल में जाना एक सपने के सच होने जैसा है। लेकिन, मुझे उम्मीद है कि समय रहते कुछ न कुछ व्यवस्था ऐसी जरूर हो जाएगी कि मैं अपनी टीम के साथ इस फिल्म के प्रीमियर पर अमेरिका में मौजूद रह सकूं।’
रश्मि सोमवंशी अपनी फिल्म ‘तमसो’ के फनटास्टिक फिल्म फेस्ट 2023 में प्रदर्शन के दौरान खुद वहां मौजूद रहना चाहती हैं लेकिन अमेरिका के लिए वीजा पाने के इच्छुकों की लंबी कतार में उनके आवेदन का नंबर कब आएगा, उन्हें नहीं पता। वह कहती हैं, ‘किसी भी युवा फिल्मकार के लिए इतने प्रतिष्ठित फिल्म फेस्टिवल में जाना एक सपने के सच होने जैसा है। लेकिन, मुझे उम्मीद है कि समय रहते कुछ न कुछ व्यवस्था ऐसी जरूर हो जाएगी कि मैं अपनी टीम के साथ इस फिल्म के प्रीमियर पर अमेरिका में मौजूद रह सकूं।’