बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में पॉप सिंगिंग को अलग मुकाम तक ले जाने का श्रेय ऊषा उत्थुप को जाता है। अपनी दमदार आवाज की वजह से वह बाकि सिंगर्स से बिलकुल अलग पहचानी जाने लगी। उन्होंने बॉलीवुड में कई ऐसे गाने दिए जिसपर लोग आज भी झूमकर नाचने को मजबूर हो जाते हैं। इसके साथ ही उनका लुक भी अक्सर चर्चा में रहा, उनकी कांजीवरम साड़ी, बड़ी गोल बिंदी के साथ बालों में फूलों का गजरा डाले ऊषा उत्थुप अलग ही पहचान बना चुकी हैं। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि ऊषा के लिए बॉलीवुड का सफर इतना आसान नहीं था, बल्कि वह नाइटक्लब में गाना गाकर गुजारा करती थीं। आज ऊषा उत्थुप के जन्मदिन (8 नवंबर 1947) के मौके पर जानिए कैसे वह नाइटक्लब से बॉलीवुड की पॉप सिंगिंग क्वीन बनीं।
Birthday Special: फिल्मों से पहले होटल में गाना गाती थीं ऊषा उत्थुप, लोग उड़ाते थे आवाज का मजाक
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नाइटक्लब से की शुरुआत
बात तब की है जब ऊषा उत्थुप 20 साल की थीं। उन्होंने साड़ी पहनकर चेन्नई के एक छोटे से नाइटक्लब में गाना शुरू किया। इसके बाद वह मुंबई और कलकत्ता के कई बड़े नाइटक्लब में गाना गाती थी। लेकिन इसके बाद उन्होंने दिल्ली ओबेरॉय होटल में गाना शुरू किया, जहां से उनकी किस्मत बदल गई।
शशि कपूर ने दिया ऑफर
ओबेरॉय होटल में गाना गाने के दौरान शशि कपूर का ध्यान ऊषा उत्थुप की आवाज पर गया। वह उनकी आवाज से बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने ऊषा को अपने पास बुलाया और बॉलीवुड में गाना गाने का ऑफर दिया।
अलग आवाज से मिली पहचान
ऊषा ने 1970 में आई 'बॉम्बे टॉकीज' फिल्म में अंग्रेजी में गाना गाया था। 'हरे रामा हरे कृष्णा' फिल्म में ऊषा को आशा भोसले के साथ 'दम मारो दम'में गाना गाया था। जिसके बाद उन्हें कई फिल्मों में गाना गाने का मौका मिला। लेकिन जहां उन्हें एक ओर सफलता मिल रही थी, वहीं दूसरी ओर लोग उनका मजाक भी उड़ा रहे थे। दरअसल, लोगों को उनकी आवाज के भारीपन की वजह से मर्दाना आवाज वाली महिला के रुप में पहचाना जाने लगा। हालांकि इन सब चीजों से अलग ऊषा ने सिर्फ अपने करियर पर ही ध्यान दिया।