संगीत जगत में मंगेशकर परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। दिवंगत गायिका और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने संगीत जगत को नई पहचान दी थी। वहीं, उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने भी संगीत को नए मुकाम तक पहुंचाया है। दिग्गज संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। हृदयनाथ मंगेशकर ने अपने संगीत के बल लोगों के दिलों में अपने लिए एक खास जगह बनाई। आज हृदयनाथ मंगेशकर अपना 86वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर चलिए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
Hridaynath Mangeshkar: लता मंगेशकर के भाई हैं संगीतकार हृदयनाथ, फिल्मी जगत में 'बालासाहेब' के नाम से हुए मशहूर
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हृदयनाथ ने समकालीन संगीतकारों की रचनाओं का भी अध्ययन किया। चौदह साल की उम्र में उन्होंने भक्ति गीत 'निसदिन बरसत नैन हमारे' और 'बरसे बुंदिया सावन की' की रचना की। वे गाने भी लोकप्रिय हुए। हृदयनाथ को प्रसिद्ध संगीतकारों का साथ मिला। उन्हें फिल्म जगत में कई नाम जाना गया। बचपन से ही उन्हें परिवार द्वारा प्यार से 'बाल' कहा जाता था, जिसके बाद से फिल्मी जगह में वह 'बाला साहेब' के नाम से विख्यात हुए। संगीत के प्रति समर्पित इस 'हृदय' को शंकराचार्य ने 'भाव गंधर्व' नाम दिया।
मराठी सिनेमा के बाद हृदयनाथ मंगेशकर ने बॉलीवुड का रुख किया और कई फिल्मों में संगीत दिया। उन्होंने 'माया मेमसाब', 'हरीशचंद्र तारामती', 'लाल सलाम', 'मशाल' और 'प्रार्थना' जैसी बॉलीवुड फिल्मों में स्कोर संगीत दिया था। उन्होंने टीवी शोज को भी संगीत दिया है। हृदयनाथ ने दूरदर्शन के सीरियल 'फूलवंती' के लिए संगीत बनाया था। इसके अलावा उन्होंने ने मछुआरों के लिए लोक गीत भी बनाए हैं। वहीं, हृदयनाथ मंगेशकर कवि-संत मीरा की कविताओं और गीतों को संपूर्ण एल्बम की रचना करने और उन्हें रिलीज करने वाले पहले संगीतकार थे। उन्होंने गालिब की गजलों की विशेषताओं वाला एक एल्बम भी बनाया है। उन्होंने हमेशा सोच समझ कर ही अपने काम का चुनाव किया। उन्होंने मराठी और हिंदी में वही गाने तैयार किए हैं, जो उन्हें अच्छे लगे हैं। उनका 1982 का एलबम ज्ञानेश्वर मौली काफी चर्चाओं में रहा।
हृदयनाथ मंगेशकर को अपने पूरे करियर में कई पुरस्कार मिले हैं। उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार, महाराष्ट्र राज्य का लता मंगेशकर पुरस्कार, और सर्वश्रेष्ठ गायक और संगीत निर्देशक / संगीतकार के लिए सात महाराष्ट्र राज्य पुरस्कार मिले हैं। उन्हें भीमसेन जोशी और जसराज के हाथों महाराष्ट्र के लोगों द्वारा पंडित की उपाधि से सम्मानित किया गया था। शंकराचार्य ने उन्हें भाव गंधर्व की उपाधि प्रदान की है। उन्हें 2009 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।