ओम प्रकाश एक कैरेक्टर आर्टिस्ट थे, लेकिन उनकी दमदार एक्टिंग का लोहा सभी मानते थे। जिस भी फिल्म में वह काम करते, उस फिल्म में जान डाल देते थे। एक फिल्मकार के रूप में जे ओमप्रकाश का कद बहुत बड़ा था। एक जमाना था, जब उनके नाम की तूती बोलती थी। फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का दूसरा नाम थे जे ओमप्रकाश।
J Om prakash: ऋतिक रोशन के गुरु थे नाना जे ओमप्रकाश, कुछ ऐसा था सुपरस्टार का जलवा
अविभाजित भारत के सियालकोट में 24 जनवरी 1927 को जन्मे जे. ओमप्रकाश के पिता लाहौर के एक स्कूल में शिक्षक थे। जे. ओमप्रकाश को भी पढ़ने का शौक बचपन से ही था। देश आजाद होने के बाद ओमप्रकाश मुंबई आ गए। यहां उन्होंने फिल्म लाइन में कुछ करने की ठानी, लेकिन राह आसान नहीं थी। शुरुआत में जे. ओमप्रकाश को स्पॉट ब्वॉय के रूप में काम करना पड़ा। जे. ओमप्रकाश ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'मैं स्पॉट ब्वॉय रहा। फिल्मों में कुछ और छोटे मोटे काम किए, लेकिन मैं हमेशा यह देखता था कि निर्देशक किसी दृश्य को कैसे फिल्मांकित करते हैं। इससे मैं काफी कुछ सीखता रहा।'
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अगर बात करें नाना-पोते के बीच रिश्ते की तो ऋतिक ने छह साल की उम्र में अपने नाना की फिल्म 'आशा' से फिल्मों में पदार्पण किया। बाद में भी ऋतिक ने अपने नाना संग बाल कलाकार के रूप में 'आसपास' और 'भगवान दादा' जैसी फिल्में भी कीं। जे. ओमप्रकाश और ऋतिक यानी नाना और नाती के बीच बहुत ही खूबसूरत, मधुर और मजबूत रिश्ता था। यहां तक कि जे. ओमप्रकाश अपनी वसीयत में भी यह लिख गए थे कि उनका अंतिम संस्कार ऋतिक ही करेंगे।
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ऋतिक उन्हें प्यार से डैडा कहते थे। जब ऋतिक की फिल्म 'सुपर-30' प्रदर्शित हुई तब ऋतिक ने कहा था, 'मेरे सुपर टीचर तो मेरे नाना जे. ओमप्रकाश हैं।' ऋतिक अपने नाना की कुछ फिल्मों में भी नजर आए थे, जिनमें 1986 में आई फिल्म ‘भगवान दादा’ भी शामिल है। जे. ओमप्रकाश ने आप की कसम (1974), आखिर क्यों? (1985), अपनापन (1977), आशा (1980), अपना बना लो (1982), अर्पण (1983) और आदमी खिलौना है (1983) आदि फिल्में बनाई थीं।
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