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हाशिये के सुपरस्टार 5 राजेंद्र गुप्ता: ‘गांधी’ ने बदली एनएसडी की धारा, जिंदगी का बहाव अब विज्ञापनों के हवाले

Thu, 01 Sep 2022 02:07 PM IST
Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Thu, 01 Sep 2022 02:07 PM IST
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Hashiye Ke Superstar 5 Actor Rajendra Gupta shares journey from theatre to Mumbai famous characters directors
राजेंद्र गुप्ता - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से निकले कलाकारों ओम शिवपुरी, नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी के मुंबई आकर फिल्मों में नाम कमाने के बाद से ही एनएसडी के छात्रों का हिंदी फिल्म जगत की तरफ झुकाव होता रहा है। अभिनेता राजेंद्र गुप्ता ने भी इन्हीं कलाकारों के रास्ते पर कदम रखा। मुंबई आए। खूब धारावाहिक और फिल्में की और अपना एक अलग मुकाम बनाया। कविताओं और किस्सों से खासा लगाव रखने वाले राजेंद्र गुप्ता अपने प्रशंसकों के लिए किसी सुपरस्टार से कम नहीं रहे हैं। बदलते दौर के साथ वह जीवन को बदलते देख रहे हैं। कहानियां कहने के ढंग को बदलते देख रहे हैं और इस बदलते माहौल में अपनी संवेदनाओं और सहजताओं से समझौता किए बिना अपना काम किए जा रहे हैं, अनथक, अविचल। ‘अमर उजाला’ की श्रृंखला ‘हाशिये के सुपरस्टार’ की पांचवीं कड़ी में आज बातें इन्हीं दिग्गज कलाकार राजेंद्र गुप्ता से...


 

Hashiye Ke Superstar 5 Actor Rajendra Gupta shares journey from theatre to Mumbai famous characters directors
राजेंद्र गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

‘गांधी’ ने दिखाया रास्ता 
साल 1981 में फिल्म 'गांधी' की शूटिंग दिल्ली में भी हुई थी, तब उसमें एनएसडी के बहुत सारे कलाकारों को काम करने का मौका मिला। राजेंद्र गुप्ता कहते है, 'उस फिल्म में काम करके कलाकारों को अच्छे पैसे भी मिले। उन दिनों थियेटर में मुश्किल से पचास रुपये मिलते थे। फिल्म में अच्छे पैसे मिलने से यह बात तो समझ में आ गई कि सिनेमा में काम करने के लिए मुंबई जाना  पड़ेगा। मैं जब 1985 में मुंबई आया तो मेरे साथ के और मेरे काफी जूनियर्स मुंबई पहले ही आ चुके थे। जब मैं मुंबई आया तो उन दिनों दूरदर्शन के लिए बहुत सारे सीरियल की शूटिंग चल रही थी और नए कलाकारों की जरूरत थी जो काबिल भी हों।'  

Hashiye Ke Superstar 5 Actor Rajendra Gupta shares journey from theatre to Mumbai famous characters directors
राजेंद्र गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

पिता ने अपना विचार कभी नहीं थोपा
राजेंद्र गुप्ता के पिता जय भगवान दास का पानीपत में ऊनी कपड़ों का कारखाना था। राजेंद्र गुप्ता बताते हैं, 'मेरे पिता जी बहुत ही मेहनती इंसान थे। पानीपत में जो उद्योग की शुरुआत हुई, उसके फाउंडर मेंबर मेरे पिताजी ही थे। मेरे पिता जी ऐसे थे कि अगर बच्चे खुद से कुछ करना चाहते थे तो उन पर वह अपना विचार नहीं थोपते थे। वह यही बोलते थे कि तुम खुद समझदार हो देख लो कैसे क्या करना है? जब मैं एनएसडी में पढ़ता था, पिताजी खुद देखने आते थे। भाइयों को जरूर बुरा लगता था कि यहां इतना सारा काम है, पता नहीं क्या करने जा रहे हो। उस समय एनएसडी के बारे में किसी को पता ही नहीं था, नाटकों की भी पढ़ाई होती है। यह सुनकर ही अजीब लगता था।'

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Hashiye Ke Superstar 5 Actor Rajendra Gupta shares journey from theatre to Mumbai famous characters directors
राजेंद्र गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

पढ़ाई में दिलचस्पी कम हो गई 
नाटकों के प्रति झुकाव कैसे हुआ? ये पूछने पर राजेंद्र गुप्ता कहते हैं, 'मुझे ठीक से खुद भी याद नहीं कि कैसे झुकाव हुआ। स्कूल में वार्षिक कार्यक्रम में हमारे टीजर ने खड़ा कर दिया। मैं सातवी में था। टीचर ने 'महाराणा प्रताप' पर एक नाटक करवाया था। उस समय बहुत छोटा था। नाटकों की उतनी समझ नही थी, लेकिन नाटक में काम करके बहुत अच्छा लगा। उसके बाद जब कॉलेज में आए तो वहां भी वार्षिक कार्यक्रम में भाग लेता रहा। कॉलेज में आने के बाद पढ़ाई में मन कम लगने लगा, अक्सर मैं पढ़ाई करते करते सो जाता था। लेकिन जब नाटक करता था तो मुझे बहुत मजा आता था। मेरे कॉलेज के कुछ सीनियर्स थे, उन्होंने एनएसडी ज्वाइन करने की सलाह दी। उसके बाद नाटक जीवन बन गया।'

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राजेंद्र गुप्ता - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

ऐसे मिला पहला ब्रेक
राजेंद्र गुप्ता उस दौर के कलाकारों में हैं, जब एनएसडी के कलाकारों के जत्थे के जत्थे मुंबई आने शुरू हो चुके थे। उन दिनों की याद करते हुए राजेंद्र गुप्ता कहते है, 'थियेटर में काम और नाम तो था लेकिन चार पांच साल के बाद लगने लगा कि कुछ कमाओ भी। समाज और पारिवारिक दबाव तो होता ही है, खुद की भी जरूरत होती है। मेरा ऐसा व्यक्तित्व था कि मैं किसी से काम मांगने नहीं गया, ना ही अच्छे दोस्त बना पाया। मैं जून में मुंबई आया और अगस्त में मुझे दूरदर्शन के एक सीरियल 'कहानी'  में काम करने का मौका मिल गया। उस समय दूरदर्शन पर 'रजनी' सीरियल आता था, उसमें भी तीन चार एपिसोड में काम किया उसके बाद सुधीर मिश्रा की फिल्म 'ये वो मंजिल नहीं' मिल गई।'

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