निर्देशक इंद्र कुमार को नई जनरेशन उनकी मस्ती और धमाल सीरीज की फिल्मों की वजह से जानती है लेकिन, इंद्र कुमार हिंदी सिनेमा के इकलौते निर्देशक हैं जिन्होंने माधुरी दीक्षित के साथ तीन फिल्में लगातार बनाईं। इंद्र कुमार से अमर उजाला की एक खास मुलाकात।
इस डायरेक्टर संग माधुरी दीक्षित ने दी थी लगातार 3 सुपरहिट फिल्में, अब फिर से करेंगी 'टोटल धमाल'
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माधुरी दीक्षित आपकी पसंदीदा अभिनेत्री रही हैं। करियर की पहली तीनों फिल्मों दिल, बेटा, राजा तो आपने उन्हीं के साथ बनाई। अब टोटल धमाल तक आते-आते क्या कुछ बदला है?
माधुरी दीक्षित के साथ 27 साल बाद काम करते यूं लगा जैसे कि अभी कल ही तो हम किसी दूसरी फिल्म में साथ काम कर रहे थे। मैंने जब टोटल धमाल की उनसे बात की तो उन्होंने झट से हां कर दी। बस उनका सवाल एक ही था कि मेरे पति का रोल कौन कर रहा है और यही सवाल मुझसे अनिल कपूर ने भी पूछा जब मैं टोटल धमाल उनके पास लेकर गया कि मेरी पत्नी का रोल कौन कर रहा है?
आपकी फिल्मों की प्रेम कहानियां हिंदी सिनेमा की क्लासिक कहानियों में गिनी जाती हैं, फिर कॉमेडी फिल्मों की तरफ कैसे रुख हुआ?
क्या हुआ कि मन (1999 – आमिर, मनीषा कोइराला, अनिल कपूर) के बाद मेरी कुछ फिल्में चली नहीं तो मैंने अपना दूसरे नजरिए से मूल्यांकन करना शुरू किया। मुझे समझ में तब आया कि मैं फिल्में अपने हिसाब से बनाता जा रहा हूं, दर्शकों के हिसाब से नहीं। दर्शकों की पसंद बदल चुकी थी तो फिर मैंने 2004 में मस्ती बनाई और 2007 में धमाल। अब तो दोनों फिल्मों की सीरीज बन चुकी हैं। कॉमेडी फिल्मों ने सिनेमा को नया इंद्र कुमार दिया।
अपनी फिल्म इश्क में आपने पहली बार अजय देवगन से कॉमेडी कराई। आपको लगा नहीं कि एक्शन ब्वॉय की इमेज रखने वाले एक कलाकार को कॉमेडी में लेना रिस्क है?
अजय देवगन की हर फिल्म उन दिनों मारधाड़ और एक्शन वाली होती थी। मैंने जब आमिर और अजय को लेकर इश्क की घोषणा की तो लोगों ने मुझे कहा कि पागल तो नहीं हो गया है। एक एक्शन स्टार को लेकर कॉमेडी फिल्म बनाकर क्यूं खुदकुशी कर रहा है लेकिन, मैंने अजय को पर्दे से बाहर बहुत करीब से देखा है। उसके भीतर का एक्टर ऐसा है कि वह कुछ भी कर सकता है। इश्क सुपरहिट रही और सबके मुंह बंद हो गए। अजय पर मेरा भरोसा पहले दिन से रहा है।
टोटल धमाल में सितारों की पूरी फौज है। एक निर्देशक होने के नाते कितना दबाव रहा आप पर कि हर कलाकार के किरदार को पर्दे पर पर्याप्त समय मिल सके?
मैं बहुत पारदर्शी व्यवहार वाला इंसान हूं। अगर मैं कहूं कि मेरे ऊपर कोई प्रेशर नहीं था सबको संभालने का, तो मैं झूठ कहूंगा। टोटल धमाल जैसी फिल्म बनाते समय हर कलाकार के किरदार के साथ न्याय करने का जबरदस्त मानसिक दबाव होता है लेकिन, मेरी मेकिंग ऐसी है कि मैं फिल्म कागज पर बहुत मजबूत कर लेता हूं तो जितना दबाव था वह सब मैंने फिल्म की पटकथा लिखे जाने तक ही रखा। उसके बाद सबको पता था कि किसका कितना रोल है, फिर कोई परेशानी नहीं हुई।