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Dussehra 2021: दुनिया से इस तरह विदा होना चाहता था 'रावण', यह थी लंकेश की अंतिम इच्छा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: अपूर्वा राय
Updated Fri, 15 Oct 2021 04:14 PM IST
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arvind trivedi
- फोटो : सोशल मीडिया
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देशभर में शुक्रवार को दशहरा मनाया जा रहा है। अधर्म पर धर्म की विजय के उपलक्ष्य में यह पर्व मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के मुताबिक आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को दशहरा मनाया जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन ही प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार किया था, इसलिए इस दिन को विजयादशमी भी कहा जाता है। दशहरे के दिन देशभर में रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले फूंके जाते हैं।
वैसे तो टीवी पर ना जाने कितने ही रामायण आप सभी ने देखे होंगे, लेकिन रामानंद सागर की रामायण ने जो लोकप्रियता हासिल की वह इतिहास में दर्ज है। रामायण में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी का हाल ही में निधन हो गया। 83 वर्षीय अरविंद त्रिवेदी ने अपने घर पर अंतिम सांस ली। अरविंद त्रिवेदी ने रामायण के अलावा और भी टीवी सीरियल में काम किया। अरविंद त्रिवेदी ने 250 से भी ज़्यादा गुजराती फिल्मों में काम किया।
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arvind trivedi ravan
- फोटो : Social Media
दूरदर्शन पर साल 1986 में शुरू हुए इस धारावाहिक में रावण की भूमिका ने अरविंद त्रिवेदी को दुनिया भर के टीवी दर्शकों का चहेता बना दिया। इस भूमिका की वजह से ही बाद में उन्हें ‘लंकेश’ नाम से पहचाना जाने लगा और दमदार आवाज में उनके द्वारा कहे गए डायलॉग घर-घर में बच्चों से लेकर बड़ों तक की जुबान पर गूंजने लगे।
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Arvind Trivedi
- फोटो : twitter
अरविंद त्रिवेदी को साल 2012 में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ फिल्म एंड सर्टिफिकेशन में एक्टिंग चेयरमैन बनाया गया था। क्या आप जानते हैं अरविंद त्रिवेदी को लोग असल में रावण समझते थे और उनकी पत्नी को मंदोदरी के नाम से बुलाते थे।
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अरुण गोविल, अरविंद त्रिवेदी
- फोटो : सोशल मीडिया
सीरियल में भगवान राम को उल्टा सीधा बोलने का अरविंद त्रिवेदी को इतना मलाल रहता था कि वे पूरे दिन उपवास रखते थे। दरअसल अरविंद असल जिंदगी में राम और शिव भक्त थे। शूटिंग शुरू होने से पहले वे राम और शिव की पूजा आराधना करते और जब शूटिंग खत्म हो जाती तो कपड़े बदलकर रात को अपना उपवास खोलते थे।
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arvind trivedi ravan
- फोटो : Social Media
रावण की अंतिम इच्छा
रावण जैसी निगेटिव भूमिका निभाने के बाद भी अरविंद को लोगों का ढेर सारा प्यार मिला। अरविंद त्रिवेदी की आखिरी इच्छा थी कि जब उनका निधन हो उन्हें राम नाम का ही वस्त्र पहनाया जाए। इसलिए उनके निधन के बाद उन्हें धोती और 'राम' नाम का पीला कुर्ता पहनाया गया था।
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